नए वित्त वर्ष से बजट बनाने की व्यवस्था बदलेगी योगी सरकार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश सरकार पिछले आंकड़ों की तुलना कर नया बजट तैयार करने की व्यवस्था बदलने जा रही है। बजट अनुमान यथार्थ के ज्यादा नजदीक व नतीजे देने वालों हो इसके लिए नए तरीके तलाशे जाएंगे।
इसके लिए प्रमुख सचिव वित्त की अध्यक्षता में एक वर्किंग ग्रुप बनाने का प्रस्ताव है। नई व्यवस्था वित्त वर्ष 2018-19 के आम बजट से लागू हो सकती है।
वित्त विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि, सामान्यत: विभागों में बजट का निर्धारण पिछले वर्ष के बजट के तुलनात्मक आंकड़ों के आधार पर कुछ बढ़ाकर किया जाता है।
लेकिन हर बार यह देखने में आता है कि तमाम मदों में बजट प्रावधान, अनुमान से कहीं बहुत ज्यादा व कहीं बहुत कम साबित होता है। बजट पारित होने के तत्काल बाद ही पुनर्विनियोग शुरू हो जाता है।
मूल बजट खर्च नहीं होता है और अनुपूरक की मांग कर ली जाती है और इसमें बड़ी रकम सरेंडर की जाती है। बजट व्यवस्था के लिहाज से यह उचित नहीं माना जाता। सीएजी इस पर लगातार सवाल उठाती आई है।
सरकार अब इस व्यवस्था को बदलना चाह रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बजट अनुमान यथार्थ के ज्यादा नजदीक हों तो हर साल सरेंडर होने वाली राशि दूसरी योजनाओं के लिए उपलब्ध हो सकती है।
मुख्य सचिव राजीव कुमार ने शासन के वरिष्ठ अधिकारियों से विचार-विमर्श के दौरान विभागीय बजट, पिछले वर्ष के बजट के तुलनात्मक आंकड़ों को आधार पर बनाने की बजाए, आवश्यकता और औचित्य के आधार पर बनाने को निर्देशित किया है।
इसके लिए योजनाओं से लाभान्वित होने वाली जनसंख्या, योजना के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक आंकड़ों और आधारभूत आंकड़ों (बेसिक आंकड़े) को प्राप्त कर उसका विश्लेषण करने को कहा गया है। इसके बाद आवश्यकता एवं औचित्य के आधार पर बजट का निर्धारण किया जाएगा।
वर्किंग ग्रुप में विशेषज्ञ होंगे शामिल
मुख्य सचिव राजीव कुमार ने बजट तैयार करने की नई व्यवस्था की रूपरेखा डिजाइन करने के लिए प्रमुख सचिव वित्त की अध्यक्षता में एक वर्किंग ग्रुप गठित करने का निर्देश दिया है। इस ग्रुप में वित्त व बजट के क्षेत्र में अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ, नियोजन विभाग तथा आवश्यकतानुसार अन्य विभागों के अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। बजट निर्माण की यह नई रूपरेखा सभी विभागों पर लागू होगी।
सीएजी की टिप्पणी
- सीएजी ने 31 मार्च 2016 को समाप्त हुए वर्ष के लिए प्रदेश सरकार के बजट पर तैयार अपनी रिपोर्ट में कहा था कि बजट आकलन की प्रक्रिया ज्यादा यथार्थवादी होनी चाहिए और खर्च पर नियंत्रण की प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाया जाना चाहिए।
- अत्यधिक धनराशियों का सरेंडर किया जाना यह बताता है कि बजट के लिए समुचित सावधानी नहीं रखी जा रही है।
- अनावश्यक एवं अपर्याप्त अनुपूरक प्रावधान यह बताता है कि अनुपूरक बजट में किया गया प्रावधान वास्तविक आवश्यकताओं के आंकलन पर आधारित नहीं था।