एनकाउंटर करने पर उठे सवाल तो यूपी के डीजीपी ने अफसरों को दी ये नसीहत, इमेज को लेकर हुए सतर्क
यूपी में एनकाउंटर को लेकर खड़े हो रहे सवाल के बीच डीजीपी ओम प्रकाश सिंह ने फील्ड में तैनात सीनियर अफसरों को नसीहत दी है कि फर्जी एनकाउंटर से बचें ताकि किसी तरह का विवाद न हो। जहां वास्तव में एनकाउंटर की स्थिति बने वहीं एनकाउंटर किए जाएं।
डीजीपी ने रविवार को यूपी 100 भवन में बुलाई गई समीक्षा बैठक में अधिकारियों को अपराध नियंत्रण के साथ-साथ कानून व्यवस्था और होली को लेकर निर्देश दिए। पांच घंटे चली मैराथन बैठक शुरू हुई तो पहले सभी जोन के एडीजी और रेंज के आईजी व डीआईजी को अपने अपने क्षेत्र के बारे में बोलने का मौका दिया गया। सभी ने अपने अपने क्षेत्रों में अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए किए जा रहे कार्यों के बारे में डीजीपी को बताया। बैठक में लखनऊ के आईजी मौजूद नहीं थे।
प्रोफेशनल पुलिसिंग के लिए मांगे सुझाव
डीजीपी ने प्रदेश में पुलिस को अधिक प्रोफेशनल बनाने और पुलिसिंग को किस तरह से और बेहतर किया जाए, इसके लिए सुझाव मांगे। आखिर में डीजीपी ने कहा कि बैठक का मकसद आप सब से रूबरू होने का था। उन्होंने कहा कि अपराध नियंत्रण के लिए रणनीति बना कर काम किया जाए।
इसके लिए सभी की जिम्मेदारी तय की जाए और जो जिम्मेदारी सही से पूरी न कर पा रहा हो, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। डीजीपी ने कहा कि अगर किसी जिले में पुलिस की किसी कार्रवाई का अच्छा रिस्पांस मिल रहा है या अच्छा प्रभाव पड़ रहा है तो उसे प्रदेश के दूसरे जिले में भी लागू किया जाए।
पुलिस की छवि के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
डीजीपी ने पुलिस की छवि खराब करने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे पुलिस कर्मियों की आवश्यकता नहीं है जो पुलिस की छवि पर बट्टा लगाएं। डीजीपी ने अधिकारियों को बताया कि नोएडा में शनिवार को जिस सिपाही ने युवती से रेप का प्रयास किया था उसे बर्खास्त कर दिया गया है। इस तरह की हरकतें बर्दाश्त नहीं होगी।
इलाहाबाद जैसी घटना की न हो पुनरावृत्ति
डीजीपी ने इलाहाबाद में हुई घटना को लेकर नाराजगी जाहिर की और कहा कि इस तरह की घटनाएं समाज में बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। उन्होंने इलाहाबाद पुलिस की कार्यशैली को भी कठघरे में खड़ा किया और कहा कि इस तरह के अपराध से पुलिस की इमेज खराब होती है।
डीजीपी ने अधिकारियों से कहा कि वह खुद भी दफ्तर से बाहर निकलें। थानों को विधिवत चेक करें, पुलिस लाइन जाएं, यूपी 100 की पीआरवी गाड़ियों को चेक करें। जोन और रेंज के अधिकारी पुलिस कप्तानों को भी गाइड करें।