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Lucknow News: सनतकदा के दस्तरख्वान पर सजी नवाबी दौर की लज्जत

Mon, 03 Feb 2025 01:55 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 03 Feb 2025 01:55 AM IST
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The foods of Nawabi era adorned on the Dastarkhwan of Santakda
सनतकदा महोत्सव में पकवान चखने के लिए जुटे लोग।
लखनऊ। सनतकदा महोत्सव में रविवार का दिन जायके के शौकीनों के लिए बेहद खास रहा। दस्तरख्वान पर सजी नवाबी दौर की लज्जत ने लखनवियों को दीवाना बना दिया। खास बात यह थी कि तकरीबन चार सौ साल पुराने व्यंजन यहां परोसे गए। ये लजीज व्यंजन पुराने लखनऊ की महिलाएं अपने घरों से पकाकर लाई थीं।
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इनमें से कई व्यंजन ऐसे हैं, जो अब बाजार में नहीं मिलते, लेकिन पुराने लखनऊ में रिवायती तौर पर आज भी खास मौकों पर इन्हें पकाया जाता है। महोत्सव के तीसरे दिन सफेद बारादरी और सलेमपुर हाउस में गीत-संगीत की प्रस्तुतियों व चर्चा सत्रों में सुबह से देर शाम तक भीड़ बनी रही। होम कुक्ड फूड फेस्टिवल के तहत सलेमपुर हाउस में नूर खान के स्टॉल पर लाल मिर्च कीमा का स्वाद लेने के लिए इस कदर शौकीनों में बेकरारी थी कि इसके लिए लाइन लगानी पड़ी।
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निहारी, कोफ्ते, मुर्ग जाफरानी, बिरयानी, यखनी पुलाव, बोटी कबाब, सालन, गलावटी कबाब, कोरमा के अलावा यहां शाकाहारी भोजन में बुंदेलखंडी थाली, पंजाबी, अवधी और मारवाड़ी थाली की भी खूब मांग रही। मीठे में शाही टुकड़ा, चने की दाल का हलवा, काली गाजर का हलवा और शकरकंद की खीर का भी लोगों ने आनंद उठाया।
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इससे पहले तीसरे दिन की शुरुआत सफेद बारादरी में ओमकार दादरकर के गायन से हुई। इसके बाद हेरिटेज वॉक का आयोजन किया गया, जो यूपी प्रेस क्लब से शुरू होकर कैसरबाग तक रही। मेहमानों को चौक, इमामबाड़ा और हुसैनाबाद की सैर कराई गई। लज्जत-ए-खास के तहत माल कोठी मलिहाबाद में आयोजन हुआ।
फिल्मीस्तान में दिखीं लखनऊ की गलियां

सदाबहार सहर सत्र में सुबह 5:30 बजे संगीत कार्यक्रम की प्रस्तुति ओंकार दादरकर ने दी। उन्होंने आन पड़ी मझधार भंवर में... और मोरी मदद करो... गाकर शुरुआत की। गलियों का फिल्मीस्तान सत्र में अपूर्वा शाह और आयशा खातून निर्देशित दो लघु फिल्में गलियों में लखनऊ और गलियों के साथी प्रदर्शित की गई, जो दिखाती हैं कि लखनऊ की संकरी गलियों में इंसान और जानवर दोनों ही रहते हैं। जरदोजी का भी प्रदर्शन किया गया। शिल्पा मुदबी, आदित्य कोठाकोटा और निमरा रिजवी के बीच मेरे पूर्वजों के गीत विषय पर बातचीत हुई, जो शहरी दर्शकों को लोककला प्रथाओं से जोड़ते हैं। एक सत्र में पूजा सक्सेना ने इंडिक लिपियों और उनके लिए डिजाइन पर चर्चा की।

दायरा के जादू बस्तर बैंड ने किया धमाल

दायरा के जादू बस्तर बैंड ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को खूब झुमाया। इसमें हल्बी, भतरी, गोंडी में हिंदी बोलों के साथ गाने शामिल थे। गीतों में बस्तर की जनजातियों के रोजमर्रा के जीवन की चीजों की बात की गई। साउंड्स ऑफ पृथ्वी नामक सत्र में अवधी क्षेत्र की संगीतमय प्रस्तुति हुई, जो समुदाय और सांस्कृतिक जुड़ाव को बढ़ावा देती है। इससे पहले फिल्मकार सुधीर मिश्रा के साथ नायाब नगीने सत्र में अस्करी नकवी ने बातचीत की।
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