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Lucknow News: शुक्र अस्त होने से नहीं पड़ेगा करवाचौथ के व्रत पर असर
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लखनऊ। अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु की कामना के लिए करवाचौथ का व्रत 29 अक्तूबर को रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा करेंगी। रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करेंगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, शुक्र अस्त होने के बावजूद नवविवाहिताएं अपना पहला करवाचौथ व्रत रख सकती हैं।
ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि काशी और वैदिक पंचांग के अनुसार, शुक्र 13 से 28 अक्तूबर तक अस्त रहेंगे और 31 अक्तूबर को पूर्ण बल प्राप्त करेंगे। कुछ मान्यताओं के अनुसार, शुक्र अस्त होने पर नवविवाहिताओं को पहला करवाचौथ व्रत नहीं रखना चाहिए। हालांकि, शुक्र और गुरु के उदय का महत्व विवाह व अन्य मांगलिक कार्यों में है। करवाचौथ पर भगवान गणेश, शिव-पार्वती और चंद्रमा की पूजा होती है, शुक्र की नहीं। इसलिए नवविवाहिताएं बिना किसी संशय के व्रत रख सकती हैं।
उन्होंने बताया कि इस दिन शुक्र और बुध की युति से लक्ष्मी नारायण राजयोग बन रहा है। साथ ही परिधि योग का भी संयोग है, जिसे ज्योतिषीय मान्यताओं में शुभ माना जाता है।
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शाम 5:26 से 6:43 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि 28 अक्तूबर की रात 1:06 बजे शुरू होकर 29 अक्तूबर की रात 10:09 बजे तक रहेगी। पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:26 से 6:43 बजे तक है। चंद्रोदय रात 8:06 बजे होने का अनुमान है। चंद्रमा सुबह 11:11 बजे तक रोहिणी नक्षत्र में रहेंगे, इसके बाद मृगशिरा नक्षत्र रहेगा।
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ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि काशी और वैदिक पंचांग के अनुसार, शुक्र 13 से 28 अक्तूबर तक अस्त रहेंगे और 31 अक्तूबर को पूर्ण बल प्राप्त करेंगे। कुछ मान्यताओं के अनुसार, शुक्र अस्त होने पर नवविवाहिताओं को पहला करवाचौथ व्रत नहीं रखना चाहिए। हालांकि, शुक्र और गुरु के उदय का महत्व विवाह व अन्य मांगलिक कार्यों में है। करवाचौथ पर भगवान गणेश, शिव-पार्वती और चंद्रमा की पूजा होती है, शुक्र की नहीं। इसलिए नवविवाहिताएं बिना किसी संशय के व्रत रख सकती हैं।
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उन्होंने बताया कि इस दिन शुक्र और बुध की युति से लक्ष्मी नारायण राजयोग बन रहा है। साथ ही परिधि योग का भी संयोग है, जिसे ज्योतिषीय मान्यताओं में शुभ माना जाता है।
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शाम 5:26 से 6:43 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि 28 अक्तूबर की रात 1:06 बजे शुरू होकर 29 अक्तूबर की रात 10:09 बजे तक रहेगी। पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:26 से 6:43 बजे तक है। चंद्रोदय रात 8:06 बजे होने का अनुमान है। चंद्रमा सुबह 11:11 बजे तक रोहिणी नक्षत्र में रहेंगे, इसके बाद मृगशिरा नक्षत्र रहेगा।