यूपी में गूंजा, 'हमारा नेता कैसा हो, कल्याण सिंह जैसा हो' नारा
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राजस्थान के राज्यपाल और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने कहा कि सूबे में अगली सरकार भाजपा की बनेगी। अपने जन्मदिन पर उमड़ी भीड़ से गदगद कल्याण ने कहा कि लोग सपा सरकार के कुशासन से लोग तंग आ चुके हैं और बसपा का कुशासन अभी लोग भूले नहीं हैं।’
उन्हें बधाई देने पहुंचे भाजपा सांसद साक्षी महराजन ने तो 2017 के चुनावी समर की कमान कल्याण को सौंपने की मांग कर डाली।
भीड़ से भी बार-बार यह नारा गूंजता रहा, ‘यूपी का नेता कैसा हो, कल्याण सिंह जैसा हो।’ पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि ‘संवैधानिक पद पर हूं। इसलिए कुछ नहीं बोलूंगा’ लेकिन ज्यादा कुरेदने पर बोले ‘अब हमारी कोई तमन्ना नहीं है।’
बोले, ‘वह सिर्फ इतना जानते हैं कि 2017 में यहां सपा और बसपा की सरकार बनने वाली नहीं है।’ लोगों ने सीएम को लेकर सवाल पूछा तो कल्याण बोले, ‘भाजपा का होगा।’
हर किसी के अपने-अपने तर्क
भगवा टोली के साक्षी जैसे कई नेता तो खुलकर कहने लगे हैं कि दलितों और पिछड़ों को जोड़ने का उपाय किए बिना भाजपा के लिए 2017 के चुनाव में उतरना ही निरर्थक है।
उनके जैसे कई नेता तो यहां तक दावा करते हैं कि कल्याण ही एकमात्र ऐसे नेता हैं जो अयोध्या आंदोलन से जुड़े होने और पिछड़ी जाति से आने के बावजूद दलितों और अगड़ों के भी एक बहुत बड़े तबके के बीच भी अपनी अच्छी पैठ रखते हैं।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी भी कहते हैं कि कल्याण हमेशा कार्यकर्ताओं के हित में ही फैसला लेने वाले नेता हैं।
इसलिए बाबू जी से आशा
कल्याण के आवास पर मौजूद राम प्रवेश वर्मा और सुधीर मौर्य जैसे आम कार्यकर्ताओं की बात पर गौर करें तो कल्याण के आवास पर जुटी भीड़ का संदेश और भी साफ तरीके से समझा जा सकता है।
दोनों कार्यकर्ता कहते हैं कि कल्याण के अलावा राजनाथ सिंह, कलराज मिश्र, ओम प्रकाश सिंह, विनय कटियार, लालजी टंडन, डॉ. रमापति राम त्रिपाठी व सूर्यप्रताप शाही जैसे कई अन्य कई नेता भी हैं। इसलिए सिर्फ कल्याण सिंह ही क्यों?
इसलिए कल्याण को चाहते हैं भाजपाई
इसका जवाब यही है कि प्रदेश में भाजपा को किसी ऐसे चेहरे को ही आगे लाना पड़ेगा जिसका काम-धाम बतौर सरकार के मुखिया लोगों में आशा और भरोसा पैदा करे।
इस कसौटी पर कल्याण और राजनाथ को ही सूबे के लोगों ने बतौर मुख्यमंत्री शासन-प्रशासन चलाते देखा है। राजनाथ सिंह पहले ही यूपी में वापसी की संभावना से इन्कार कर चुके हैं।
ऐसे में सिर्फ कल्याण सिंह ही बचते हैं। खासतौर से अयोध्या जैसे मुद्दे पर कल्याण सिंह ही ऐसे नेता हैं जो लोगों को कुछ करने का भरोसा देते हैं।
इसलिए पार्टी के पास उम्रदराज होने के बावजूद कल्याण बेहतर विकल्प हो सकते हैं।