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Lucknow News: बिल्डिंग गिरने के डर में बीता दिन, गृहस्थी लुटने की आशंका में कटी रात
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अपार्टमेंट में रातभर चला काम।
लखनऊ। एसए अपार्टमेंट के आवंटियों का दिन बिल्डिंग गिरने के डर में बीता। वहीं, रात गृहस्थी लुट जाने की दहशत में कटी। आवंटियों ने बुजुर्गों, बच्चों को परिजनों के पास छोड़ दिया, फिर रातभर अपार्टमेंट के बाद डटे रहे। उन्हें डर सताता रहा कि फ्लैट खुले पड़े हैं। पाई-पाई जोड़कर खड़ी की गई गृहस्थी कहीं बर्बाद न हो जाए।
गोलागंज स्थित बारूदखाना में एसए अपार्टमेंट है। सोमवार को अपार्टमेंट का एक पिलर क्या दरका, आवंटियों के फेफड़े मुंह को आ गए। सतर्कता बरतते हुए आवंटी अपने बच्चों, बुजुर्गों व महिलाओं के साथ जस की तस हाल में फ्लैटों से निकलकर सड़क पर आ गए। पल-पल उन्हें अपार्टमेंट के धराशायी होने की आशंका सताती रही। अपार्टमेंट में 25 परिवार रहते थे, जिसमें 150 लोग थे।
अपार्टमेंट खाली होने के बाद एलडीए की टीम ने मरम्मत शुरू कराई। वहीं, पुलिस ने अपार्टमेंट अपने कब्जे में ले लिया। आवंटियों को ऐहतियात के ताैर पर फ्लैटों में नहीं जाने दिया गया। दिन के बाद रात में भी आवंटी अपार्टमेंट के बाहर ही डटे रहे, जबकि बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को दूसरे स्थानों पर रह रहे रिश्तेदारों के पास छोड़ दिया।
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अपार्टमेंट पर टकटकी लगाए रहे आवंटी
आवंटियों के लिए रैन बसेरा बनाया गया था, लेकिन उसमें सन्नाटा ही पसरा रहा। रातभर आवंटी एलडीए की ओर से कराई जा रही मरम्मत देखते रहे। अपने फ्लैटों की ओर टकटकी लगाए रहे। आवंटी अपार्टमेंट की ओर आने-जाने वाले हर शख्स पर नजर रख रहे थे। गृहस्थी लुटने की आशंका उन्हें सता रही थी।
गृहस्थी लुटने की आशंका
अपार्टमेंट में पांचवीं मंजिल पर यूए लोहानी अपनी पत्नी के साथ रहते हैं। दोनों ही उम्रदराज हैं। यूए लोहानी ने बताया कि पत्नी को परिजनों के पास भेज दिया है, लेकिन फ्लैट खुला पड़ा हुआ है। लाॅक तक नहीं है। सारा सामान, अलमारियां आदि ऐसे ही पड़ी हुई हैं। उन्होंने बताया कि गृहस्थी खुली पड़ी है, रात में नींद कहां से आएगी।
पति व बेटी के साथ डटी रहीं ज्योति
पहली मंजिल पर रहने वाली ज्योति द्विवेदी ने बताया कि वह पति निखिल व बेटी के साथ रातभर माैके पर डटी रहीं। पति उन्हें रिश्तेदार के यहां जाने के लिए कहते रहे, लेकिन वह गृहस्थी छोड़कर जाने को राजी नहीं हुईं। ज्योति डीएम कार्यालय में काम करती हैं। हालांकि, वह अपार्टमेंट में किराये पर रहती हैं।
चाय पर किस्से सुनाते रहे आवंटी
पुलिस भी माैके पर डटी थी। पुलिसकर्मियों को अपार्टमेंट में लोगों को जाने से रोकना था। वहीं, आवंटियों को अपनी खुली हुई गृहस्थी की चिंता सता रही थी। लिहाजा अधिकतर लोग जागते ही रहे। चाय पर चर्चा करते रहे। आवंटी अपने-अपने किस्से एक-दूसरे को सुना रहे थे। अपार्टमेंट में आने, बच्चों की परवरिश सहित अपनी यादों को ताजा करते रहे। चाैथी मंजिल पर रहने वाले आकिब भी पूरी रात माैके पर डटे रहे।
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गोलागंज स्थित बारूदखाना में एसए अपार्टमेंट है। सोमवार को अपार्टमेंट का एक पिलर क्या दरका, आवंटियों के फेफड़े मुंह को आ गए। सतर्कता बरतते हुए आवंटी अपने बच्चों, बुजुर्गों व महिलाओं के साथ जस की तस हाल में फ्लैटों से निकलकर सड़क पर आ गए। पल-पल उन्हें अपार्टमेंट के धराशायी होने की आशंका सताती रही। अपार्टमेंट में 25 परिवार रहते थे, जिसमें 150 लोग थे।
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अपार्टमेंट खाली होने के बाद एलडीए की टीम ने मरम्मत शुरू कराई। वहीं, पुलिस ने अपार्टमेंट अपने कब्जे में ले लिया। आवंटियों को ऐहतियात के ताैर पर फ्लैटों में नहीं जाने दिया गया। दिन के बाद रात में भी आवंटी अपार्टमेंट के बाहर ही डटे रहे, जबकि बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को दूसरे स्थानों पर रह रहे रिश्तेदारों के पास छोड़ दिया।
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अपार्टमेंट पर टकटकी लगाए रहे आवंटी
आवंटियों के लिए रैन बसेरा बनाया गया था, लेकिन उसमें सन्नाटा ही पसरा रहा। रातभर आवंटी एलडीए की ओर से कराई जा रही मरम्मत देखते रहे। अपने फ्लैटों की ओर टकटकी लगाए रहे। आवंटी अपार्टमेंट की ओर आने-जाने वाले हर शख्स पर नजर रख रहे थे। गृहस्थी लुटने की आशंका उन्हें सता रही थी।
गृहस्थी लुटने की आशंका
अपार्टमेंट में पांचवीं मंजिल पर यूए लोहानी अपनी पत्नी के साथ रहते हैं। दोनों ही उम्रदराज हैं। यूए लोहानी ने बताया कि पत्नी को परिजनों के पास भेज दिया है, लेकिन फ्लैट खुला पड़ा हुआ है। लाॅक तक नहीं है। सारा सामान, अलमारियां आदि ऐसे ही पड़ी हुई हैं। उन्होंने बताया कि गृहस्थी खुली पड़ी है, रात में नींद कहां से आएगी।
पति व बेटी के साथ डटी रहीं ज्योति
पहली मंजिल पर रहने वाली ज्योति द्विवेदी ने बताया कि वह पति निखिल व बेटी के साथ रातभर माैके पर डटी रहीं। पति उन्हें रिश्तेदार के यहां जाने के लिए कहते रहे, लेकिन वह गृहस्थी छोड़कर जाने को राजी नहीं हुईं। ज्योति डीएम कार्यालय में काम करती हैं। हालांकि, वह अपार्टमेंट में किराये पर रहती हैं।
चाय पर किस्से सुनाते रहे आवंटी
पुलिस भी माैके पर डटी थी। पुलिसकर्मियों को अपार्टमेंट में लोगों को जाने से रोकना था। वहीं, आवंटियों को अपनी खुली हुई गृहस्थी की चिंता सता रही थी। लिहाजा अधिकतर लोग जागते ही रहे। चाय पर चर्चा करते रहे। आवंटी अपने-अपने किस्से एक-दूसरे को सुना रहे थे। अपार्टमेंट में आने, बच्चों की परवरिश सहित अपनी यादों को ताजा करते रहे। चाैथी मंजिल पर रहने वाले आकिब भी पूरी रात माैके पर डटे रहे।

अपार्टमेंट में रातभर चला काम।

अपार्टमेंट में रातभर चला काम।

अपार्टमेंट में रातभर चला काम।

अपार्टमेंट में रातभर चला काम।

अपार्टमेंट में रातभर चला काम।

अपार्टमेंट में रातभर चला काम।

अपार्टमेंट में रातभर चला काम।

अपार्टमेंट में रातभर चला काम।

अपार्टमेंट में रातभर चला काम।

अपार्टमेंट में रातभर चला काम।

अपार्टमेंट में रातभर चला काम।

अपार्टमेंट में रातभर चला काम।

अपार्टमेंट में रातभर चला काम।

अपार्टमेंट में रातभर चला काम।