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Lucknow News: गांव-गांव घूमे, पूंजी गंवाई पर नहीं मानी हार...एलईडी से चमकाया कारोबार
Wed, 29 Oct 2025 02:51 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Wed, 29 Oct 2025 02:51 AM IST
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युवा सौरभ मौर्य
लखनऊ। न कोई व्यावसायिक शिक्षा, न ही कोई बड़ा प्लेटफॉर्म और न ही कोई कर्ज लिया और 30 करोड़ की कंपनी खड़ी कर दी। यह कहानी है 27 साल के युवा सौरभ मौर्य की जिन्होंने सात साल पहले 10 बाई 10 के एक कमरे से एलईडी बल्ब के निर्माण का काम शुरू किया और फिर करोड़ों की कंपनी बना ली। महज बल्ब बनाने से शुरू हुआ सौरभ का काम आज देशभर में फैला है। सरकारी से लेकर निजी क्षेत्र तक में उनके ग्राहक हैं। एलईडी बल्ब, ट्यूब, हाईमास्ट, फ्लड व स्ट्रीट लाइट जैसे 245 उत्पाद बनाकर प्रत्यक्ष रूप से 50 और अप्रत्यक्ष रूप से 500 लोगों को रोजगार दे रहे हैं।
मूल रूप से रायबरेली के रहने वाले युवा उद्यमी सौरभ मौर्य बताते हैं कि 2018 से पहले वह अपने गृह जनपद में रहते थे। बीकॉम की पढ़ाई के बाद एक रिश्तेदार की इलेक्ट्रॉनिक की दुकान पर काम सीखते थे। खराब इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सुधारते-सुधारते कब खुद का काम शुरू करने का संकल्प ले लिया यह पता नहीं चला।
वह बताते हैं कि घर पर ही उन्होंने कच्चा माल मंगाकर एलईडी बल्ब बनाकर गांव-गांव बेचना शुरू किया। संतुष्टि के साथ रिस्पॉन्स अच्छा मिला तो 2018 में लखनऊ चले आए। उद्यम पोर्टल पर पंजीकरण कराया और आलमबाग में एक किराये के कमरे से 90 हजार की पूंजी से काम शुरू किया। वह अपने उत्पाद स्थानीय बाजारों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बेचते थे। एक वक्त ऐसा आया कि दुकानदारों ने पैसे नहीं दिए और पूरी पूंजी डूब गई।
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किसी तरह 10 हजार रुपये और जुटाए और फिर से काम में लगे। इसी बीच कोविड आया तो गांव जाना पड़ा। कोविड के बाद फिर से वापसी की तो मेहनत रंग लाई। 18-19 घंटे फैक्टरी में बैठते थे। धीरे-धीरे ऑर्डर मिलने लगे। पहले लखनऊ, फिर यूपी और फिर पूरे देशभर से ऑर्डर आने लगे। छोटे से कमरे की जगह 12000 वर्ग फीट में यूनिट शिफ्ट की। आज कंपनी आईएसओ सर्टिफाइड है। सात साल में कंपनी की वैल्युएशन 30 करोड़ से ज्यादा की हो गई।
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इंटरनेशनल ट्रेड एक्सपो से मिला बाजार
सौरभ बताते हैं कि उन्हें उनके सपनों तक पहुंचाने में ई-कॉमर्स साइटों ने सबसे ज्यादा मदद की। उद्योग विभाग की ओर से दो बार इंटरनेशनल ट्रेड शो में जाने का मौका मिला। इस दौरान नेपाल से अच्छे ऑर्डर मिले। गल्फ सिटी के लिए वह प्रयासरत हैं।
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मूल रूप से रायबरेली के रहने वाले युवा उद्यमी सौरभ मौर्य बताते हैं कि 2018 से पहले वह अपने गृह जनपद में रहते थे। बीकॉम की पढ़ाई के बाद एक रिश्तेदार की इलेक्ट्रॉनिक की दुकान पर काम सीखते थे। खराब इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सुधारते-सुधारते कब खुद का काम शुरू करने का संकल्प ले लिया यह पता नहीं चला।
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वह बताते हैं कि घर पर ही उन्होंने कच्चा माल मंगाकर एलईडी बल्ब बनाकर गांव-गांव बेचना शुरू किया। संतुष्टि के साथ रिस्पॉन्स अच्छा मिला तो 2018 में लखनऊ चले आए। उद्यम पोर्टल पर पंजीकरण कराया और आलमबाग में एक किराये के कमरे से 90 हजार की पूंजी से काम शुरू किया। वह अपने उत्पाद स्थानीय बाजारों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बेचते थे। एक वक्त ऐसा आया कि दुकानदारों ने पैसे नहीं दिए और पूरी पूंजी डूब गई।
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किसी तरह 10 हजार रुपये और जुटाए और फिर से काम में लगे। इसी बीच कोविड आया तो गांव जाना पड़ा। कोविड के बाद फिर से वापसी की तो मेहनत रंग लाई। 18-19 घंटे फैक्टरी में बैठते थे। धीरे-धीरे ऑर्डर मिलने लगे। पहले लखनऊ, फिर यूपी और फिर पूरे देशभर से ऑर्डर आने लगे। छोटे से कमरे की जगह 12000 वर्ग फीट में यूनिट शिफ्ट की। आज कंपनी आईएसओ सर्टिफाइड है। सात साल में कंपनी की वैल्युएशन 30 करोड़ से ज्यादा की हो गई।
इंटरनेशनल ट्रेड एक्सपो से मिला बाजार
सौरभ बताते हैं कि उन्हें उनके सपनों तक पहुंचाने में ई-कॉमर्स साइटों ने सबसे ज्यादा मदद की। उद्योग विभाग की ओर से दो बार इंटरनेशनल ट्रेड शो में जाने का मौका मिला। इस दौरान नेपाल से अच्छे ऑर्डर मिले। गल्फ सिटी के लिए वह प्रयासरत हैं।