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कहानी दशहरी आम के जनक की: तीन सौ साल है इस पेड़ की उम्र, 1600 वर्ग फीट में है फैला, पढ़ें इससे जुड़ा इतिहास

Mon, 04 Jul 2022 03:29 PM IST
ishwar ashish पंकज विश्वकर्मा, अमर उजाला, लखनऊ
पंकज विश्वकर्मा, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 04 Jul 2022 03:29 PM IST
सार

दशहरी आम का जनक करीब 300 साल पुराना हो गया है। यह काकोरी के दशहरी गांव में 1600 वर्गफीट में आच्छादित है। इसे ‘संरक्षित पेड़’ का दर्जा दिया गया है।

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Tree of dashahari mango becomes 300 years old.
काकोरी ब्लॉक के दशहरी गांव में मौजूद आम का पेड़ जिसे दशहरी का जनक कहा जाता है। - फोटो : amar ujala

विस्तार

आम खाने के शौकीन करोड़ों लोगों के पसंदीदा विश्वविख्यात दशहरी का जन्मदाता (मदर प्लांट) भी बेमिसाल है। काकोरी ब्लॉक में हरदोई रोड पर स्थित दशहरी गांव में 300 साल पुराना यह विशाल पेड़ आज भी मौजूद है और 1600 फीट क्षेत्रफल में आच्छादित है। इसे संरक्षित श्रेणी में रखा गया है। इस पेड़ के आम भी सबसे खास हैं। स्वाद में सबसे जुदा इस आम को जी भरकर खाया जा सकता है।

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इसके फल का आकार छोटा रहता है, क्योंकि यह मदर प्लांट है और दशहरी का शुद्ध पेड़ है। पेड़ की देखरेख कर रहे समीर जैदी ने बताया कि यह मदर प्लांट होने के कारण इसे संरक्षित किया गया है। पेड़ पूर्णत: घना व घेरदार फैला हुआ है। इसे कटीले तारों से घेरकर ‘संरक्षित पेड़’ का बोर्ड भी लगा है।

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जन्म के इतिहास की नहीं जानकारी
गांव के लोग बताते हैं कि यह पेड़ कब से गांव में है, इसकी जानकारी हमारे पिता व बाबा तक को नहीं है। हम लोग जब से पैदा हुए तब से पेड़ को इसी तरह ही देख रहे हैं। खास ये कि हर वर्ष जब फसल आती है तो इस पेड़ में चाहे चार-पांच फल ही आएं, पर आते जरूर हैं।

पूर्व प्रधान पति मनोज यादव ने बताया कि एक बार कूड़ा प्लांट के निर्माण के समय यह पेड़ उसकी चपेट में आ रहा था, लेकिन ग्रामीणों ने संघर्ष कर इसे बचा लिया। इसके बाद जन प्रतिनिधियों से कह कर इसे संरक्षित कराया गया। इस पेड़ को विरासत का दर्जा भी मिला है।

डीएम ने किया ऐतिहासिक पेड़ का पूजन

लखनऊ के जिलाधिकारी सूर्यपाल गंगवार रविवार को दशहरी गांव पहुंचे और 300 साल पुराने इस पेड़ का विधिवत पूजन कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि तीन सदी पुराना यह पेड़ दशहरी आम की किस्म का जनक है। इसी से दशहरी की उत्पत्ति मानी जाती है।


 
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उन्होंने बताया कि मलिहाबाद को आम के लिए ही जाना जाता है। यहां दो लाख 70 हजार हेक्टेयर में दशहरी आम की बाग हैं, जिसमें 60 प्रतिशत कलमी दशहरी का क्षेत्र है। उन्होंने यह भी बताया कि राजधानी में आम महोत्सव शुरू होने जा रहा है। इसमें आम संबंधी फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने वाली योजनाओं का प्रचार किया जाएगा। अलीगंज में आम किसानों के लिए एक फैसिलिटेशन सेंटर बन रहा है, जो ट्रेडिंग व एक्सपोर्ट का बिजनेस करने वालों के लिए बेहद फायदेमंद होगा।

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