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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: Another tax evasion of Rs 530 crores revealed in the state, two companies from Kanpur played a big game

यूपी: प्रदेश में 530 करोड़ रुपए की एक और टैक्स चोरी का खुलासा, कानपुर की दो कंपनियों ने किया बड़ा खेल

Mon, 05 May 2025 06:35 AM IST
रोहित मिश्र अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ
अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Mon, 05 May 2025 06:35 AM IST
सार

GST evasion of Rs 530 crore: तमाम निर्देशों और हाईटेक जांच निगरानी के बाद भी जीएसटी चोरी बदस्तूर जारी है। ताजा मामला यूपी के कानपुर जिले से टैक्स चोरी का है। 

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UP: Another tax evasion of Rs 530 crores revealed in the state, two companies from Kanpur played a big game
530 करोड़ की जीएसटी चोरी। - फोटो : एएनआई

विस्तार

उत्तर प्रदेश की पान मसाला और फाइबर प्लास्टिक बनाने वाली बड़ी कंपनियों ने 530 करोड रुपए की जीएसटी चोरी कर ली। दोनों कंपनियों की इकाइयां कानपुर और कानपुर देहात में हैं। राज्य कर विभाग की विशेष जांच विंग यानी एसआईबी ने इन दोनों ही कंपनियों की जांच की थी लेकिन जांच रिपोर्ट में खेल कर दिया गया। इससे पहले मसाला कंपनी द्वारा 165 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी में भी इसी टीम के खिलाफ चार्ज शीट दाखिल करते हुए कारवाई की संस्तुति शासन से की गई है। अबतक इन दोनों कंपनियों द्वारा लगभग 700 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी का आकलन कर रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है।

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तमाम निर्देशों और हाईटेक जांच निगरानी के बाद भी जीएसटी चोरी बदस्तूर जारी है। कानपुर, लखनऊ,गाजियाबाद, आगरा और मथुरा सहित एक दर्जन बड़े जिलों में संगठित रूप से जीएसटी चोरी की सूचनाएं हैं। कानपुर की जिस मसाला फर्म के उत्पादन की जांच एसआईबी ने की थी, उस फर्म ने केवल दो साल वर्ष 22-23 और 23-24 में ही करीब 350 करोड़ की जीएसटी चोरी की।
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दूसरे मामले में फैब्रिक फाइबर बनाने वाली बड़ी कंपनी में 350 करोड़ की टैक्स चोरी पकड़ी गई। ये अपवंचना वर्ष 21-22, 22-23 और 23-24 की जांच में सामने आई। आरोप है कि जीएसटी जांच विंग ने पॉलिस्टर फाइबर बनाने वाली इस कंपनी की उत्पादन क्षमता का सही मूल्यांकन नहीं किया। कंपनी से जीएसटी लागू होने के बाद वर्ष 2017 18 से लेकर 23 24 तक के सारे दस्तावेज लिए लेकिन कर चोरी केवल एक वर्ष की ही कागजों में दिखाई जो लगभग 44 करोड रुपए है। इसी तरह इनपुट टैक्स क्रेडिट के मामलों की भी ठीक से जांच नहीं की। बोगस तरीके से लिए गए रिफंड की जांच को भी घुमा दिया गया। 
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किसी उत्पादक इकाई की उत्पादन क्षमता निकालने के लिए बिजली, मशीन, कच्चा माल सहित तमाम पहलुओं की गणना की जाती है लेकिन इन मामलों में ऐसा नहीं किया गया। वास्तविक क्षमता से बेहद कम उत्पादन की रिपोर्ट तैयार की गई और केवल दो कंपनियां करीब 700 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी में फंस गईं। इस मामले में अपर आयुक्त, संयुक्त आयुक्त और उपायुक्त स्तर के अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए शासन से संस्तुति की गई है।

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