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ग्रीन कॉरिडोर के निर्माण में तीन चुनौतियां : सेना, रेलवे और मेट्रो
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संयुक्त सर्वे में एलडीए के अलावा सिंचाई विभाग, पीडब्ल्यूडी, सेतु निगम और नगर निगम के इंजीनियर व अ?
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गोमती नदी किनारे करीब 20 किमी. लंबे ग्रीन कॉरिडोर के निर्माण में मेट्रो लाइन के अलावा सेना और रेलवे की जमीन चुनौती बनेंगी।
ग्रीन कॉरिडोर का तीन दिन का सर्वे बुधवार को पूरा हो गया। इस संयुक्त सर्वे में एलडीए के अलावा सिंचाई विभाग, पीडब्ल्यूडी, सेतु निगम और नगर निगम के इंजीनियर व अधिकारी शामिल थे।
अधिकारियों का कहना है कि आईआईएम से शहीद पथ के बीच पहले चरण में ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण किया जाना है। दूसरे चरण में शहीद पथ से किसान पथ के बीच ग्रीन कॉरिडोर बनेगा।
पहले चरण का सर्वे पूरा कर लिया गया है। इसके आधार पर अब जमीन अधिग्रहण के लिए एलडीए, सड़क व पुल बनाने के लिए पीडब्ल्यूडी व सेतु निगम और बंधा बनाने केलिए सिंचाई विभाग अपने आकलन कर खर्च का एस्टीमेट बनाएंगे।
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यह एस्टीमेेट अपने विभाग से अनुमोदन कराकर एलडीए को दिया जाना है। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि गोमती के ऊपर से जहां मेट्रो की लाइन गुजर रही है।
वहीं, बेगम हजरत महल पार्क की तरफ फ्लाईओवर बनाने की जरूरत जमीन उपलब्ध नहीं होने की वजह से होगी। लेकिन, यहां गोमती पुल के ऊपर करीब 5.5 मीटर ऊंचाई से मेट्रोलाइन गुजर रही है।
ऐसे में ग्रीन कॉरिडोर के लिए मेट्रो लाइन के ऊपर से फ्लाईओवर का निर्माण करना होगा जो करीब 11 मीटर से ऊंचा हो जाएगा। यह काफी कठिन प्रोजेक्ट होगा।
वहीं, गोमतीनगर विस्तार पर सेना की जमीन प्रोजेक्ट के बीच आ रही है। रेलवे की जमीन दो जगह पिपराघाट और सीतापुर रेड पर प्रोजेक्ट के बीच में आएगी।
यहां रेलवे के साथ मिलकर आरओबी का निर्माण करना होगा। अभी तक सेना और रेलवे की जमीनों पर राज्य सरकार के खराब अनुभव के चलते विशेष कवायद करनी होगी।
20 अप्रैल तक सभी विभागों को देना एस्टीमेट
फेज-1 के ग्रीन कॉरिडोर के लिए 20 अप्रैल तक विभागों को एस्टीमेट तैयार कर देने हैं। डीएम और एलडीए वीसी अभिषेक प्रकाश ने खुद इसके लिए डेडलाइन तय की है। अभी तक प्रोजेक्ट अपनी तय डेडलाइन के मुताबिक ही चल रहा है।
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ग्रीन कॉरिडोर का तीन दिन का सर्वे बुधवार को पूरा हो गया। इस संयुक्त सर्वे में एलडीए के अलावा सिंचाई विभाग, पीडब्ल्यूडी, सेतु निगम और नगर निगम के इंजीनियर व अधिकारी शामिल थे।
अधिकारियों का कहना है कि आईआईएम से शहीद पथ के बीच पहले चरण में ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण किया जाना है। दूसरे चरण में शहीद पथ से किसान पथ के बीच ग्रीन कॉरिडोर बनेगा।
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पहले चरण का सर्वे पूरा कर लिया गया है। इसके आधार पर अब जमीन अधिग्रहण के लिए एलडीए, सड़क व पुल बनाने के लिए पीडब्ल्यूडी व सेतु निगम और बंधा बनाने केलिए सिंचाई विभाग अपने आकलन कर खर्च का एस्टीमेट बनाएंगे।
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यह एस्टीमेेट अपने विभाग से अनुमोदन कराकर एलडीए को दिया जाना है। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि गोमती के ऊपर से जहां मेट्रो की लाइन गुजर रही है।
वहीं, बेगम हजरत महल पार्क की तरफ फ्लाईओवर बनाने की जरूरत जमीन उपलब्ध नहीं होने की वजह से होगी। लेकिन, यहां गोमती पुल के ऊपर करीब 5.5 मीटर ऊंचाई से मेट्रोलाइन गुजर रही है।
ऐसे में ग्रीन कॉरिडोर के लिए मेट्रो लाइन के ऊपर से फ्लाईओवर का निर्माण करना होगा जो करीब 11 मीटर से ऊंचा हो जाएगा। यह काफी कठिन प्रोजेक्ट होगा।
वहीं, गोमतीनगर विस्तार पर सेना की जमीन प्रोजेक्ट के बीच आ रही है। रेलवे की जमीन दो जगह पिपराघाट और सीतापुर रेड पर प्रोजेक्ट के बीच में आएगी।
यहां रेलवे के साथ मिलकर आरओबी का निर्माण करना होगा। अभी तक सेना और रेलवे की जमीनों पर राज्य सरकार के खराब अनुभव के चलते विशेष कवायद करनी होगी।
20 अप्रैल तक सभी विभागों को देना एस्टीमेट
फेज-1 के ग्रीन कॉरिडोर के लिए 20 अप्रैल तक विभागों को एस्टीमेट तैयार कर देने हैं। डीएम और एलडीए वीसी अभिषेक प्रकाश ने खुद इसके लिए डेडलाइन तय की है। अभी तक प्रोजेक्ट अपनी तय डेडलाइन के मुताबिक ही चल रहा है।