शुरू हो गया ‘उल्लास: द बाल पर्व 2014’
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धन से सब कुछ खरीदा जा सकता है, पर बुद्धि नहीं। जो शिक्षा से आती है, जिसकी ताकत के आगे धन भी नतमस्तक हो जाता है।
शिक्षा की ताकत का संदेश मासूमों ने गुरुवार को राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह के मंच से अभिनय के जरिये दिया।
मौका था ‘उल्लास : द बाल पर्व 2014’ का, जिसके तहत नाटक ‘जैसे को तैसा’ का मंचन किया गया।
पर्व सेंट्रल एकेडमी, विकास नगर में यायावर रंगमण्डल की ओर से आयोजित बाल नाट्य कार्यशाला के समापन पर हुआ। इस अवसर पर बच्चों द्वारा बनाए गए चित्रों की प्रदर्शनी भी लगाई गई।
नाटक में एक जमींदार धनबल के बूते गरीबों से बंधुआ मजदूरी करवाता है।
जब मजदूर नौकरी छोड़ते हैं तो उनके कान और नाक कटवा देता है, पर एक बुद्धिमान नौकर के आने से उसे मुंह की खानी पड़ती है और जमींदार को अपनी गलतियों का अहसास होता है।
वह सभी पीड़ितों की मदद का आश्वासन भी देता है। रंगकर्मी जितेंद्र मित्तल के लिखे नाटक का निर्देशन मोहम्मद हफीज ने किया, जिनका नाम शहर के पुराने व सीनियर लाइटमैन में शुमार है।
मंच पर लाइटिंग की कलाकारी के साथ ही उनका सधा हुआ निर्देशन नजर आया। बच्चों का अभिनय बनावटीपन से दूर दिल को तरावट देने वाला रहा। सह निर्देशन योगेंद्र जोशी का रहा।