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अब युवा हाथी करेंगे जंगलों की रखवाली और रेस्क्यू ऑपरेशन में बनेंगे मददगार
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 08 Sep 2017 12:20 PM IST
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- फोटो : google
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प्रदेश का जंगल महकमा जल्द ही एक दर्जन युवा हाथियों से लैस होगा। इन हाथियों की उम्र 12 से 20 साल के आसपास है। इनमें 11 मादाओं के साथ एक युवा नर हाथी है।
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कर्नाटक के एक केंद्र से लाए जाने वाले ये हाथी जंगल की रखवाली और रेस्क्यू ऑपरेशन में मददगार बनेंगे।
इन हाथियों को यहां पीलीभीत टाइगर रिजर्व, दुधवा नेशनल पार्क और गैंडों की सक्रियता वाले क्षेत्रों में कुशल महावतों की निगरानी में तैनात किया जाएगा।
उम्मीद जताई जा रही है कि हिंसक वन्यजीव और मानव संघर्षों के चलते लगातार हो रही अप्रिय घटनाओं में इनसे रोक लगेगी।
जंगलों में कांबिंग और रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए ट्रेंड किए गए इन हाथियों की पड़ताल के लिए सितंबर के तीसरे सप्ताह में वन विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों की टीम एक हफ्ते तक कर्नाटक में कैंप करेगी।
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हाथी न होने से आईं दिक्कतें
प्रदेश में पिछले दो साल के दौरान हिंसक वन्यजीव और मानव संघर्षों के चलते हो रही अप्रिय घटनाओं के तमाम मामले सामने आए, जब अधिक हाथियों की जरूरत महसूस की गई।
उन्नाव में भटके बाघ के रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए टीम उस वक्त बेसहारा हो गई, जब उसे 50 वर्ग किमी. के दलदली पतौरे वाले इलाकों में कांबिंग करनी पड़ी, जहां न नाव चल सकती थी और न ही जीप।
वहीं, पीलीभीत में दर्जन भर से अधिक लोगों की जान ले चुके हालिया रेस्क्यू ऑपरेशन में टीम को तब भारी दिक्कतें हुईं जब 12 फुट ऊंचे गन्नों वाले कई किलोमीटर लंबे बेल्ट में टाइगर को ट्रेस करना पड़ा।
बाढ़ के चलते टीम को वाहनों, ड्रोन से भी मदद नहीं मिली। बाघ संरक्षण मामलों के जानकार संजय नारायण के मुताबिक इधर बीते दो सालों में करीब 25-30 बड़े हिंसक वन्यजीव और मानव संघर्षों के मामले सामने आए।
इनमें से करीब दर्जन भर से अधिक टाइगर-लेपर्ड तो पकड़कर लखनऊ जू लाए गए। अब अगर टीमें समय पर ट्रेंड हाथियों की मदद पा सकेंगी तो रेस्क्यू ऑपरेशन जल्द पूरा किया जा सकेगा।
उन्नाव में भटके बाघ के रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए टीम उस वक्त बेसहारा हो गई, जब उसे 50 वर्ग किमी. के दलदली पतौरे वाले इलाकों में कांबिंग करनी पड़ी, जहां न नाव चल सकती थी और न ही जीप।
वहीं, पीलीभीत में दर्जन भर से अधिक लोगों की जान ले चुके हालिया रेस्क्यू ऑपरेशन में टीम को तब भारी दिक्कतें हुईं जब 12 फुट ऊंचे गन्नों वाले कई किलोमीटर लंबे बेल्ट में टाइगर को ट्रेस करना पड़ा।
बाढ़ के चलते टीम को वाहनों, ड्रोन से भी मदद नहीं मिली। बाघ संरक्षण मामलों के जानकार संजय नारायण के मुताबिक इधर बीते दो सालों में करीब 25-30 बड़े हिंसक वन्यजीव और मानव संघर्षों के मामले सामने आए।
इनमें से करीब दर्जन भर से अधिक टाइगर-लेपर्ड तो पकड़कर लखनऊ जू लाए गए। अब अगर टीमें समय पर ट्रेंड हाथियों की मदद पा सकेंगी तो रेस्क्यू ऑपरेशन जल्द पूरा किया जा सकेगा।