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माननीयों की ट्रेन यात्राओं की होगी जांच
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Fri, 20 Sep 2013 12:52 AM IST
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संसद में जनता की आवाज उठाने वाले सांसद अपने संसदीय क्षेत्र से दिल्ली तक कितनी दौड़ लगाते हैं, इसके आधार पर ही उनका वेतन और भत्ता बढ़ाया जाएगा।
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सांसदों की ट्रेन यात्रा से उनके खर्च का आकलन किया जाएगा।
स्वयं यात्रा न करने पर किन सांसदों के लेटर हेड पर अन्य लोगों को एचओ कोटा से सबसे अधिक सीटें दी गई हैं, इन सबकी पड़ताल के लिए संयुक्त संसदीय समिति लखनऊ आ रही है।
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समिति यहां दो दिन तक सांसदों के यात्रा संबंधी ब्यौरे की जांच करेगी। गुरुवार को रेल मंत्रालय से आदेश मिलते ही मंडल प्रशासन ने सांसदों के तीन माह के सफर की रिपोर्ट तैयार करनी शुरू कर दी है।
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संयुक्त संसदीय समिति उत्तर रेलवे के लखनऊ के अलावा मुरादाबाद, अम्बाला, फिरोजपुर और दिल्ली मंडलों से भी सांसदों के बीते तीन माह की रेल यात्रा का ब्यौरा एकत्र करेगी।
उत्तर रेलवे के उप मुख्य वाणिज्य प्रबंधक को अपने जोन के सभी पांच रेल मंडलों से आने वाले सांसदों की रिपोर्ट मुख्यालय के माध्यम से रेलवे बोर्ड को भेजनी होगी।
इसके अलावा रिपोर्ट की एक प्रति 26 सितंबर को लखनऊ पहुंचने वाली संयुक्त संसदीय समिति को सौंपी जाएगी। वाणिज्य अनुभाग के कई जिम्मेदार कर्मचारी और अधिकारी देर शाम तक सांसदों की यात्रा से जुड़ी रिपोर्ट तैयार करने में जुटे रहे।
सामने आएगा खेल
सांसदों की ट्रेन यात्रा की रिपोर्ट भले ही उनके वेतन और भत्ते के निर्धारण के लिए तैयार की जा रही है लेकिन, इसमें सांसद कोटे के खेल का सच भी सामने आएगा।
रेल मंत्रालय से मिले आदेश के अनुसार मंडल प्रशासन को एक ऐसी सूची भी तैयार करनी होगी जिसमें सांसद स्वयं न जाकर किसी दूसरे को अपने कोटे से सीटें दिलवाते हैं या फिर कोटे से सीटें हासिल करने के बाद यात्रा नहीं करते।
गर्मी की छुट्टियां और भीड़भाड़ के समय सांसदों के लेटर हेड से सीटें हथियाने का खेल बड़े पैमाने पर होता है। कई सांसद तीन से चार ट्रेनों में अपने नाम से सीटें बुक कराने के बाद भी यात्रा नहीं करते।