UP: भाजपा का मिशन 2017 शुरू, खुद मोदी करेंगे महारैली
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पहले वाराणसी और अब हाथरस के सिकंदराराऊ। फिर मथुरा के दीनदयाल धाम में केंद्र सरकार के एक साल पूरे होने की पूर्व संध्या पर 25 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महारैली का ऐलान। मथुरा के बाद टूंडला में फिर अमित शाह की रैली का प्रस्ताव।
लगता है कि संगठन विस्तार के काम में जुटी भाजपा अब रैलियों के जरिये 2017 के लिए वोटों के इंतजाम में जुट गई है। जिससे चुनाव में उत्तर प्रदेश के समीकरणों को संतुलित करके सूबे में सत्ता हासिल करने के सफर को आसान बनाया जा सके।
रैलियों के आयोजन पर नजर डालें तो साफ पता चलता है कि पार्टी के रणनीतिकारों व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह इन रैलियों के जरिये लोगों को न सिर्फ केंद्र सरकार के कामकाज की जानकारी देना चाहते हैं बल्कि पार्टी की पिछड़ा व दलित हितैषी छवि को भी बनाए रखना चाहते हैं। इसलिए रैलियों का आयोजन सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।
आगे भी उसी चेहरे को किया जा रहा है, जिसकी जाति के लोग उस क्षेत्र में आबादी के आंकड़ों में भारी पड़ते हों। पाटी अध्यक्ष अमित शाह की शुक्रवार की रैली और इससे पहले वाराणसी में आयोजित रैलियों से यह बात साबित भी हो जाती है।
इस तरह हो रही कोशिश
वाराणसी में रैली के आयोजक अनिल राजभर थे तो सिकंदराराऊ की रैली के आयोजन का जिम्मा फीरोजाबाद लोकसभा सीट से पार्टी प्रत्याशी रहे डॉ. एसपी सिंह बघेल को सौंपा गया था।
टूंडला में 31 मई की शाह की प्रस्तावित रैली के आयोजन की जिम्मेदारी भी बघेल को सौंपी गई है। अभी दो दिन पहले भदोही में मायावती के करीबी बसपा नेता दीनानाथ भाष्कर को जिस सभा में भाजपा की सदस्यता दिलाई गई। उसके आयोजन की जिम्मेदारी भाष्कर को ही सौंपी गई थी।
अलबत्ता मोदी की मथुरा में महारैली भाजपा संगठन की तरफ से आयोजित की गई है। पर, इसमें भी भीड़ जुटाने के लिए बनाई जाने वाली टीम में अगड़ों के साथ इस क्षेत्र के पिछड़ों व दलितों का प्रतिनिधित्व करने वाले चेहरों को शामिल किया जा रहा है।
प्रयास 2017 का रण जीतने की
राजनीतिक समीक्षकों की मानी जाए तो अमित शाह जानते हैं कि यूपी के चुनावी रण को जीतने के लिए अगड़ों का साथ और पिछड़ों व दलितों का विश्वास हासिल होना जरूरी है।
इसलिए रैलियों की कमान इन्हीं वर्गों के लोगों को सौंपी जा रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इन रैलियों के अलावा आगे भी जो रैली आयोजित होंगी। उनके आयोजन की जिम्मेदारी उस क्षेत्र में पिछड़े या दलित वर्ग के चेहरे को ही सौंपी जाएगी। कुल मिलाकर कोशिश 2017 का रण जीतने की है।