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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: Artificial sand will be made from the unusable stones from the mines, the lease holder will get priority in making artificial sand

यूपी : खदानों से निकले अनुपयोगी पत्थरों से बनाई जाएगी कृत्रिम बालू, कृत्रिम बालू बनाने में पट्टा धारक को मिलेगी प्राथमिकता

Tue, 21 Jun 2022 12:01 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Tue, 21 Jun 2022 12:01 AM IST
सार

कृत्रिम बालू बनाने से जहां नदी से निकलने वाली बालू का विकल्प मिलेगा, वहीं नदियों पर निर्भरता कम होने से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग ने सोमवार को कृत्रिम बालू निर्माण की नीति जारी कर दी है। 
 

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UP: Artificial sand will be made from the unusable stones from the mines, the lease holder will get priority in making artificial sand
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश में सैंड स्टोन, डोलो स्टोन, ग्रेनाइट और अन्य इमारती पत्थरों के खनन के दौरान निकले अनुपयोगी पत्थरों को पीसकर कृत्रिम बालू बनाई जाएगी। कृत्रिम बालू बनाने से जहां नदी से निकलने वाली बालू का विकल्प मिलेगा, वहीं नदियों पर निर्भरता कम होने से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग ने सोमवार को कृत्रिम बालू निर्माण की नीति जारी कर दी है। 

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जारी नीति के मुताबिक कृत्रिम बालू के उत्पादन में इमारती पत्थर की खदानों के पट्टाधारकों को प्राथमिकता दी जाएगी। कृत्रिम बालू के उत्पादन से पहले संयंत्र स्थापित करने वाली फर्म को संपूर्ण देय राशि पर 20 फीसदी की छूट दी जाएगी। दरअसल, प्रदेश में बालू-मौरंग की उपलब्धता के मुख्य स्रोत विभिन्न नदियां है। लेकिन नदियों में सभी जगह बालू-मौरंग की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है। साथ ही खनन से पर्यावरण और जलीय जीवों को भी नुकसान पहुंचता है। इसे देखते हुए नई नीति बनाई गई है। इससे जहां अनुपयोगी पत्थरों का उपयोग हो सकेगा और कृत्रिम बालू के रूप में बालू का नया विकल्प मिलेगा।
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एक साल के लिए दिया जाएगा लाइसेंस
कृत्रिम बालू उत्पादन नीति के तहत क्षेत्र में जमा रिजेक्ट पत्थर की मात्रा में मिट्टी की मात्रा घटाकर लॉट की मात्रा का निर्धारण डीएम की अध्यक्षता में गठित समिति करेगी। स्टोन डस्ट की तरह रिजेक्ट पत्थर की रॉयल्टी की दर सौ रुपये प्रति घनमीटर होगी। अनुपयोगी पत्थरों को हटाने और कृत्रिम बालू को तैयार करने का लाइसेंस एक वर्ष के लिए दिया जाएगा। डीएम विशेष परिस्थिति में उस अवधि को एक वर्ष बढ़ा सकेंगे।
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कृत्रिम बालू बनाने के लिए पट्टाधारक की ओर से सहमति पत्र और 25 हजार रुपये जमानत राशि ड्राफ्ट के जरिए डीएम ऑफिस में जमा की जाएगी। पट्टा धारक की सहमति प्राप्त होने के बाद डीएम की ओर से आशय पत्र जारी किया जाएगा। निर्धारित प्रतिभूति की राशि जमा होने पर जिलाधिकारी की ओर से स्वीकृति आदेश जारी किया जाएगा। वहीं पट्टाधारक की ओर से सहमति पत्र नहीं देने पर अनुपयोगी पत्थर की लॉट को ई-निविदा से निस्तारित किया जाएगा।

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