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रेलवे में होगी 'ट्रैक मित्रों' की तैनाती, पटरियों की सुरक्षा पर रहेगी पैनी नजर

Sun, 24 Dec 2017 12:43 PM IST
नीरज 'अम्बुज'/अमर उजाला, लखनऊ
नीरज 'अम्बुज'/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 24 Dec 2017 12:43 PM IST
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 'track mitra' will be outsourced in railway department for the safety of rail track
- फोटो : demo pic

रेलवे में पटरियों की मरम्मत करने वाले ‘ट्रैक मेंटेनरों’की भारी कमी है। उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे में भी गैंगमैनों के चार हजार पद रिक्त हैं। जिससे ट्रैक मेंटीनेंस प्रभावित हो रहा है। ऐसे में रेलवे ने इनकी कमी पूरी करने के लिए रेलवे ने ‘ट्रैक मित्रों’की तैनाती की योजना बनाई है। 

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रेलवे में पटरियों की सुरक्षा गैंगमैनों यानी ट्रैक मेंटेनरों के भरोसे होती है। लेकिन रेलवे में लगभग सभी जगह सेफ्टी कैटेगरी में रेलकर्मियों की भयंकर कमी है। रेलवे बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक वर्ष 1960 से लेकर 2016 तक 13,929 रेलवे हादसे हुए हैं। 
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दस में से हर छठी दुर्घटना रेलकर्मियों की लापरवाही से होती है। जिसके पीछे कारण रेलकर्मियों की कमी है। रेलवे में सेफ्टी कैटेगरी में सात लाख पद हैं, जिसमें दो लाख से अधिक खाली हैं। इसमें भी बड़ी संख्या में गैंगमैनों के पद रिक्त हैं।ऐसे में इनकी कमी पूरी करने के लिए आउटसोर्सिंग से ट्रैक मित्र तैनात करने का फैसला हुआ है। जो गैंगमैनों के साथ पटरियों का निरीक्षण करेंगे। इससे ट्रेनों का संचालन सुरक्षित होने की उम्मीद है।
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हालांकि, इनके नियुक्ति की प्रक्रिया कब और कैसे शुरू होगी, इस पर अभी मंथन चल रहा है। लखनऊ मंडल में लखनऊ से कानपुर, सुलतानपुर, मुरादाबाद, बाराबंकी, रायबरेली आदि रेलखंडों पर गैंगमैनों की कमी को यह ट्रैक मित्र पूरा करेंगे।  

इसलिए भी जरूरी ट्रैक मित्र

 'track mitra' will be outsourced in railway department for the safety of rail track
उत्तर रेलवे वरिष्ठ रेलवे के अधिकारी बताते हैं कि कई अपराधग्रस्त इलाकों में ट्रैक मेंटेनराें को जान हथेली पर लेकर मेंटीनेंस करना पड़ता है। इन मरम्मत के लिए जाने से गैंगमैन कतराते थे। मसलन, हरौनी-जैतीपुर का इलाका ऐसा ही था, जहां मर्डर से लेकर लूटपाट तक के अपराध बड़ी संख्या में होते थे। ऐसे में गैंगमैन के साथ ट्रैक मित्र होने से सुविधा होगी।
 

ऐसे होती है पटरियों की देखरेख

ट्रैक मेंटेनर एसोसिएशन के मुताबिक रेल हादसों के बाद गैंगमैनों की सक्रियता बढ़ गई है। सेक्शन पर एक पीडब्लूआई के अंडर में दो लाइनें (अप-डाउन) होती हैं। इसमें चार यूनिट होती हैं। एक यूनिट में 20-25 गैंगमैन होते हैं। एक यूनिट रोजाना 12 किलोमीटर ट्रैक का निरीक्षण करती है। दो ट्रॉलीमैन या कीमैन होते हैं जो तीन-तीन किमी. निरीक्षण करते हैं। इसके अतिरिक्त सेक्शन इंजीनियर हफ्ते में एक बार, एईएन महीने में चार बार, डीईएन महीने में दो बार निरीक्षण करते हैं।

 

सेफ्टी फंड बनाया गया

उत्तर रेलवे के सीनियर डीसीएम -शिवेंद्र शुक्ल ने कहा कि ट्रेनों के सुरक्षित संचालन को लेकर रेलवे लगातार प्रयासरत है। इसके लिए सेफ्टी फंड बनाया गया है। इसी क्रम में ट्रैक मित्रों की तैनाती करने की योजना तैयार की गई है। इन्हें आउटसोर्स किया जाएगा और यह गैंगमैनों के साथ पटरियों का निरीक्षण करेंगे।

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