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यूपी के मुख्य सचिव राजीव कुमार के सामने केवल 12 महीने, करना है कड़ी चुनौतियों का सामना

Sat, 01 Jul 2017 02:40 PM IST
amarujala.com, written by महेंद्र तिवारी
amarujala.com, written by महेंद्र तिवारी Updated Sat, 01 Jul 2017 02:40 PM IST
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up chief secretary rajiv kumar will have to face many challenges in all departments
मुख्य सच‌िव राजीव कुमार - फोटो : डेमो
प्रशासन‌िक सेवा का लंबा अनुभव रखने वाले यूपी के नए मुख्य सचिव राजीव कुमार-प्रथम के पास समय बहुत कम है और चुनौतियां ज्यादा। वे अगले साल 30 जून को रिटायर हो जाएंगे। यानी सिर्फ 12 महीने में ही उन्हें कानून-व्यवस्था, वर्क कल्चर से लेकर भ्रष्टाचार तक पर एक साथ काम करने की चुनौती है।
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कानून-व्यवस्था में सुधार सबसे बड़ी चुनौती
100 दिन पूरे कर चुकी योगी आदित्यनाथ सरकार कानून-व्यवस्था पर लगातार घिर रही है। सहारनपुर कांड हो या रायबरेली कांड अथवा राजधानी में आईएएस अधिकारी अनुराग तिवारी की रहस्यमय हालात में मौत, पुलिस की भूमिका पर अंगुली उठ रही है। नए मुख्य सचिव के सामने न सिर्फ पुलिस का इकबाल वापस दिलाने, बल्कि लोगों में पुलिस का भरोसा बहाल कराने की चुनौती है।
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गन्ना मिलों की ब्याजमाफी पर लेना है फैसला
अखिलेश सरकार ने समय पर गन्ना मूल्य भुगतान न मिलने पर चीनी मिलों द्वारा किसानों को दिए जाने वाले ब्याज को माफ कर दिया था। इससे चीनी मिलों को 2016 करोड़ रुपये का फायदा हुआ था। हाईकोर्ट ने एक याचिका पर 9 मार्च को यह फैसला रद्द कर सरकार को चार महीने में पुनर्विचार का आदेश दिया था। यह अवधि जुलाई में ही पूरी हो रही है। फैसले की प्रति पाने की तिथि से देखें तो 27 जुलाई तक फैसला करना है। बतौर मुख्य सचिव राजीव की यह बड़ी परीक्षा होगी।
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गन्ना समितियों के कमीशन में कटौती पर तत्काल विचार की जरूरत

चीनी मिलों को राहत पहुंचाने के लिए पिछली सरकार ने सहकारी गन्ना समितियों का कमीशन घटा दिया था। इससे समितियां आर्थिक रूप से कंगाली के दहलीज पर पहुंच गई हैं। वे पूर्व की तरह कमीशन बहाल करने की मांग कर रही हैं। राजीव को इस विषय पर भी फैसला करना है।
 

 

नीतियां बनें, लेकिन उन पर अमल भी जरूरी

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मुख्य सच‌िव राजीव कुमार - फोटो : demo pic
नजराना, हकराना, शुकराना पर अभी चोट का इंतजार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भ्रष्टाचार पर कड़ा रुख दिखाया है। गोमती रिवर फ्रंट, वक्फ बोर्ड से जुड़ी धांधलियों सहित कई मामलों की सीबीआई जांच का फैसला किया है। पर, पीएम नरेंद्र मोदी ने विधानसभा चुनाव में जिस ‘नजराना’, ‘हकराना’, ‘शुकराना’ और ‘जबराना’ की चर्चा कर अखिलेश सरकार को कठघरे में खड़ा किया था, योगी सरकार उस पर कोई ठोस पहल नहीं कर पाई है। राजीव को सिस्टम के पोर-पोर में बसे भ्रष्टाचार से निदान के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
 
नीतियां बनें, लेकिन उन पर अमल भी जरूरी
योगी सरकार ने सत्ता संभालने के बाद कई नीतियों को मंजूरी दी है। कई पाइपलाइन में हैं। जरूरी है कि नीतियां न सिर्फ समय से बनें, बल्कि उनमें किए गए प्रावधानों का लोगों को आसानी से लाभ भी मिल सके।

वर्क कल्चर में बदलाव का इंतजार जारी
सीएम योगी ने वर्क कल्चर में बदलाव के लिए सभी विभागों को सख्त निर्देश दिया था कि वे सिटीजन चार्टर लागू करें। पत्रावलियां किसी भी स्तर पर लंबित न हों और तीन दिनों में उसका निपटारा किया जाए। सरकार की मंशा समझने के बावजूद अफसर गलत तरीके से प्रस्ताव भेजते रहे हैं। इससे सरकार को कई प्रस्तावों को बदलना पड़ा है। राजीव को अफसरों के लिए तय समय व तय नीतियों के हिसाब से कार्य की जवाबदेही भी तय करनी होगी।
 
 

भर्तियां भी लेंगी इम्तिहान

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मुख्य सच‌िव राजीव कुमार - फोटो : demo pic
संपत्ति के ब्योरे पर अमल नहीं
सीएम ने मंत्रियों व अफसरों को पहली ही बैठक में 15 दिनों में अपनी चल व अचल संपत्ति का ब्योरा देने का निर्देश दिया था। सरकार ने कई बार समय-सीमा भी बढ़ाई, पर 3 महीने बाद भी सरकार ने यह जानकारी नहीं दी कि कितने मंत्रियों व अफसरों ने अपनी संपत्ति का ब्योरा दिया। लोगों को मुख्यमंत्री की इस पहल पर भी अमल का इंतजार है।

कर्जमाफी का क्रियान्वयन भी कम चुनौती नहीं
सरकार ने किसानों की कर्जमाफी का एलान किया है। बजट पास होते ही कर्जमाफी की रकम बैंकों को पहुंचाने की तैयारी है। मुख्य सचिव के रूप में राजीव की यह भी एक चुनौती होगी कि हर पात्र लाभार्थी तक इसका लाभ पहुंच जाए। पूर्व में किसानों को आपदा राहत के  भुगतान में बड़ी शिकायतें आती रही हैं।

भर्तियां भी लेंगी इम्तिहान
यूपी सरकार ने 90 दिनों के भीतर सभी विभागों के रिक्त पदों पर भर्ती शुरू कराने का एलान किया था। 100 दिन बीत जाने के बाद भी समूह ग व घ की भर्तियों से इंटरव्यू खत्म करने पर अमल शुरू नहीं हुआ।

यही नहीं, रिक्त पदों पर भर्ती की कार्यवाही भी नजर नहीं आई। राज्य लोक सेवा आयोग व अन्य भर्ती आयोगों में धांधलियों की जांच कराने के वादे पर भी वह पीछे नजर आ रही है। इससे बेरोजगारों व पिछली सरकार की भर्तियों में खुद को अन्याय का शिकार मान रहे अभ्यर्थियों में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।
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