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कारसेवकों का बलिदान युग परिवर्तन का आधार बना : रामभद्राचार्य
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जगद्गुरु रामभद्राचार्य से आशीर्वाद लेते उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक। -संवाद
लखनऊ। सीतापुर रोड स्थित बृज की रसोई परिसर में चल रही नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के दूसरे दिन मंगलवार को जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने रामजन्मभूमि आंदोलन से जुड़े प्रसंगों का स्मरण करते हुए कहा कि उन्हें सदैव विश्वास था कि कारसेवकों का बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाएगा। उन्होंने छह दिसंबर 1992 को भारतीय इतिहास का निर्णायक मोड़ बताते हुए कहा कि उसी दिन युग परिवर्तन का संकेत मिला था।
कथा के दौरान रामभद्राचार्य ने नवधा भक्ति की विस्तार से व्याख्या की और कीर्तन तथा ईश्वर में अटूट विश्वास को भक्ति का मूल आधार बताया। उन्होंने कहा कि कीर्तन मनुष्य को माया के बंधनों से मुक्त कर ईश्वर से जोड़ता है। संस्कृत में माया को नर्तकी कहा गया है और उसके भाव को उलटने पर कीर्तन का स्वरूप प्रकट होता है, जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का माध्यम बनता है।
कर्मयोग पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का निर्वहन निष्ठा और समर्पण के साथ करना चाहिए। गीता के संदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य का अधिकार केवल कर्म पर है, फल पर नहीं। ईमानदारी और समर्पण के साथ किया गया कार्य ही सफलता और संतोष का मार्ग प्रशस्त करता है।
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उन्होंने कहा कि सच्ची सेवा भगवान की सेवा है, जहां न सेवानिवृत्ति की चिंता होती है और न ही थकान का भाव। भगवान स्वयं अपने भक्तों का योगक्षेम वहन करते हैं। उन्होंने लोगों से जीवन का अधिकतम समय लोककल्याण और ईश्वर भक्ति में लगाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी, महंत पवन दास, विधायक डॉ. नीरज बोरा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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कथा के दौरान रामभद्राचार्य ने नवधा भक्ति की विस्तार से व्याख्या की और कीर्तन तथा ईश्वर में अटूट विश्वास को भक्ति का मूल आधार बताया। उन्होंने कहा कि कीर्तन मनुष्य को माया के बंधनों से मुक्त कर ईश्वर से जोड़ता है। संस्कृत में माया को नर्तकी कहा गया है और उसके भाव को उलटने पर कीर्तन का स्वरूप प्रकट होता है, जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का माध्यम बनता है।
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कर्मयोग पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का निर्वहन निष्ठा और समर्पण के साथ करना चाहिए। गीता के संदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य का अधिकार केवल कर्म पर है, फल पर नहीं। ईमानदारी और समर्पण के साथ किया गया कार्य ही सफलता और संतोष का मार्ग प्रशस्त करता है।
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उन्होंने कहा कि सच्ची सेवा भगवान की सेवा है, जहां न सेवानिवृत्ति की चिंता होती है और न ही थकान का भाव। भगवान स्वयं अपने भक्तों का योगक्षेम वहन करते हैं। उन्होंने लोगों से जीवन का अधिकतम समय लोककल्याण और ईश्वर भक्ति में लगाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी, महंत पवन दास, विधायक डॉ. नीरज बोरा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

जगद्गुरु रामभद्राचार्य से आशीर्वाद लेते उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक। -संवाद

जगद्गुरु रामभद्राचार्य से आशीर्वाद लेते उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक। -संवाद

जगद्गुरु रामभद्राचार्य से आशीर्वाद लेते उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक। -संवाद