UP News: सपा सरकार में मंत्री रहे गायत्री प्रजापति समेत तीन को आजीवन कारावास, दो लाख का जुर्माना भी लगाया
बलात्कार मामले में पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति के अलावा अशोक तिवारी व आशीष शुक्ला को आजीवन कारावास और दो लाख का जुर्माना। तीनों को धारा 376 डी एवं 5जी/6 पास्को एक्ट में दोषी करार दिया गया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गायत्री व उसके दोनों सहयोगियों को 10 नवंबर को दोषी ठहराया गया था। सजा सुनाने के लिए तीनों को शुक्रवार को भारी सुरक्षा के बीच कोर्ट ले जाया गया। दोषियों ने कोर्ट से कम से कम सजा देने की गुजारिश की। वहीं, सरकारी वकील एसएन राय और रमेश शुक्ल ने आजीवन कारावास की मांग की। कोर्ट ने 72 पन्नों में फैसला सुनाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही स्पष्ट किया कि आजीवन कारावास का तात्पर्य है कि तीनों दोषियों को अपना बाकी का जीवन जेल में ही गुजारना होगा।
एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश पवन कुमार राय का कहना है कि तीनों आरोपियों के खिलाफ गैंगरेप व लैंगिक अपराधों से पाक्सो एक्ट में लगाए गए अपराध पूर्ण रूप से सिद्ध होते हैं। दोषियों द्वारा किया गया अपराध गंभीर प्रकृति का है, जिसका समाज पर व्यापक असर पड़ता है।
खनन के पट्टे दिलाने के नाम पर शोषण
पीड़िता ने 18 फरवरी 2017 को लखनऊ के गौतम पल्ली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके अनुसार खनन का कार्य दिलाने के लिए दोषियों ने महिला को लखनऊ बुलाया। कई जगहों पर उसके साथ दुष्कर्म किया। बाद में उसकी नाबालिग बेटी से भी अश्लील हरकतें की गईं।
कोर्ट ने नाबालिग पीड़िता की मां के आचरण पर उठाए सवाल
विशेष न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि वैसे तो सामूहिक दुष्कर्म के अपराध में दोषी पर लगाए जाने वाले अर्थदंड की धनराशि को चिकित्सीय खर्चे और पुनर्वास के लिए पीड़िता को भुगतान किए जाने का प्रावधान है, लेकिन इस मामले में पीड़िता (मां)/ वादिनी का आचरण सुनवाई के दौरान ऐसा नहीं रहा है कि उसे किसी प्रकार के जुर्माने या प्रतिकर का भुगतान किया जाए।
जहां तक द्वितीय पीड़िता और वादिनी की नाबालिग (बेटी)का प्रश्न है, उसने भी अभियोजन को सहयोग नहीं किया और वह भी पक्षद्रोही हुई है, लेकिन माना जा सकता है कि उसने उपरोक्त कृत्य अपनी मां के दबाव में किया है। इसका उल्लेख निर्णय में भी किया गया है। इस मामले में नाबालिग वास्तव में पीड़ित है, जिसको पुनर्वास की आवश्यकता है। लिहाजा अर्थदंड की सारी धनराशि 6 लाख रुपये का भुगतान उसे ही किया जाएगा। कोर्ट ने अपने आदेश के अनुपालन के लिए निर्णय की एक प्रति जिला मजिस्ट्रेट लखनऊ को भेज दी है।