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ऑफिस पहुंचे मंत्री जी, गेट का ताला लगवाकर चाबी रख ली अपने पास, क्या था माजरा

Tue, 11 Apr 2017 12:12 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 11 Apr 2017 12:12 PM IST
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UP agriculture minister inspected krishi bhawan.
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही - फोटो : amar ujala

सुबह करीब 9:35 बजे कृषि भवन में अधिकारियों व कर्मचारियों के दफ्तर आने का समय शुरू ही हुआ था कि कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही की गाड़ी वहां पहुंचती है। अचानक मंत्री और उनके साथ प्रमुख सचिव कृषि रजनीश गुप्ता को देख गेट पर खड़े प्रहरी भी सावधान की मुद्रा में हो जाते हैं।

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जब तक कोई कुछ समझ पाता मंत्री व प्रमुख सचिव धड़धड़ाते हुए कमरों में दाखिल होते हैं और खाली कुर्सियों पर बैठने वाले कार्मिकों के नाम और पद की जानकारी लेकर अपने निजी सचिव को नोट कराते हैं।
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10 बजते ही मंत्री ने कृषि भवन के तीनों गेट पर ताला लगवा दिया और चाबी अपने साथ चल रहे एक अधिकारी को सौंप दी। लिहाजा 10 बजे के बाद आने वालों को बाहर ही रुकना पड़ा। मंत्री के निरीक्षण में 187 अधिकारी और कर्मचारी गैरहाजिर मिले।
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इनमें से 124 कर्मी बिना सूचना के गैरहाजिर पाए गए जबकि 63 कर्मी गेट पर ताला बंद होने की वजह से बाहर रह गए थे। मंत्री ने बगैर सूचना के अनुपस्थित कर्मियों का पूरे दिन का और 63 कर्मियों का आधे दिन का वेतन काटने का निर्देश दिया है।

ताला खुलवाने की कोशिश की पर मना कर दिया

UP agriculture minister inspected krishi bhawan.

रोज की तरह सोमवार को भी कृषि भवन में तैनात अधिकारी व कर्मचारी जब 10 बजे के बाद गेट पर पहुंचे तो पता चला कि मंत्री जी भीतर निरीक्षण कर रहे हैं और गेट पर ताला लगवा दिया है।

कुछ लोगों ने ताला खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने चाबी न होने की बात कह कर पल्ला झाड़ लिया। उधर, मंत्री और प्रमुख सचिव एक-एक कमरे में जाकर उपस्थिति चेक करने लगे।

हालांकि, तीन मंजिल वाले कृषि भवन में मंत्री सिर्फ दो ही मंजिल तक जा सके। विभागीय कार्मिकों की उपस्थिति और दफ्तरों की साफ-सफाई का हाल देख मंत्री ने नाराजगी जताई। कृषि निदेशक ज्ञान सिंह अवकाश पर थे तो कई अधिकारियों की कुर्सी खाली मिली।

चार अफसर भी मिले गैरहाजिर

UP agriculture minister inspected krishi bhawan.

कृषि मंत्री शाही ने गायब कर्मियों को हाजिरी रजिस्टर में गैरहाजिर कर दिया। बाद में सभी सेक्शनों का रजिस्टर भी अपने पास मंगवा लिया।

करीब तीन घंटे तक मुआयना करने के बाद उन्होंने प्रमुख सचिव को बगैर सूचना के गैरहाजिर मिले चार अधिकारियों समेत 124 कर्मचारियों का एक दिन और गेट के बाहर रह गए 63 कर्मचारियों का आधे दिन का वेतन काटने को कहा।

जिन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है उनमें अपर निदेशक प्रशांत कुमार, संयुक्त निदेशक नियोजन एसके सिंह व रामशब्द जैसवारा और उप निदेशक रामशरण यादव शामिल हैं। इनकी चरित्र पंजिका में चेतावनी दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

एक-एक को बुलाकर जवाब-तलब

UP agriculture minister inspected krishi bhawan.

दोपहर 12:30 के बाद मंत्री के निर्देश पर जब गेट का ताला खुला तब बाहर खड़े अधिकारी व कर्मचारी अंदर आए। मंत्री ने गैरहाजिर मिले एक-एक कर्मी को बुलाकर जवाब-तलब किया और खुद में सुधार लाने का निर्देश दिया।

मंत्री ने कहा, 15 साल में बर्बाद हो चुकी कार्यसंस्कृति को ठीक करने के लिए वह कड़ा एक्शन भी ले सकते हैं। उन्होंने निदेशालय परिसर में कैंटीन की स्थिति सुधारने और साफ-सफाई दुरुस्त करने का भी निर्देश दिया है।

किसी को नहीं लगी भनक
मंत्री के औचक निरीक्षण की भनक किसी को नहीं थी। सुबह उन्होंने प्रमुख सचिव को अपने आवास पर बुलाया और अपनी गाड़ी में बिठा कर चल दिए। जब गाड़ी कृषि निदेशालय पहुंची, तब प्रमुख सचिव जान पाए कि मंत्री ने उन्हें क्यों बुलाया था। नतीजा यह हुआ कि कृषि निदेशालय में तैनात करीब 1100 अधिकारियों व कर्मचारियों में से 187 गायब मिले।

चारदीवारी कूदकर दफ्तर पहुंचे

UP agriculture minister inspected krishi bhawan.

गेट पर ताला लग जाने से कुछ कर्मचारी चारदीवारी कूदकर दफ्तर में दाखिल हो गए। हालांकि, जब तक वे अपनी कुर्सी पर पहुंचे उससे पहले ही मंत्री कइयों को गैरहाजिर घोषित कर चुके थे, जबकि कई बच भी गए।

मंत्री के सामने भिड़े दो अधिकारी
दफ्तरों का निरीक्षण करने के बाद मंत्री जब पूछताछ कर रहे थे, तभी गैरहाजिर मिले संयुक्त निदेशक रामशबद जैसवारा उनकेसामने पेश हुए। मंत्री ने देर से आने के बारे में पूछा तो उन्होंने तपाक से कहा, ‘मैं तो निरीक्षण के दौरान आपके पीछे-पीछे ही चल रहा था। वैसे भी मैं सबसे पहले दफ्तर आने वाला अधिकारी हूं’।

इस पर बगल में बैठे एक अधिकारी ने यह कहते हुए आपत्ति जताई कि ऐसा दावा करना ठीक नहीं है। बहुत से लोग हैं जो समय से आते हैं। प्रमुख सचिव ने दोनों को शांत कराया। हालांकि, जैसवारा के बारे में चर्चा थी कि गेट बंद होने से वह बाहर रह गए थे। गेट खुलने के बाद वह दफ्तर पहुंचे थे।

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