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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Union Budget 2021: Challenges increased for state government in election year.

यूपी में चुनावी वर्ष में बढ़ीं योगी सरकार की चुनौतियां, आर्थिक संसाधनों की तंगहाली और कई बड़े वादे अभी अधूरे

Tue, 02 Feb 2021 10:11 AM IST
ishwar ashish महेंद्र तिवारी, अमर उजाला, लखनऊ
महेंद्र तिवारी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 02 Feb 2021 10:11 AM IST
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Union Budget 2021: Challenges increased for state government in election year.
बजट 2021: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala

कोरोना का प्रभाव, केंद्रीय बजट से उम्मीद से कम आवंटन के संकेत और आगामी वित्त वर्ष में पंचायत से लेकर विधानसभा तक के चुनाव। प्रदेश की भाजपा सरकार के सामने वित्त वर्ष 2021-22 के पूर्ण बजट की चुनौती बढ़ गई है। इन परिस्थितियों में सरकार के बजट प्रबंधन पर निगाहें टिकी हैं। 19 फरवरी को प्रदेश सरकार नया बजट पेश कर सकती है।

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कोरोना महामारी का प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भी काफी नकारात्मक असर पड़ा है। चालू वित्तीय वर्ष व आगामी वित्त वर्ष में प्रदेश को केंद्रीय करों में मिलने वाली हिस्सेदारी में करीब 63 हजार करोड़ रुपये कमी की नौबत आ गई है। इसी तरह राज्य के स्वयं के कर राजस्व में भी चालू वित्त वर्ष के अनुमान की अपेक्षा 30 से 35 प्रतिशत तक कमी के संकेत हैं।
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इसके स्पष्ट संकेत राज्य सरकार के आगामी बजट में पुनरीक्षित अनुमान में सामने आने की उम्मीद है। ऐसे में प्रदेश के सामने चालू वित्त वर्ष के लिए प्रस्तावित योजनाओं व परियोजनाओं के लिए प्रावधान के हिसाब से आवंटन की चुनौती बढ़ गई है। आगामी वित्त वर्ष के लिए बजट में भी आर्थिक तंगहाली के स्पष्ट आसार नजर आ रहे हैं।

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चुनावी बजट के लिए संसाधनों की चुनौतियां बढ़ीं

जानकार बताते हैं कि प्रदेश में पांच-पांच एक्सप्रेस-वे, अंतर्राष्ट्रीय स्तर के दो-दो एयरपोर्ट (जेवर व अयोध्या एयरपोर्ट), कानपुर, आगरा सहित कई शहरों में मेट्रो सहित कई करोड़ के बजट प्रावधान वाले इन्फ्रास्ट्रक्चर के तमाम प्रोजेक्ट व कई राज्य विश्वविद्यालयों की स्थापना की कार्रवाई पहले से ही चल रही है। इनके लिए भी बजट प्रबंध करना होगा।

सरकार ने निवेश व रोजगार को प्रोत्साहन के लिए करीब डेढ़ दर्जन सेक्टोरल नीतियां बनाई हैं। बड़े पैमाने पर प्रोजेक्ट स्थापित हो रहे हैं। निवेशकों की वित्तीय सहूलियतों को लेकर किए वादों के लिए बजट प्रावधान करना है।

इसी तरह मेडिकल कालेजों की स्थापना, जल जीवन मिशन सहित केंद्रीय सहायता वाली योजनाओं व परियोजनाओं के लिए राज्यांश मद से बड़ा आवंटन करना पड़ता है। केंद्र की घोषित कई नई योजनाओं के साथ इस पर भार और बढ़ना ही है। ऐसे में वित्त वर्ष 2021-22 के चुनावी बजट के लिए संसाधनों की चुनौती बढ़ गई है।

कई बड़े बजट वाले वादे अभी अधूरे

प्रदेश सरकार ने 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले संकलप-पत्र में कई वादे किए थे। तमाम वादे पूरे भी किए गए हैं। मगर, इंटरमीडिएट उत्तीर्ण युवाओं को लैपटॉप, किसानों को ब्याज मुक्त फसली ऋण सहित कई बड़े बजट की जरूरत वाले वादे अभी भी अधूरे हैं।

कोरोना महामारी से तमाम चुनौतियों का सामना कर रहे किसानों व बेरोजगार युवाओं को चुनावी वर्ष में सरकार से कुछ ज्यादा ही उम्मीदें हैं। विधायक एक वर्ष से विधायक निधि व कर्मचारी डीए का इंतजार कर रहे हैं।

सरकार पर चुनाव से पहले भारी भरकम बजट वाले ये खर्चे फिर शुरू करने हैं। ऐसे में अर्थव्यवस्था की बदहाली, कर्जभार बढ़ने के अनुमान के बीच चुनाव के लिहाज से सरकार किस तरह बजट तैयार करती है, इस पर निगाहें टिकी हैं।

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