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UP: भ्रष्टाचार में लिप्त मिले आवास विकास के 51 इंजीनियर...रिटायर हो चुके 15 पर इंजीनियर पर कार्रवाई तय

Fri, 26 Dec 2025 09:44 PM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: आकाश द्विवेदी Updated Fri, 26 Dec 2025 09:44 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद ने 51 इंजीनियरों को भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण में दोषी पाया। रिटायर 15 इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई तय की गई है। परिषद को करीब पांच करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने वाले अधिकारियों की पेंशन से धनराशि वसूल की जाएगी। बाकी 36 इंजीनियरों की जांच जारी है।

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UP: engineers of the Housing Development Department found involved in corruption... action to be taken agai
प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद ने 51 इंजीनियरों भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण के दोषी पाए गए हैं। इनमें रिटायर हो चुके 15 इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई को शुक्रवार हुई आवास विकास परिषद की बोर्ड बैठक में मंजूरी दी गई। शेष 36 अन्य इंजीनियरों के खिलाफ जांच चल रही है इनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इन इंजीनियरों ने परिषद को करीब पांच करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया है।
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आवास विकास बोर्ड में पास हुए प्रस्ताव के बारे में परिषद सचिव नीरज शुक्ला ने बताया कि वृंदावन योजना लखनऊ में जगत नारायण शुक्ला नामक व्याक्ति ने कई मामलों फर्जी रिफंड लिया था। करीब दो साल पहले सामने आए थे। इस मामले की जांच चल रही है और कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी हुई है। 
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व्यवसायिक भूखंडों के आवंटन में अनियमितता पाए जाने पर प्रभारी संपत्ति प्रबंधक डीके शुक्ला पर कुल क्षतिपूर्ति धनराशि 01 करोड़ 21 लाख 77 हजार 375 रुपये की वसूली उनकी पेंशन से की जाएगी। प्रशासनिक अधिकारी कन्हई प्रसाद से 70 हजार रुपये की वसूली पेंशन में कटौती से की जाएगी। वरिष्ठ सहायक केएन सिंह से धनराशि 01 करोड़ 21 लाख 77 हजार 374रुपये और कनिष्ठ लेखाधिकारी प्रमोद अग्रवाल से 9.70लाख रुपये क्षतिपूर्ति भी पेंशन से वसूल की जाएगी।
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बीएसयूपी योजना के भ्रष्टाचार करने वालों पर हुई कार्रवाई

आगरा में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी बीएसयूपी योजना (बेसिक सर्विसेज टू अर्बन पुअर) में घपलेबाजी को कई इंजीनियर जांच में लिप्त मिले। कालिंदी विहार योजना के द्वितीय पॉकेट में इस योजना के 272 भवनों, सामुदायिक केंद्र और कियोस्क के निर्माण में भारी अनियमितता बरती गई। आईआईटी रुड़की ने अपनी जांच में घटिया स्तर के निर्माण होने की पुष्टि हुई। इनके बनाने पर 05 करोड़ 25 लाख 55 हजार 589 रुपये खर्च हुए। 

इसके निर्माण से जुड़े पांच इंजीनियरों से इस रकम की वसूली की जाएगी। इनमें अवर अभियंता एसके सिंह भदौरिया से 1.58 करोड़ रुपये की वसूली उनकी पेंशन में 50 प्रतिशत की कटौती से की जाएगी। सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता नासिर हुसैन फाजिली, सहायक अभियंता राजीव कुमार यादव व अवर अभियंता गजेंद्र पाल जांच में दोषी पाए गए। इनकी पेंशन में 10 प्रतिशत की कटौती की जाएगी। 


सहायक अभियंता अनूप सचान त्रिपाठी और अवर अभियनंता हरि शंकर सचान की पेंशन से छह वर्षो तक 10 प्रतिशत की कटौती और सहायक अभियंता अफसर अली की पेंशन से दो वर्षो तक पांच प्रतिशत कटौती करने का निर्णय बोर्ड ने लिया। इसके अतिरिक्त विद्युत संवर्ग के सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता आरके गुप्ता ,सहायक अभियंता डीसी शुक्ला और डीआर मौर्या, अधीक्षण अभियंता सीपी सिंह व अवर अभियंता यूसी मिश्रा की पेंशन से तीन वर्ष तक पांच प्रतिशत की कटौती की जाएगी।

 
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