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आबादी से कुछ ही दूर है 10 दिन से भूखा बाघ!

Wed, 29 Oct 2014 12:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 29 Oct 2014 12:50 PM IST
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tiger alert in lucknow.

तीसरे दिन भी वन विभाग की टीम खाली हाथ रही। न तो उसे बाघ का किया कोई शिकार मिला और न ही पैरों के निशान। 20 अक्तूबर के पहले बाघ ने माल के गोधन गांव में शिकार किया था। इस हिसाब से करीब दस दिन हो गए और तब से बाघ ने कुछ नहीं खाया।

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उसके भूखे रहने के अंदेशे में ग्रामीण और विभाग के अधिकारियों की नीदें उड़ गई हैं। साथ ही बाघ के मूवमेंट का कोई निशान न मिलना भी लोगों में दहशत पैदा कर रहा है।
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टीम ने मंगलवार को भी करीब सात घंटे तक 18 किलोमीटर तक सामूहिक कांबिंग की लेकिन कुछ पता न चला।

विशेषज्ञों की अगुवाई में मंगलवार सुबह टीम ने कटौली, मलहा, रहमानखेड़ा के जंगलों में कांबिंग शुरू की, लेकिन टीम को नए पगमार्क नहीं ट्रेस हुये।

एक इनपुट पर कांबिंग टीम ने आम विशेषज्ञ पद्मश्री कलीमुल्लाह के बागों के पास तक कांबिंग की, लेकिन वहां भी कुछ ऐसा नहीं मिला।

उधर, मंगलवार को दुधवा में कैंप करने वाली टीम के सारे सदस्य ऑपरेशन से जुड़े। टीम ने यहां मलहा-कटौली से जुड़े सारे जंगलों में कांबिंग कर 5-6 नए स्थानों पर कैमरा ट्रैप लगाने की प्लानिंग की।
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क्षेत्र में ग्रामीणों की ज्यादा मूवमेंट केचलते टीम ने इसे रोका। टीम बुधवार से कैमरा ट्रैप लगाने की प्लानिंग कर रही है।

डीएफओ अवध एससी यादव ने बताया कि मंगलवार को न तो कहीं से नया पगमार्क टीम को ट्रेस हुआ और न ही उसे देखे जाने की कोई सूचना ही आई। बुधवार को भी कांबिंग जारी रहेगी।

सटीक लोकेशन ट्रेस करना जरूरी

tiger alert in lucknow.

ये जानते हुए भी कि बाघ अभी आबादी वाले कुछेक इलाकों से महज चंद किमी. की दूरी पर ही अपना ठिकाना बनाए हुए है, विभाग का रवैया लगभग 6 साल पहले के इतिहास को दोहराने की ओर बढ़ रहा है।

तब साल 2009 के जनवरी माह फैजाबाद में भी विभाग की इसी देरी से हिंसक बाघ शिकार की तलाश में आदमखोर में बदल गया था।

मजबूरन उसे मारने का फैसला लेना पड़ा था। तब विभाग की बड़ी फजीहत हुई थी। बाघ संरक्षण मामलों के जानकार संजय नारायन ने बताया कि बाघ को किसी भी तरह से ‘लोकलाइज’ करना बहुत जरूरी है।

पहला शिकार मारे और उसे खाये लगभग 10 दिन होने को हैं। इस दौरान उसने कोई दूसरा शिकार भी नहीं किया। बीते कुछ दिनों में उसकी मूवमेंट भी ट्रेस नहीं हुई।

अब बाघ की भूख बढ़ रही है, इससे पहले की बाघ शिकार के लिए आसपास के मवेशियों या कस्बाई इलाकों का रुख करे उसे उसके इलाके में ही शिकार मुहैया कराकर उसी इलाके में ही रोका जाए। इसके लिए टाइगर का सटीक ठिकाना पता लगाना होगा।

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