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क्या यूपी का ये 'बड़ा चुनाव' भी गंवा देगी भाजपा?

Tue, 02 Jun 2015 07:36 PM IST
Updated Tue, 02 Jun 2015 07:36 PM IST
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up  bjp less interested in local election?

भाजपा पिछले एक साल से पंचायत चुनाव लड़ने का ऐलान करती चली आ रही है। पर, चुनाव की तैयारियों पर नजर डालें तो वह फिसड्डी ही दिखती है। सपा चुनाव की तैयारियों में जुट गई है। चुनाव लड़ने वालों के बायोडॉटा लिए जा रहे हैं। इसके विपरीत  भाजपा अभी सदस्यता अभियान में ही उलझी है।

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इस स्थिति ने मंडल (ब्लॉक) व जिला पदाधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि उन्हें पंचायत चुनाव लड़ना भी है या नहीं।
भाजपा की पिछले अगस्त में वृंदावन में और उसके बाद मिर्जापुर में हुई पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में पंचायत चुनाव की तैयारियों को लेकर कई कार्यक्रम तय किए गए थे।
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ऐलान हुआ था कि ग्राम पंचायतों से लेकर जिला पंचायतों तक चुनाव में भाजपा औपचारिक तौर पर हिस्सा लेगी। इसके लिए पार्टी के स्तर पर पंचायती राज प्रकोष्ठ से जुड़े कार्यकर्ताओं को स्थानीय समस्याओं पर फोकस करने को कहा गया था। पर, यह सब योजनाएं फाइलों में बंद हो गई है।
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इसके विपरीत सपा में पंचायत का चुनाव लड़ने वालों के बॉयोडाटा ही नहीं लिए जा रहे हैं। जिलाध्यक्षों व महामंत्रियों को शहरों में रहकर पढ़ाई कर रहे नवजवानों से भी संपर्क व संवाद बढ़ाकर उनके नाम मतदाता सूची में शामिल कराने का काम भी सौंप दिया गया है।

यह भी कहा गया है कि सपा के लोग इन युवाओं को प्रदेश सरकार द्वारा युवाओं के लिए किए गए कामों की जानकारी दें। उन्हें बताएं कि इंटरमीडिएट पास छात्रों को लैपटॉप देने का काम सपा ने किया तो शैक्षिक प्रमाण पत्रों को राजपत्रित अधिकारियों से प्रमाणित कराने की बाध्यता खत्म करके भी नवजवानो को राहत भी दी। अन्य कई कार्य किए।

सदस्य बनाने पर ही फोकस

up  bjp less interested in local election?

सदस्यता अभियान के सिलसिले में चल रहा पार्टी का महासंपर्क अभियान अभी लगभग दो महीने चलना है। इसके बाद सदस्यता अभियान और फिर संगठन के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी। मंडल से लेकर प्रदेश तक की इकाइयों के चुनाव का कार्यक्रम भी चार-पांच महीने का होगा।

जाहिर है कि पार्टी के लोगों को इसमें भी जुटना होगा। स्वाभाविक रूप से इस सबके चलते संगठन के लोगों को पंचायत चुनाव पर फोकस करना मुश्किल है। इस स्थिति ने पार्टी से जुड़े उन लोगों को कुछ ज्यादा ही परेशान करके रख दिया है जो इस समय भी क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायतों में सदस्य या अध्यक्ष हैं। इन्हें लगता है कि पहले की बात दूसरी थी।

2014 के चुनाव से भाजपा की स्थिति बदल गई है। अभी तक तो पंचायत चुनाव में भाजपा के पास बहुत भीड़ नहीं रहती थी। इसलिए उन्हें चिंता भी नहीं रहती थी। पर, अब स्थितियां बदल गई हैं। तमाम स्थानों पर कई लोग खुद को भाजपा से जुड़ा बताकर अपने-अपने तरीके से चुनाव की तैयारी में जुटे हैं। ऐसे में कोई दूसरा भी भाजपा से हो सकता है।

जिससे उनकी सालों की मेहनत व रुतबे पर पानी फिर सकता है। परेशान वे लोग भी हैं जिन्हें चुनाव नहीं लड़ना है। इनका मानना है कि पंचायत चुनाव के सहारे सपा विधानसभा चुनाव की तैयारियों में भी जुट गई है। उधर, बसपा ने भी विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी है।

भाजपा इसी तरह हाथ पर हाथ धरे बैठी रही तो विधानसभा चुनाव की तैयारियों में भी वह पिछड़ जाएगी। हालांकि भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक पार्टी की रफ्तार सुस्त होने से इन्कार करते हैं।

उनका तर्क है कि भले ही सपा चुनाव तैयारियों में जुट गई हो लेकिन अभी क्षेत्र पंचायतों व जिला पंचायतों के चुनाव होने में लगभग एक साल का वक्त लगेगा। तब तक तैयारी कर ली जाएगी।

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