आईएएस की तरह वाणिज्य कर अधिकारी भी सरकारी खर्च पर करा सकेंगे स्वास्थ्य जांच
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अखिल भारतीय सेवा के अफसरों की तरह वाणिज्य कर के अधिकारियों को भी सरकारी खर्च पर स्वास्थ्य जांच की सुविधा मिलेगी। वाणिज्य कर विभाग के इस प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सहमति दे दी है। इस संबंध में शासनादेश जारी होने के बाद प्रस्ताव पर अमल शुरू हो जाएगा।
सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों वाणिज्य कर विभाग की समीक्षा की थी। मुख्यमंत्री इस विभाग के मंत्री भी हैं। बैठक में वाणिज्य कर आयुक्त ने अखिल भारतीय सेवा में आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों की तरह विभाग के अफसरों को भी स्वास्थ्य जांच की सुविधा देने का प्रस्ताव किया था।
बताया गया कि मुख्यमंत्री ने इस पर सहमति दे दी थी। इसके बाद आयुक्त ने 40 वर्ष के ऊपर के अधिकारियों का वार्षिक स्वास्थ्य परीक्षण अनिवार्य रूप से कराए जाने संबंधी प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। इस तरह की सुविधा पाने वाला प्रदेश का यह पहला विभाग होगा।
पुरुष अफसरों पर 2000 व महिला पर 2200 रुपये खर्च
भारतीय प्रशासनिक सेवा के 40 वर्ष से ऊपर के अधिकारियों के लिए वार्षिक स्वास्थ्य परीक्षण अनिवार्य है। अधिकारी अपनी सुविधा के अनुसार राजकीय अथवा निजी चिकित्सालय में स्वास्थ्य परीक्षण करा सकते हैं। इसके लिए चिकित्सालयों की सूची व स्वास्थ्य परीक्षण के लिए प्रोफॉर्मा भी तय किया गया है। पुरुष अधिकारी के वार्षिक स्वास्थ्य परीक्षण पर 2000 रुपये और महिला अधिकारियों पर 2200 रुपये का मानक तय है। वाणिज्य कर विभाग के अधिकारियों को भी केंद्र सरकार की दरों पर अनिवार्य स्वास्थ्य जांच सुविधा देने का प्रस्ताव किया गया है।
एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-1 से वाणिज्य कर अधिकारी तक पाएंगे सुविधा
वाणिज्य कर विभाग में एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-1 से वाणिज्य कर अधिकारी तक के कुल 3015 पद स्वीकृत हैं। वर्तमान में 2422 ही कार्यरत हैं। इनमें से करीब 1453 अधिकारियों के 40 वर्ष से ऊपर के होने का अनुमान है। इनमें करीब 20 प्रतिशत महिला कर्मी बताई गई हैं। इन अधिकारियों के स्वास्थ्य परीक्षण पर चालू वित्त वर्ष में 29.64 लाख रुपये का खर्च संभावित है।
कार्मिकों के अस्वस्थ होने से कार्यकुशलता पर असर
वाणिज्य कर आयुक्त कामिनी चौहान रतन ने बताया कि सरकारी कार्यों के सुचारु संचालन के लिए कार्मिकों का स्वस्थ होना बहुत जरूरी है। अस्वस्थता की वजह से उनकी कार्यकुशलता पर प्रतिकूल असर पड़ता है। वाणिज्य कर अधिकारी से एडिशनल कमिश्नर तक विभाग की विभिन्न शाखाओं में कार्य करते हैं। सचल दल इकाइयाें व विशेष अनुसंधान शाखाओं के स्तर से कर निर्धारण, टैक्स ऑडिट के साथ-साथ प्रवर्तन कार्य होता है। बड़े शहरों में सरकारी बकाये की वसूली विभागीय अफसर करते हैं। ये काम किसी एक स्थान पर करने के बजाय व्यापारियों के व्यापार स्थल, सड़क मार्ग व विभिन्न स्थानों पर करने पड़ते हैं। कार्मिकों के स्वस्थ रहने के लिए स्वास्थ्य परीक्षण आवश्यक है। इसका प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है।