यूपी उपचुनाव : भाजपा और सपा ने ताकत झोंकी, जारी है जोड़-तोड़ का खेल, इन सीटों पर कांटे की टक्कर
UP by-elections: यूपी में नौ सीटों पर 20 नवंबर को वोट पड़ने हैं। चुनाव के एक दिन पहले तक सपा और भाजपा अंतिम समय तक वोटरों को लुभाने की जोर-आजमाइश करते रहे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
प्रदेश की 9 विधानसभा सीटों पर हो रहे उपचुनाव के लिए बुधवार यानी आज मतदान होगा। चुनाव मैदान में उतरे सभी दल मंगलवार को पूरे दिन और रात तक जोड़-तोड़ में जुटे रहे। खासतौर से भाजपा और सपा जैसे प्रमुख प्रतिद्वंदी दलों के नेता व रणनीतिकारों के अलावा बूथ स्तर के कार्यकर्ता घर-घर पहुंचकर मतदाताओं को रिझाते दिखे।
सभी नौ सीटों पर एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच ही कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। फिर भी अन्य प्रत्याशी अपने-अपने हिसाब से समीकरण साधने में जुटे रहे। हर प्रत्याशी और दल ने अधिक से अधिक मतदाताओं को बूथ तक पहुंचाने की रणनीति तैयार की है। उपचुनाव के लिए सोमवार को ही प्रचार समाप्त हो गया, लेकिन सभी दल मंगलवार रात तक घर-घर पहुंचकर मतदान की अपील करते रहे।
प्रदेश में कटेहरी, करहल, मीरापुर, गाजियाबाद, मझवां, सीसामऊ, खैर, फूलपुर और कुंदरकी सीटों पर आज मतदान होगा और 23 नवंबर को मतगणना होगी। इनमें आठ सीटें विधायकों के सांसद चुने जाने के कारण खाली हुई हैं। वहीं, सीसामऊ सीट पर विधायक चुने गए इरफान सोलंकी को आपराधिक मामले में दोषी ठहराने के कारण उपचुनाव हो रहा है।
कई सीटों पर कांटे की टक्कर
उपचुनाव में वैसे तो सभी सीटों पर भाजपा और सपा के बीच सीधा मुकाबला होने के आसार हैं, लेकिन कुछ सीटों पर बसपा के उम्मीदवार भी समीकरण बिगाड़ते नजर आ रहे हैं। सपा के कब्जे वाली सीसामऊ सीट पर भाजपा के सुरेश अवस्थी और सपा की नसीम सोलंकी (इरफान सोलंकी की पत्नी) के बीच सीधा मुकाबला है, जबकि बसपा के वीरेंद्र कुमार भी दलित वोट के बल पर दोनों प्रत्याशियों के लिए मुसीबत खड़ी किए हुए हैं। इसी तरह खैर, गाजियाबाद, मझवां, फूलपुर, कटेहरी, कुंदरकी और करहल में भाजपा व सपा के बीच लड़ाई है। मीरापुर में रालोद और सपा के बीच मुकाबला है।
नेताओं ने खूब किया है प्रचार
भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत दोनों उपमुख्यमंत्री और सभी मंत्री के अलावा सांसद, विधायक व पदाधिकारियों को लगाया गया था। वहीं, सपा की ओर से पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत तमाम नेताओं को प्रचार मैदान में उतारा गया था।