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यूपी : प्रदेश के 19 जिलों में शुरू होगा फाइलेरिया अभियान, घर-घर खिलाई जाएगी दवा

Sun, 07 Nov 2021 10:22 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Sun, 07 Nov 2021 10:22 AM IST
सार

अभियान 22 नवंबर से शुरू हो रहा है। ये जिले लखनऊ, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, अयोध्या, बाराबंकी, अमेठी, अंबेडकर नगर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, सोनभद्र, जौनपुर, भदोही, जालौन, हमीरपुर, चित्रकूट, बांदा एवं महोबा शामिल हैं।

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UP: Filaria campaign will start in 19 districts of the state, medicine will be fed from door to door
फाइलेरिया (सांकेतिक चित्र)

विस्तार

प्रदेश में 22 नबंवर से 19 जिले में फाइलेरिया अभियान शुरू किया जाएगा। इस दौरान घर-घर दवा खिलाई जाएगी। साथ ही फाइलेरिया के नए मरीज खोजे जाएंगे। रात में लोगों का सैंपल लेकर जांच भी कराई जाएगी।

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प्रदेश में फाइलेरिया से 51 जिले प्रभावित हैं। पहले चरण में फरवरी माह में नेपाल बार्डर से जुड़े जिलों में अभियान चलाया गया था। दूसरे चरण में जुलाई माह में 12 जिले में अभियान चलाया गया। अब 19 जिलों में यह अभियान 22 नवंबर से शुरू हो रहा है। ये जिले लखनऊ, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, अयोध्या, बाराबंकी, अमेठी, अंबेडकर नगर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, सोनभद्र, जौनपुर, भदोही, जालौन, हमीरपुर, चित्रकूट, बांदा एवं महोबा शामिल हैं। इन जिलों में अभियान चलाने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
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क्या है फाइलेरिया
यह बीमारी फ्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलता है, जो परजीवी कृमियों के लिए रोगवाहक का काम करता है। इस संक्रामक बीमारी में धागे जैसे कृमि होते हैं। इस बीमारी की चपेट में आने वाले मरीजों में 10 से 15 साल बाद हाथ, पैर, स्तन, अंडकोष में सूजन, पेशाब में सफेद रंग के द्रव्य का रिसाव, लंबे समय से सूखी खांसी आने जैसे लक्षण सामने आते हैं।
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रोकथाम के लिए अभिान
संयुक्त निदेशक फाइलेरिया डा. वीपी सिंह ने बताया कि रोकथाम के लिए हर साल मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) या ट्रिपल ड्रग थेरेपी अभियान चलाया जाता है। बीमारी से बचाव के लिए अभियान तहत लोगों को फाइलेरिया उपचार से जुड़ी दवाएं खिलाई जाती है। इसमे डायथाइल कार्बामैजीन व एल्बेंडाजोल होती हैं।


हालांकि दो साल से कम उम्र के बच्चों, गंभीर रूप से बीमार मरीजों एवं गर्भवती महिलाओं को यह दवा नहीं दिया जाता है। इसी तरह आईडीए के तहत इन दवाओं के साथ आइवरमेक्टिन भी दिया जाता है।  इसी तरह संबंधित इलाके में रात में ब्लड सर्वे भी किया जाता है। इसके तहत हर जिले में आठ स्थान से चार हजार सैंपल लिए जाते हैं।

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