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लखनऊ के अमन व अर्पण ने खोजे छह क्षुद्र ग्रह, बने सिटीजन साइंटिस्ट

Sun, 18 Jul 2021 02:15 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 18 Jul 2021 02:15 AM IST
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two students of lucknow searched six asteroid
लखनऊ। कृष्णानगर के अमन सिंह द्वारा खोजे गए तीन क्षुद्र ग्रहों को इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल सर्च कोलेबरेशन (आईएएससी) ने मंजूरी देते हुए छात्र को दुनिया के 100 सिटीजन साइंटिस्ट में शामिल किया है। आईएएससी ने छात्र को ई-मेल व सर्टिफिकेट भेजकर यह जानकारी दी है। वहीं उत्तर प्रदेश एमेच्योर एस्ट्रोनॉमस क्लब के सदस्य अर्पण गुप्ता ने भी तीन क्षुद्र ग्रहों की खोज की है, जिसे आईएएससी ने मंजूरी देते हुए उन्हें सिटीजन साइंटिस्ट का दर्जा दिया है। उपहार में मिली दूरबीन ने दी सोच को एक नई दिशा
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अमन लखनऊ पब्लिक कॉलेजिएट के छात्र हैं। पिता सेना से रिटायर्ड हैं। अमन बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें चांद-तारे व आकाशगंगा के बारे में पढ़ना अच्छा लगता था। उनकी रुचि को हुए मम्मी-पापा ने उन्हें दूरबीन उपहार में दी थी। इसी दूरबीन ने उन्हें नई दिशा दी। धीर-धीरे उनका शौक बढ़ता गया। इस बीच आईएएससी अभियान के बारे में पता चला तो क्षुद्रग्रहों की खोज शुरू की। शोध नवंबर 2020 में पूरा हो गया था, जिसे अब मंजूरी मिली है।
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छह क्षुद्रग्रह खोजे, तीन को मंजूरी मिली
मित्रों और परिवार के समर्थन से उन्होंने छह प्रारंभिग क्षुद्रग्रहों की खोज की और विस्तृत रिपोर्ट आईएएससी को सौंपी दी। करीब आठ महीने से अधिक समय के बाद छह में से तीन क्षुद्रग्रहों को आईएएससी की अंतिम सूची में 2020टीयू24, 2020यूएफ48, 2020यूएस29 के नाम से शामिल किया गया है।
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अंतरिक्ष में कॅरियर की बनाने में अभियान से जुड़े अर्पण
सेंट जोसेफ स्कूल से 12वीं पास करने के बाद गाजियाबाद से बीटेक कर रहे बालागंज निवासी अर्पण गुप्ता द्वारा खोजे गए तीन प्रारंभिक क्षुद्रग्रहों पी11जीजीवआर, पी11जीजीडीबी, पी11जीवीवाईवाई को भी मंजूरी मिली है। अर्पण बताते हैं कि अंतरिक्ष की चीजों के बारे में जानने की जिज्ञासा लेकर मैं उत्तर प्रदेश एमेच्योर एस्ट्रोनॉमस क्लब का सदस्य बना। धीरे-धीरे खगोलीय घटनाओं में रूचि बढ़ती गई। इस बीच मेरा शोध चल रहा था। जब नासा के आईएएससी अभियान की जानकारी मिली और मैने इसके लिए आवेदन किया। मेहनत का फल मिलने से खुश हूं।

भविष्य के खतरों को समझने में अहम होती है खोज
क्षुद्रग्रह छोटी-छोटी चट्टानों के टुकड़े होते हैं। मंगल और बुध के बीच एक एस्ट्रॉयड बेल्ट है। इसमें बहुत सारे क्षुद्र गह होते हैं। कुछ इसमें से ऐसे भी हो सकते हैं जो धरती की तरफ आकर उसे नुकसान पहुंचा सकते हैं। माना जाता है कि आज से कई साल पहले जब डायनासोर का विनाश हुआ था, तब इसमें किसी एक बड़े क्षुद्रग्रह की ही भूमिका थी। इनकी खोज की जरूरत इसलिए होती है, ताकि क्षुद्र ग्रहों का पाथ पता चल सके और भविष्य में होने वाले किसी भी तरह के नुकसान को रोका जा सके। आईएएससी द्वारा इस तरह के अभियान चलाए जाते हैं ताकि छात्रों के अंदर विज्ञान के प्रति जागरूकता पैदा की जा सके। इन शोधकर्ताओं को सिटीजन साइंटिस्ट के नाम से भी जान जाता है। इन छात्रों द्वारा खोजे गए प्रारंभिक क्षुद्रग्रहों पर एक साल तक नजर रखी जाती है और उसके बाद इसे स्थायी रूप से स्वीकार कर लिया जाता है।
सुमित श्रीवास्तव, साइंटिफिक ऑफिस, इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला, लखनऊ
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