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UP Budget session: सभापति के चुनाव के मुद्दे पर विधान परिषद से विपक्ष का वॉकआउट

Fri, 19 Feb 2021 07:47 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Fri, 19 Feb 2021 07:47 PM IST
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UP Budget session: Uproar over farmers' issue, proceedings adjourned for 30 minutes
यूपी विधानसभा - फोटो : amar ujala
विधान परिषद में शुक्रवार को मौजूदा कार्यकारी सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह को हटाने व नए का चुनाव कराने के मुद्दे पर विपक्ष ने सदन से वॉकआउट किया। सभापति के खिलाफ सपा सदस्यों का संकल्प पत्र विचार के लिए स्वीकार नहीं किया गया। इस पद के लिए तत्काल चुनाव कराने की मांग भी नहीं मानी गई। पीठ ने कहा कि चुनाव की तिथि राज्यपाल तय करते हैं। तर्क-वितर्क और हंगामे के कारण शुरुआती एक घंटे सदन की कार्यवाही नहीं चल सकी।
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सुबह 11 बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही प्रारंभ हुई, नेता प्रतिपक्ष अहमद हसन ने सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह से पूछा कि 14 दिन पहले सपा सदस्यों ने नियम-143 के तहत दो संकल्प पत्र दिए थे। इनमें सभापति को हटाने और तत्काल चुनाव कराने की मांग की गई थी। क्या ये संकल्प पत्र स्वीकार कर लिए गए हैं। सभापति ने कहा कि दोनों संकल्प पत्र प्राप्त हो चुके हैं। शीघ्र ही इन पर फैसला किया जाएगा। इस पर सपा सदस्य उदयवीर सिंह ने अपनी बात रखी, जिसे पीठ ने कार्यवाही का हिस्सा बनाने से इंकार कर दिया। सभापति मानवेंद्र सिंह ने कहा, न तो हम इस तरह की भाषा बोल सकते हैं और न ही इस तरह जवाब दे सकते हैं। भाजपा सदस्य डॉ. महेंद्र सिंह और मोहसिन रजा ने सपा सदस्यों के व्यवहार को पीठ का अपमान बताते हुए कहा कि इस तरह से पीठ पर सवाल नहीं उठाए जा सकते।
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सत्ता पक्ष और मुख्य विपक्षी दल केसदस्यों के बीच तर्क-वितर्क बढ़ने पर पहले 15 मिनट और बाद में 12 बजे तक के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। सदन की कार्यवाही दुबारा शुरू होने पर सपा के नरेश उत्तम, उदयवीर सिंह और आनंद भदौरिया ने संबंधित दोनों संकल्प पत्रों का मुद्दा फिर उठाया। अधिष्ठाता सुरेश त्रिपाठी ने 1964 से अब तक कांग्रेस, जनता दल, भाजपा और बसपा सरकार के कार्यकाल में नियुक्त किए गए सभापति (प्रोटेम) की नजीरें सामने रखीं। साथ ही निर्णय सुनाया कि नियम-143 निर्वाचित सभापति पर लागू होता है। पद रिक्त होने की दशा में नियुक्त सभापति पर लागू नहीं होता।
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सपा सदस्यों ने इस नियम के तहत अपने संकल्प पत्र में सामायिक सभापति का जिक्र किया है, जबकि ‘सामायिक’ सभापति जैसी टर्म ही नहीं होती। इसलिए संकल्प पत्र ग्रहण करने योग्य नहीं है। दूसरे संकल्प पत्र पर कहा कि सभापति के  चुनाव के लिए राज्यपाल की ओर से तिथि निर्धारित की जाती है। इसलिए यह संकल्प पत्र भी अग्राह्य है। सपा के संजय लाठर ने कहा कि ‘सामायिक’ शब्द नियम-143 में दिए गए ‘तत्समय’ शब्द का पर्याय है। इस पर महेंद्र सिंह ने कहा कि सपा सदस्यों को संविधान पर भरोसा नहीं है। नेता प्रतिपक्ष अहमद हसन ने कहा कि हम फैसले से सहमत नहीं हैं। भाजपा सरकार बहुमत का सम्मान नहीं कर रही है। लोकतंत्र की धज्जियां उड़ा रही है। हम पीठ पर आक्षेप नहीं कर रहे, पर दुखी हैं। उसके बाद सपा के सभी सदस्यों ने बहिर्गमन किया। नेता सदन डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि विपक्ष संविधान की धज्जियां उड़ा रहा है, जो उचित नहीं है। स्थापित परंपराओं को भी नहीं मान रहा है। राज्यपाल की ओर से नियुक्त प्रोटेम स्पीकर को चुनौती नहीं दी जा सकती।

उन्नाव प्रकरण और कानून-व्यवस्था को लेकर दोनों सदनों में हंगामा

प्रदेश की कानून-व्यवस्था और उन्नाव के बबुरहा गांव की घटना को लेकर शुक्रवार को विधानमंडल के दोनों सदनों में जनकर हंगामा हुआ। इन मुद्दों पर सपा-बसपा समेत पूरा विपक्ष ने विधान सभा और विधान परिषद  से वाकआउट किया। विपक्ष ने सरकार पर उन्नाव की घटना के आरोपियों को बचाने का आरोप लगाया। वहीं संसदीय कार्य मंत्री विधानसभा में कार्य स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से बसपा विधानमंडल दल के नेता लालजी वर्मा ने उन्नाव के बबुरहा गांव में दो किशोरियों की मौत और तीसरी के गंभीर रूप से घायल होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह साधारण घटना नहीं है। बहुत ही निर्ममता से किशोरियों की हत्या की गई है। लेकिन पुलिस इसे हत्या नहीं मान रही है। इस घटना से यह प्रमाणित हो गया है कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था खत्म हो गई है और अपराधी बेखौफ है। उन्होंने कहा कि यह मामला बहुत ही संवेदनशील है और इस घटना का तत्काल पर्दाफाश होना चाहिए। इसलिए सदन की कार्यवाही रोककर इस मुद्दे पर चर्चा कराई जाए।

इस पर संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने सदन को एक किशोरी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जानकारी देेचे हुए बताया कि किशोरियों के शरीर पर न तो बाहरी तरफ किसी चोट का निशान है और न ही उनके प्राइवेट पार्ट में किसी तरह के घाव पाए गए हैं। मृतका का विसरा सुरक्षित रख लिया गया है, उसकी रिपोर्ट आनी बाकी है। इसलिए अभी इसे हत्या नहीं कहा जा सकता है। उन्होंने सदन को अवगत कराया कि सरकार ने पुलिस को जल्द ही घटना का अनावरण करने के निर्देश दिए हैं।

भाजपा शासन में अपराध बढ़ने संबंधी बसपा के आरोप का जवाब देते हुए संसदीय खन्ना ने कहा कि बसपा सरकार के समय तो ऐसी-ऐसी जघन्य घटनाएं हुई थीं, जिसकी गूंज देश के साथ विदेशों में भी सुनी गई थी। बसपा की तुलना में मौजूदा सरकार सरकार का ट्रैक रेकार्ड बहुत अच्छा है। उन्होंने राष्ट्रीय अपराध रेकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े का हवाला देते हुए कहा कि महिलाओं से संबंधित अपराध, बलात्कार, लूट, अपहरण, दहेज उत्पीड़न, सील भंग की घटनाएं काफी कम हुई हैं। संसदीय कार्य मंत्री के जवाब से असंतुष्ट बसपा के विधायक सदन से वाकआउट कर गए। इसके बाद विधानसभा की कार्यवाही सोमवार को 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

अन्न में भगवान का अंश, अन्नदाता का अपमान न कीजिए : रामगोविंद

किसान आंदोलन पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्षी दलों ने शुक्रवार को विधानसभा में हंगामा किया। चर्चा की अनुमति न मिलने पर वे नारेबाजी करते हुए वेल में आ गए और सपा, बसपा व कांग्रेस ने सदन से बहिर्गमन किया। विपक्ष के हंगामे से प्रश्नकाल नहीं हो सका। नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने सत्ता पक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि अन्न में भगवान का वास होता है। भगवान को भी अन्न का भोग लगाया जाता है। इसलिए अन्न पैदा करने वाले अन्नदाता का अपमान न कीजिए।
विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही रामगोविंद ने किसान आंदोलन का मुद्दा उठाया। उन्होंने शहीद हुए प्रदेश के किसानों को शहीद का दर्जा देने की मांग करते हुए सदन की कार्यवाही रोककर किसान आंदोलन पर चर्चा कराने की मांग की।

संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना व स्वामी प्रसाद मौर्य ने सपा की तरफ इशारा करते हुए कहा कि इन्हें कब से किसानों की चिंता होने लगी। इनकी सरकार में किसानों पर लाठियां भांजी गईं। किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के बेटों को इसकी याद होगी। चर्चा की अनुमति नहीं मिलने पर सपा, बसपा व कांग्रेस सदस्य वेल में आकर नारेबाजी करने लगे। अध्यक्ष ने उनसे सीट पर जाने का आग्रह किया। पर वे नहीं माने, इस पर 11.06 बजे अध्यक्ष ने कार्यवाही 30 मिनट के लिए स्थगित कर दी। इसे पहले 12 बजे और फिर 12.20 बजे तक बढ़ा दिया गया। 12.20 बजे जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि किसान आंदोलन ज्वलंत मुद्दा है। किसानों पर अत्याचार किया जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि निधन की सूचना लेने के बाद उनकी बात सुनेंगे। इस पर बसपा के लालजी वर्मा ने कहा, नियम शिथिल कर इस मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की।

सीएम सदन में न होते तो सत्ता पक्ष भी करता सराहना
नेता प्रतिपक्ष ने कहा, हमारा लोकतंत्र दिखावटी हो गया है। कोई आंदोलन नहीं कर सकता। सपा कार्यकर्ता किसानों के समर्थन में सड़कों पर उतरे। उन पर लाठीचार्ज किया गया, आपराधिक केस दर्ज कर जेल भेज दिया गया। दिल्ली हमारी है, लेकिन किसान दिल्ली नहीं जा सकते। चीन, पाकिस्तान से ज्यादा बैरिकेडिंग दिल्ली बॉर्डर पर की गई है, सड़कों में कील ठोक दी गई हैं। किसानों को देशद्रोही, खालिस्तानी कहा जा रहा है। उन्होंने कहा, यदि सदन में मुख्यमंत्री न बैठे होते तो उधर (सत्ता पक्ष) के कई लोग मेरे बोलने की सराहना कर रहे होते। क्योंकि दोनों तरफ के 99 फीसदी लोग किसानी से जुड़े हैं।

सदन में शहीद किसानों को दी जाए श्रद्धांजलि
रामगोविंद ने कहा कि किसान आंदोलन में 200 से ज्यादा किसान शहीद हो चुके हैं। रामपुर जिले के दो किसान नवरीत सिंह और कश्मीर सिंह शहीद हुए हैं। हमने सदन में उत्तराखंड की त्रासदी पर शोक संवेदना जताई, लेकिन भाजपा के एक भी नेता ने शहीद किसानों के प्रति शोक संवेदना नहीं व्यक्त की। उन्होंने आंदोलन के दौरान शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और अपेक्षा जताई कि प्रदेश के शहीद किसानों की स्मृति में एक मिनट का मौन रखकर सदन में श्रद्धांजलि दी जाए।
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