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आसान नहीं है मोदी की फौज में जगह पाना

Sat, 24 May 2014 03:02 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 24 May 2014 03:02 AM IST
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tough task to getting place in NaMo's cabinet

दूसरे राज्यों में जो भी चल रहा हो लेकिन उत्तर प्रदेश से मोदी की मंत्रिपरिषद में शामिल होने वाले दावेदारों की राह बहुत आसान नहीं दिखती।

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मोदी की टीम की तीसरी आंख इन दावेदारों के बारे में जानकारी जुटा रही है। मोदी की मंत्रिपरिषद में वही सदस्य जगह पाएगा जो इस तीसरी आंख की जांच पड़ताल में खरा उतरेगा।
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इसके लिए सांसद के रूप में दाखिल उनके बायोडॉटा की समीक्षा की जा रही है। साथ ही जमीनी जानकारी भी जुटाई जा रही है।

विधान चुनावों के मद्देनजर हो रहा है ऐसा

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इस पड़ताल की जिम्मेदारी उसी टीम को सौंपी गई है, जिसने चुनाव के दौरान मोदी के लिए तीसरी आंख के रूप में काम किया है।

साथ ही मोदी के लिए जमीनी सूचनाएं जुटाने का काम किया है। कहा तो यह भी जा रहा है कि मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के लिए लगभग एक सप्ताह का समय ही इसलिए लिया, जिससे मंत्री बनने के दावेदारों के बारे में पूरी जानकारी जुटाई जा सके।

सूत्रों के अनुसार नरेंद्र मोदी अपनी मंत्रिपरिषद में उन चेहरों को ही रखना चाहते हैं, जो संदेश देने वाले हों। जिनके जरिये उत्तर प्रदेश में पार्टी विस्तार के अभियान को आगे बढ़ाया जा सके।

साथ ही तीन वर्ष बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में भी यूपी में भाजपा का परचम फहराया जा सके।

मंत्री के लिए तय किए मानक

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जानकारी के मुताबिक, मंत्रिपरिषद में शामिल करने के लिए जो मानक तय किए गए हैं, उनमें दावेदार का कार्यकर्ताओं के दिल व दिमाग में सम्मान और भरोसा होना पहली शर्त है।

जनता के बीच पाक साफ छवि और लोकप्रिय होना भी शर्त रखी गई है। इसी के साथ उन चेहरों से सामाजिक समीकरणों के संतुलन का उद्देश्य भी पूरा होता हो।

अतीत में जिन पर किसी तरह का दाग न हो और कार्यकर्ताओं व जनता के साथ उनका सहज संवाद हो।

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उत्तर प्रदेश प्रमुख एजेंडे में

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मोदी का उत्तर प्रदेश को प्रमुख एजेंडे में रखने के अपने कारण भी हैं। इसके लिए थोड़ा अतीत की घटनाओं पर नजर डालना जरूरी है।

पिछले एक दशक से संघ के लिए यूपी बड़ी चुनौती रहा है। प्रदेश में संघ परिवार की घटती ताकत सरसंघचालक मोहन भागवत की गहरी चिंता का विषय रहा है।

इसे सरसंघचालक और संघ के अन्य वरिष्ठ अधिकारी समय-समय पर विभिन्न स्तरों पर व्यक्त भी करते रहे हैं।

चुनाव प्रचार अभियान के दौरान खुद नरेंद्र मोदी भी कई बार यूपी की भागीदारी के बगैर कांग्रेसमुक्त भारत का सपना पूरा न हो पाने की बात कहकर इसी तरह का संदेश देते रहे हैं।

इसलिए सरकार में आने के बाद उत्तर प्रदेश को प्रमुख एजेंडे में रखना स्वाभाविक है।

नए चेहरे हो सकते हैं शामिल

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लोकसभा चुनाव में प्रदेश की 80 में अकले दम पर 71 और गठबंधन के साथ 73 सीटें जीतने के बावजूद संघ यूपी को लेकर निश्चिंत नहीं है।

संघ के रणनीतिकारों को मानना है कि मोदी के जरिये बनी लहर का लाभ अगर संगठन की स्थायी ताकत बढ़ाने में न लिया गया तो बहुत मुश्किल होगा।

इसलिए वह भी यूपी से मोदी की मंत्रिपरिषद में ऐसे चेहरों की भागीदारी पर जोर दे रहा है जो संगठन की इच्छाओं पर चलें। जिससे जनता का समर्थन न सिर्फ बना रहे बल्कि और बढ़े।

साथ ही विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के लिए एक ठोस कार्ययोजना के साथ जनता के बीच जाया जा सके। जनता उस पर भरोसा भी कर सके।

इसलिए मोदी की मंत्रिपरिषद में कुछ नए चेहरे भी महत्वपूर्ण भूमिका में शामिल हो सकते हैं तो कुछ वरिष्ठ चेहरों को दूसरी भूमिका देकर अलग रखा जा सकता है।

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