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आधार कार्ड: शादी के बाद सरनेम बदलने पर भी डाटा स्वीकार करने में दिक्कत नहीं
Mon, 19 Oct 2020 10:37 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 19 Oct 2020 10:37 AM IST
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AADHAR
आधार वेरिफिकेशन के लिए छात्रवृत्ति के सॉफ्टवेयर में तीन बड़े बदलाव किए गए हैं। ये मूल नाम से पहले कुमार, कुमारी या श्रीमती और विवाह के बाद लड़कियों के सरनेम में परिवर्तन से संबंधित हैं। प्रदेश सरकार अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों को ढाई लाख रुपये तक सालाना और अन्य वर्गों के लिए दो लाख रुपये तक सालाना आय होने पर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना का लाभ देती है। यह सुविधा पूरी तरह से ऑनलाइन है। इस साल से भुगतान के लिए आधार सीडिंग अनिवार्य कर दी गई है। यानी, विद्यार्थी के हाईस्कूल के रिकॉर्ड और आधार कार्ड में दी गई सूचना मैच करने पर ही उसके डाटा को ओके किया जाएगा।
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देखने में आया कि हाईस्कूल के अंकपत्र में छात्र या छात्रा के नाम से पहले 'कुमार' या 'कुमारी' है, लेकिन आधार कार्ड में मूल नाम से पहले इनका इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसी तरह हाईस्कूल के अंकपत्र में बालिकाओं का सरनेम कुछ और है, जबकि शादी हो जाने के कारण सरनेम बदल गया है। एनआईसी के सॉफ्टवेयर ने इस तरह के आवेदकों के डाटा को बड़े पैमाने पर खारिज करना शुरू कर दिया।
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यह समस्या शासन की जानकारी में लाई गई, तो निर्णय किया गया कि मूल नाम से पहले 'कुमार' या 'कुमारी' के आधार पर कोई भी डाटा खारिज नहीं किया जाएगा। इसी तरह छात्राओं को पोर्टल पर शादी के बाद परिवर्तित सरनेम भी देने का ऑप्शन दिया गया है। अलबत्ता, मूल नाम में वर्तनी का मामूली अंतर भी तभी स्वीकार होगा, जब उसे जिलास्तरीय अधिकारी वेरिफाई करेंगे।
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समाज कल्याण निदेशालय के अधिकारियों का कहना है कि विद्यार्थियों की सुविधाओं को देखते हुए सॉफ्टवेयर में जरूरी बदलाव कर दिए गए हैं। हर साल 60 से 70 लाख विद्यार्थी योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन करते हैं।