दिल्ली जाने को बेकरार हुए यूपी के भाजपाई!
उत्तर प्रदेश के कई भाजपाई दिल्ली में ठौर पाने की जुगाड़ में जुटे हैं। वे अपने-अपने तरीके से दिल्ली दरबार में समायोजित होने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए नेताओं के यहां दौड़भाग शुरू हो गई है। किसी को संघ के आशीर्वाद का भरोसा है तो किसी को अपने काम की बदौलत जगह मिलने का विश्वास है।
दरअसल, यूपी कोटे के दो पदाधिकारी मुख्तार अब्बास नकवी और रामशंकर कठेरिया केंद्र में मंत्री बन चुके हैं। इनके अलावा जगत प्रकाश नड्डा, राजीव प्रताप रूडी सहित कुछ अन्य पदाधिकारी भी केंद्रीय मंत्री बन गए हैं। इनसे खाली हुई जगहों को भरा जाना तय है।
यूपी के भाजपाइयों को उम्मीद है कि ज्यादा न सही तो कम से कम दो लोगों को तो राष्ट्रीय पदाधिकारी बनाकर यूपी की भागीदारी को संतुलित रखने की कोशिश होगी। फिलहाल पार्टी का सदस्यता अभियान चल रहा है। इसीलिए ज्यादा संभावना है कि अभियान पूरा हो जाने के बाद ही राष्ट्रीय संगठन का पुनर्गठन हो।
बावजूद इसके यूपी के कुछ भाजपाई दिल्ली दरबार में समायोजित होने के लिए सक्रिय हो गए हैं। कुछ चेहरे पहले से ही केंद्रीय टीम में हैं, लेकिन पुनर्गठन की स्थिति में ज्यादा महत्वपूर्ण बनने का सपना पूरा करने के लिए सक्रिय हैं।
वाजपेयी की भी है चर्चा
सूत्र बताते हैं कि प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी भी दिल्ली दरबार में समायोजन चाहते हैं। दरअसल, कहीं न कहीं उन्हें लगता है कि पार्टी का संविधान भले ही उन्हें दूसरी बार प्रदेश अध्यक्ष बनने की इजाजत देता हो लेकिन पार्टी के समीकरणों में उनका मामला भविष्य में अटक सकता है।
इसलिए वे दुबारा प्रदेश अध्यक्ष की संभावनाओं के सहारे रहने के बजाय पहले से ही दिल्ली दरबार में समायोजन करा लेना चाहते हैं। वहीं, उनके नजदीकी माने जाने वाले प्रदेश उपाध्यक्ष शिवप्रताप शुक्ल भी दिल्ली में अपनी संभावनाएं तलाशने में जुटे हैं।
प्रदेश महामंत्री स्वतंत्रदेव सिंह प्रदेश के सदस्यता प्रमुख हैं, पर संगठनात्मक कामकाज को लेकर केंद्रीय नेतृत्व से उन पर बढ़ाई जा रही जिम्मेदारी को देखते हुए उनके भी दिल्ली जाने की अटकलें हैं। सक्रियता और पिछड़े वर्ग का चेहरा होने के नाते उन्हें महत्वपूर्ण भूमिका दी जा सकती है।
हालांकि कुछ लोगों का तर्क है कि उन्हें ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका देकर यूपी में रखा जाएगा। डॉ. दिनेश शर्मा पहले ही राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए जा चुके हैं। उन्हें गुजरात का प्रभारी और राष्ट्रीय सदस्यता प्रमुख बनाकर रणनीतिकारों ने भविष्य में उनकी भूमिका को और महत्वपूर्ण बनाने के संकेत दे दिए हैं।