{"_id":"598187a54f1c1b07378b4b20","slug":"two-friends-died-in-an-accident-in-lucknow","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सामने पड़ी थी भाई की लाश और तभी आ गया दरोगा का नियुक्तिपत्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सामने पड़ी थी भाई की लाश और तभी आ गया दरोगा का नियुक्तिपत्र
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 02 Aug 2017 01:37 PM IST
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हादसे में मारे गए दोस्त
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लखनऊ में मड़ियांव के छठामील के पास सोमवार रात सड़क हादसे में जान गंवाने वाले मैनेजमेंट छात्र सौरभ सिंह और इंजीनियर आशुतोष सिंह की अर्थी मंगलवार दोपहर एक साथ उठी तो गांववालों की आंखें नम हो गईं। दोनों का एक साथ ही बीकेटी के कठवारा गांव में अंतिम संस्कार किया गया।
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उधर, हादसा करके मौके से भागे रोडवेज बस चालक का पुलिस पता नहीं लगा सकी है। परिवारीजनों ने उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी है।
मंगलवार दोपहर सौरभ और आशुतोष के शव कठवारा गांव पहुंचे तो आसपास के गांव के लोग इकट्ठा हो गए। सौरभ का घर कठवारा गांव में ही है जबकि आशुतोष खदरा में किराये के मकान में रहता था। दोनों सोमवार रात बाइक से कठवारा जा रहे थे तभी छठामील के पास बेकाबू रोडवेज बस ने उनकी बाइक में पीछे से टक्कर मार दी।
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दोनों की मौके पर ही मौत हो गई थी जबकि बस चालक वाहन छोड़कर मौके से भाग निकला था। इंस्पेक्टर राघवन कुमार सिंह ने बताया कि बस चालक को पकड़ने के लिए रोडवेज के अधिकारियों से संपर्क किया गया है। उधर, गांव में दोनों दोस्तों की अर्थी एक साथ उठी तो माहौल गमगीन हो गया। सौरभ के पिता व कृषि विभाग से रिटायर्ड इंजीनियर ज्ञानेंद्र कुमार सिंह और मां गीता देवी बेसुध होकर गिर पड़ीं। बड़े भाई विनय और बहू का हाल भी बुरा था। आशुतोष के परिवार में मां मीनाक्षी के अलावा बड़ा भाई दुर्गेश है।
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पिता का कई साल पहले देहांत हो चुका है। आशुतोष ने बीटेक किया है और फिलवक्त सहारा होम्स कंपनी में नौकरी कर रहा था जबकि सौरभ बीबीए की पढ़ाई कर रहा था। आशुतोष और सौरभ रिश्तेदार भी थे। उसकी बहन की शादी सौरभ के बड़े भाई विनय से हुई थी।
भाई एकटक देखता रहा लाश और बोला...
डेमो पिक
विनय के भाई सौरभ का शव घर के बरामदे में पड़ा था तभी डाक से उसकी दरोगा पद पर भर्ती का नियुक्ति पत्र आ गया। नियुक्ति पत्र हाथ में लेते ही विनय फफक पड़ा।
भाई के शव की तरफ एकटक देखता रहा। बोला-सोचा था तेरे साथ जश्न मनाऊंगा। क्या पता था कि जब कागज आएगा तब तू बहुत दूर जा चुका हो। परिवारीजनों ने बताया कि विनय ने वर्ष 2011 में दरोगा भर्ती परीक्षा में आवेदन किया था लेकिन भर्ती निरस्त कर दी गई थी।
विनय ने कोर्ट में प्रार्थन पत्र दिया जिसके बाद उसकी ट्रेनिंग कराई गई थी। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद किसी भी दिन उसका नियुक्ति पत्र आना था।
दस दिन बाद था जन्मदिन
आशुतोष का दस दिन बाद यानी 11 अगस्त को जन्मदिन था। बड़े भाई दुर्गेश ने कहा था कि इस जन्मदिन पर उसे खास तोहफा देने वाला है। एक सप्ताह पहले ही उसकी नौकरी लगी थी। परिवारवाले शादी की तैयारी कर रहे थे।
परिवारीजनों का कहना है कि नौकरी लगने के बाद कुछ रिश्ते आए थे जिनसे बात चल रही थी। जन्मदिन के आसपास ही उसकी शादी की बात फाइनल करने पर विचार चल रहा था लेकिन उससे पहले ही काल के क्रूर पंजों ने आशुतोष को सबसे छीन लिया।
भाई के शव की तरफ एकटक देखता रहा। बोला-सोचा था तेरे साथ जश्न मनाऊंगा। क्या पता था कि जब कागज आएगा तब तू बहुत दूर जा चुका हो। परिवारीजनों ने बताया कि विनय ने वर्ष 2011 में दरोगा भर्ती परीक्षा में आवेदन किया था लेकिन भर्ती निरस्त कर दी गई थी।
विनय ने कोर्ट में प्रार्थन पत्र दिया जिसके बाद उसकी ट्रेनिंग कराई गई थी। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद किसी भी दिन उसका नियुक्ति पत्र आना था।
दस दिन बाद था जन्मदिन
आशुतोष का दस दिन बाद यानी 11 अगस्त को जन्मदिन था। बड़े भाई दुर्गेश ने कहा था कि इस जन्मदिन पर उसे खास तोहफा देने वाला है। एक सप्ताह पहले ही उसकी नौकरी लगी थी। परिवारवाले शादी की तैयारी कर रहे थे।
परिवारीजनों का कहना है कि नौकरी लगने के बाद कुछ रिश्ते आए थे जिनसे बात चल रही थी। जन्मदिन के आसपास ही उसकी शादी की बात फाइनल करने पर विचार चल रहा था लेकिन उससे पहले ही काल के क्रूर पंजों ने आशुतोष को सबसे छीन लिया।