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Lucknow News: थ्रीडी मॉडल से अंग्रेजी साहित्य के इतिहास को समझना होगा आसान
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लखनऊ विवि
लखनऊ। अंग्रेजी साहित्य के विस्तृत इतिहास को समझना अब छात्रों के लिए आसान हो सकता है क्योंकि इसे पढ़ाने का तरीका ऐसे थ्रीडी मॉडल पर आधारित होगा जो इसकी सरल व्याख्या करने में सक्षम होगा। लखनऊ विवि के प्रो. आरपी सिंह और लोहिया विधि विवि की डॉ. अलका सिंह ने मिलकर एक शैक्षिक प्रदर्शन उपकरण विकसित किया किया जो अंग्रेजी साहित्य के इतिहास को पुनर्जागरण काल से लेकर उत्तर-आधुनिक दौर तक दृश्यात्मक रूप में प्रस्तुत करता है। उन्होंने इसका पेटेंट भी करा लिया है।
लखनऊ विवि के अंग्रेजी और आधुनिक यूरोपीय भाषा विभाग के प्रोफेसर रवींद्र प्रताप सिंह ने बताया कि अंग्रेजी साहित्य का इतिहास विद्यार्थियों को अक्सर जटिल और बोझिल लगता है। यह थ्रीडी उपकरण उसे सरल, रोचक और स्मरणीय बनाने में मदद करेगा। इस अनोखे स्कल्प्चरल एजुकेशनल डिस्प्ले डिवाइस में रिबन-युक्त इलेक्ट्रॉनिक शैक्षिक प्रदर्शन यंत्र शामिल है, जिसे एक एकीकृत त्रि-आयामी वास्तुशिल्पीय रूप के माध्यम से अंग्रेजी साहित्य के इतिहास को सचित्र रूप से व्यक्त करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह उपकरण विशेष रूप से अंग्रेजी साहित्यिक इतिहास के कालक्रमानुसार विकास, जिसमें प्रारंभिक, मध्यकालीन, पुनर्जागरण, स्वच्छंदतावादी, आधुनिक और उत्तर-आधुनिक काल शामिल हैं, को प्रतीकात्मक भौतिक ज्यामिति और डिजिटल प्रस्तुति के मेल से दृश्य रूप में प्रस्तुत करने के लिए बनाया गया है।
उन्होंने बताया कि इस उपकरण में एक सतत धात्विक रिबन संरचना बनाई गई है जो पूरे यंत्र में लंबाई के अनुदिश फैली हुई है। यह संरचना क्रमिक रूप से लहरदार, शिखर, गर्त, सीधी और शेवरॉन जैसी आकृतियों वाले खंड बनाती है, जो भावनात्मक, बौद्धिक, तार्किक, प्रयोगात्मक और बहुलवादी साहित्यिक चरणों का प्रतिनिधित्व करते हैं। रिबन की वक्रता, लय और आयाम में नियंत्रित बदलाव साहित्यिक चिंतन, शैली और सांस्कृतिक प्रभाव में हुए ऐतिहासिक परिवर्तनों के अनुरूप होते हैं।
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लखनऊ विवि के अंग्रेजी और आधुनिक यूरोपीय भाषा विभाग के प्रोफेसर रवींद्र प्रताप सिंह ने बताया कि अंग्रेजी साहित्य का इतिहास विद्यार्थियों को अक्सर जटिल और बोझिल लगता है। यह थ्रीडी उपकरण उसे सरल, रोचक और स्मरणीय बनाने में मदद करेगा। इस अनोखे स्कल्प्चरल एजुकेशनल डिस्प्ले डिवाइस में रिबन-युक्त इलेक्ट्रॉनिक शैक्षिक प्रदर्शन यंत्र शामिल है, जिसे एक एकीकृत त्रि-आयामी वास्तुशिल्पीय रूप के माध्यम से अंग्रेजी साहित्य के इतिहास को सचित्र रूप से व्यक्त करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह उपकरण विशेष रूप से अंग्रेजी साहित्यिक इतिहास के कालक्रमानुसार विकास, जिसमें प्रारंभिक, मध्यकालीन, पुनर्जागरण, स्वच्छंदतावादी, आधुनिक और उत्तर-आधुनिक काल शामिल हैं, को प्रतीकात्मक भौतिक ज्यामिति और डिजिटल प्रस्तुति के मेल से दृश्य रूप में प्रस्तुत करने के लिए बनाया गया है।
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उन्होंने बताया कि इस उपकरण में एक सतत धात्विक रिबन संरचना बनाई गई है जो पूरे यंत्र में लंबाई के अनुदिश फैली हुई है। यह संरचना क्रमिक रूप से लहरदार, शिखर, गर्त, सीधी और शेवरॉन जैसी आकृतियों वाले खंड बनाती है, जो भावनात्मक, बौद्धिक, तार्किक, प्रयोगात्मक और बहुलवादी साहित्यिक चरणों का प्रतिनिधित्व करते हैं। रिबन की वक्रता, लय और आयाम में नियंत्रित बदलाव साहित्यिक चिंतन, शैली और सांस्कृतिक प्रभाव में हुए ऐतिहासिक परिवर्तनों के अनुरूप होते हैं।
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