अफसरों की रिश्वतखोरी का वीडियो वायरल होने पर कड़ा फैसला, तहसीलदार व दो बाबू सस्पेंड
उत्तर प्रदेश सरकार ने घूसखोरी के मामले में सख्त रुख दिखाया है। सीतापुर में हैसियत प्रमाणपत्र बनाने के नाम पर रिश्वत लेने के मामले में सिधौली के तहसीलदार और दो माल बाबू को सस्पेंड करने का आदेश दिया है। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने यहां बताया कि सीतापुर जिले में सिधौली तहसीलदार के आवास में माल बाबू द्वारा घूस लेने का आरोप है। इससे जुड़े वीडियो का सरकार ने संज्ञान लिया है। इस मामले में तहसीलदार व दो मालबाबू को सस्पेंड करने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा एसडीएम को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है।
दरअसल, तीन मार्च तक शराब की दुकानों का ठेका लेने के लिए आवेदन किए जाने थे। नई आबकारी नीति में शासन की ओर से हैसियत प्रमाण पत्र अनिवार्य कर दिया गया। इस अनिवार्यता को अफसरों व कर्मियों ने अवैध कमाई का जरिया बना लिया।
सूत्र बताते हैं, कि एक हैसियत प्रमाण पत्र के लिए दो हजार से लेकर पांच हजार रुपये तक वसूले गए। वायरल हुए इस वीडियो में हैसियत प्रमाण पत्र बनवाने को लेकर ही तहसील का मालबाबू बेधड़क होकर खुलेआम तहसीलदार के सरकारी आवास प्रांगण में रिश्वत ले रहा है। इस वीडियो ने भ्रष्ट तहसील प्रशासन की कलई खोलकर रख दी है। अफसर खुद की गर्दन बचाने में जुटे थे। मगर मामला हाई प्रोफाइल होने से प्रभारी डीएम देव कृष्ण तिवारी ने तहसील सिधौली के रिश्वतखोर मालबाबू संजय को तत्काल निलंबित कर दिया है।
जबकि तहसीलदार सुभाष मणि त्रिपाठी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई के लिए राजस्व परिषद को संस्तुति कर दी। इसके अलावा एसडीएम सिधौली पर कार्रवाई के लिए लखनऊ मंडल आयुक्त को संस्तुति दी गई है। देर रात लखनऊ में सरकार के प्रवक्ता ने जानकारी दी कि इस मामले में दो बाबुओं और तहसीलदार को निलंबित कर दिया गया है। जबकि एसडीएम को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है।
फाइलें गिन ले कितनी हैं
...फाइलें गिन लें कितनी हैं। एक, दो...... नौ फाइलें हैं। मतलब 1850 रुपये। नहीं 1850 क्यों, 1650 रुपये। हां, ठीक है। बातचीत के ये कुछ अंश एक वायरल वीडियो में नजर आ रहे हैं। इस वीडियो में तहसील के मालबाबू संजय और एक शख्स के बीच रुपयों का लेन-देन हो रहा है। यह वीडियो तहसीलदार के सरकारी आवास परिसर में बने बैठक कक्ष का है। हैसियत प्रमाण पत्र बनवाने के लिए मालबाबू खुलेआम तहसीलदार के सरकारी आवास में रिश्वत लेते नजर आ रहे हैं। एक जागरूक नागरिक ने लेन-देन का वीडियो बनाकर वायरल कर दिया। वीडियो वायरल होने के बाद तहसील प्रशासन में हड़कंप मच गया। और देर शाम सरकार ने घूसखोरी के सभी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर दी।