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यूपी: कानपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेज में 21 करोड़ से ज्यादा की हेराफेरी, ऑडिट रिपोर्ट में हुआ खुलासा
Sun, 01 Jun 2025 08:47 AM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Sun, 01 Jun 2025 08:47 AM IST
सार
Ganesh Shankar Vidyarthi Medical College: कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएसवीएम) और उससे जुड़े अस्पतालों में उपकरणों की खरीद में घोटाले का मामला सामने आया है।
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गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएसवीएम) और उससे जुड़े अस्पतालों में उपकरणों की खरीद से लेकर आधारभूत सुविधाएं विकसित करने में करोड़ों की हेराफेरी हुई है। मार्च 2021 से मार्च 2024 के बीच 2176.09 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान कार्यदायी संस्थाओं को किया गया है। यह खुलासा ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के आधार पर उच्चाधिकारियों से शिकायत की गई है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक सर्जरी विभाग में आठ मॉड्यूलर ओटी का निर्माण 1627.77 लाख की लागत से कराया गया। इसमें 146.69 लाख रुपये अतिरिक्त भुगतान किया गया। पीएमएसएसवाई योजना में सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में उपकेंद्र के निर्माण में भी 150.16 लाख रुपये अतिरिक्त भुगतान किए गए हैं। अग्निसुरक्षा के उपकरण उच्च दर पर खरीदे गए। इसके एवज में तय दर से 138.45 लाख रुपये अतिरिक्त भुगतान किए गए।
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वित्तीय वर्ष 2021-22 में उपकरणों की खरीद एसजीपीजीआई की दर पर करने का निर्देश थे, लेकिन न्यूरो सर्जरी व अन्य विभागों में इनकी खरीद उच्च दर पर की गई है और 86.77 लाख रुपये अतिरिक्त भुगतान किए गए। इसी तरह 50 बेड के प्राइवेट वार्ड में सेंट्रल गैस पाइप लाइन लगाने में कार्यदायी संस्था को 26.24 लाख रुपये अतिरिक्त दिए गए। पूरे मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों से करके जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की गई है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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निर्माण कार्य में देरी से 271.85 लाख का नुकसान
रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि फार्मेसी भवन एवं छात्रावास के जीणोद्धार का कार्य समय से पूरा नहीं होने से करीब 217.85 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। छात्रावास में नए फर्नीचर की आपूर्ति नहीं की गई। छात्रावास की टाइल्स टूट गई और बारिश में छत से पानी टपकता है। कई अन्य खामियां हैं जिन्हें अब तक दूर नहीं किया जा सका है।