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भाजपा के रणकौशल की कठिन परीक्षा लेंगी यूपी की ये 20 सीटें, आसान नहीं यहां भगवा परचम फहराना

Sun, 14 Apr 2019 12:44 PM IST
ishwar ashish अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sun, 14 Apr 2019 12:44 PM IST
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These 20 seats are biggest challenge for BJP in Uttar Pradesh.
भाजपा (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : PTI

भाजपा का इस बार यूपी में लोकसभा की 74 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा पूरा होगा या नहीं, यह तो 23 मई को पता चलेगा, पर प्रदेश की 20 सीटों पर पार्टी के रणनीतिकारों के रणकौशल की कठिन परीक्षा होने के आसार हैं। इन सीटों पर भाजपा का परचम फहराना बहुत आसान नहीं दिखाई देता।

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बीते चार दशक में इनमें से मैनपुरी में भाजपा अब तक अपना खाता नहीं खोल पाई है। शेष 19 में से छह सीटों पर भाजपा दो बार ही जीत सकी है, जबकि 13 सीटों पर सिर्फ एक बार ही उसे विजय मिल पाई। इनमें भी नौ में तो 2014 में मोदी लहर में ही पहली बार कमल खिल पाया।
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प्रदेश में 2009 तक लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत का सर्वाधिक आंकड़ा 57 सीटों का था। 2014 में पहली बार उसे सहयोगियों सहित 73 सीटों पर जीत मिली। पार्टी के रणनीतिकारों को मौजूदा चुनाव में 74 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य हासिल करने के लिए इन सीटों पर न सिर्फ कब्जा बरकरार रखना होगा बल्कि कुछ अन्य स्थानों पर भी कमल खिलाकर दिखाना होगा।
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खासतौर से मुलायम सिंह यादव का संसदीय क्षेत्र मैनपुरी भाजपा के लिए काफी मुश्किलों वाला दिखाई दे रहा है। यहां न तो मंदिर आंदोलन कमल खिला पाया और न 2014 में भाजपा के पक्ष में चली सियासी हवा ही चमत्कार दिखा पाई। जाहिर है कि मैनपुरी में यदि भाजपा को जीत हासिल होती है तो वह करिश्मा से कम नहीं होगा।

कन्नौज से आजमगढ़ तक दिखाना होगा करिश्मा

These 20 seats are biggest challenge for BJP in Uttar Pradesh.

बदायूं सीट पर अभी मुलायम के भतीजे धर्मेंद्र यादव सांसद हैं। इस बार भी सपा से वही चुनाव मैदान में हैं। यहां भाजपा सिर्फ एक बार 1998 में जीत हासिल कर पाई है। मुलायम परिवार के कब्जे वाली दूसरी सीट कन्नौज में भी भाजपा सिर्फ एक बार 1996 में अपना परचम फहरा पाई है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की सीट अमेठी में भी भाजपा एक बार 1998 में ही जीत पाई। वह भी तब, जब अमेठी राजघराने के संजय सिंह कांग्रेस छोड़ भाजपा के टिकट पर यहां से लड़े। आजमगढ़ में भी सिर्फ एक बार 2009 में भाजपा का परचम फहरा, जब पूर्वांचल के दबंग चेहरे रमाकांत यादव यहां कमल खिलाने उतरे।

रायबरेली सीट पर भाजपा वैसे तो दो बार जीत हासिल कर चुकी है, पर 2014 में मोदी लहर भी उसे यहां जीत नहीं दिला पाई। साफ है कि भाजपा को इन सीटों पर जीत के लिए कड़ी चुनौती से पार पाना होगा।

इन नौ सीटों पर कड़े मुकाबले की चुनौती

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सांकेतिक तस्वीर

पश्चिमी यूपी के मुरादाबाद और संभल तथा मध्य यूपी में कानपुर के बगल अकबरपुर में भाजपा 2014 में ही जीत पाई। पूर्वांचल के फूलपुर, अंबेडकरनगर, लालगंज, घोसी, सलेमपुर और बलिया में भी पिछले लोकसभा चुनाव में ही पहली बार कमल खिला था।

फूलपुर में भाजपा के केशव प्रसाद मौर्य ने जीत हासिल की थी। हालांकि उनके उप मुख्यमंत्री बनने के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा को पराजय का सामना करना पड़ा। ऐसे में इन नौ सीटों पर भाजपा को कड़ा मुकाबला करना पड़ सकता है।

इन सीटों पर दो बार जीती भाजपा

These 20 seats are biggest challenge for BJP in Uttar Pradesh.

शाहजहांपुर : 1998 व 2014
मिश्रिख :  1996 व 2014
रायबरेली : 1996 व 1998

प्रतापगढ़ : 1998 व 2014 में अपना दल
इटावा : 1998 व 2014
बाराबंकी : 1998 व 2014

भाजपा को एक बार मिली जीत
बदायूं : 1991
अमेठी : 1998
कन्नौज : 1998
आजमगढ़ : 2009

इन सीटों पर 2014 में पहली बार खिला कमल

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मुरादाबाद, संभल, अकबरपुर, फूलपुर, अंबेडकरनगर, लालगंज, घोसी, सलेमपुर और बलिया।

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