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यूपी : इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में 20 हजार करोड़ का निवेश, तीन लाख को मिला रोजगार
Thu, 14 Jan 2021 09:49 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Thu, 14 Jan 2021 09:49 PM IST
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : amar ujala
प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के क्षेत्र में तीन साल में 20 हजार करोड़ रुपये का निवेश हुआ है और तीन लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। योगी सरकार का दावा है कि इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के क्षेत्र में निवेश और रोजगार में पांच साल के लक्ष्य को तीन साल में ही अर्जित किया है।
राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश में ओप्पो, सैमसंग, डिक्सन, हीरानंदानी ग्रुप, इंफोसिस तथा टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज जैसी बड़ी कंपनियों ने इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में निवेश की शुरुआत की है। ओप्पो के साथ मिलकर तीन भारतीय तथा ताइवान की चार कंपनियां मिलकर टेगना क्लस्टर की स्थापना करने जा रही है। इसमें करीब दो हजार करोड़ रूपये का निवेश आएगा। उप्र. इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण नीति-2017 के तहत तीस निवेशकों ने 20,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश को इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण का हब बनाने के लिए योगी सरकार की नीति से चीन, ताइवान तथा कोरिया की अनेक प्रतिष्ठित कंपनियां यूपी में इकाइयां स्थापित करने के लिए आगे आई हैं। एक प्रतिष्ठित ओवरसीज कंपनी अब ग्रेटर नोएडा में 100 एकड़ जमीन में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर का निर्माण कर रही है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र को देश में एक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण हब के रूप में स्थापित किया जा रहा है।
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नई नीति, लक्ष्य बड़ा
आईटी विभाग के अधिकारियों के मुताबिक अगस्त 2020 में नई उप्र. इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण नीति लागू की गई है। इसमें अगले पांच वर्षो में 40,000 करोड़ रुपये का निवेश और चार लाख लोगों को रोजगार मुहैया कराने का लक्ष्य है। इस नीति के तहत प्रदेश में तीन इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर की स्थापना होगी। इसके तहत यमुना एक्सप्रेस-वे पर जेवर एयरपोर्ट के समीप एक इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी की स्थापना की जाएगी। बुंदेलखंड में रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर तथा लखनऊ, उन्नाव और कानपुर जोन में मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर बनेगा।
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राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश में ओप्पो, सैमसंग, डिक्सन, हीरानंदानी ग्रुप, इंफोसिस तथा टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज जैसी बड़ी कंपनियों ने इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में निवेश की शुरुआत की है। ओप्पो के साथ मिलकर तीन भारतीय तथा ताइवान की चार कंपनियां मिलकर टेगना क्लस्टर की स्थापना करने जा रही है। इसमें करीब दो हजार करोड़ रूपये का निवेश आएगा। उप्र. इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण नीति-2017 के तहत तीस निवेशकों ने 20,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
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प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश को इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण का हब बनाने के लिए योगी सरकार की नीति से चीन, ताइवान तथा कोरिया की अनेक प्रतिष्ठित कंपनियां यूपी में इकाइयां स्थापित करने के लिए आगे आई हैं। एक प्रतिष्ठित ओवरसीज कंपनी अब ग्रेटर नोएडा में 100 एकड़ जमीन में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर का निर्माण कर रही है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र को देश में एक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण हब के रूप में स्थापित किया जा रहा है।
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नई नीति, लक्ष्य बड़ा
आईटी विभाग के अधिकारियों के मुताबिक अगस्त 2020 में नई उप्र. इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण नीति लागू की गई है। इसमें अगले पांच वर्षो में 40,000 करोड़ रुपये का निवेश और चार लाख लोगों को रोजगार मुहैया कराने का लक्ष्य है। इस नीति के तहत प्रदेश में तीन इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर की स्थापना होगी। इसके तहत यमुना एक्सप्रेस-वे पर जेवर एयरपोर्ट के समीप एक इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी की स्थापना की जाएगी। बुंदेलखंड में रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर तथा लखनऊ, उन्नाव और कानपुर जोन में मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर बनेगा।