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Lucknow News: भवन जर्जर, डॉक्टर नदारद... झोलाछाप से करा रहे पशुओं का इलाज
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रखरखाव न होन से बहरौली के पशु सेवा केंद्र में उगी झाड़ियां।
नगराम। ग्रामीण इलाके में पशुओं के समुचित इलाज व कृत्रिम गर्भाधान जैसी सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से बहरौली में खोला गया पशु सेवा केंद्र पशुपालकों के लिए बेकार साबित हो रहा है। भवन जर्जर हालत में पहुंच चुका है। चिकित्सक के भी वहां दर्शन नहीं होते। ग्रामीणों का आरोप है कि तमाम शिकायतों के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। मजबूरन निजी चिकित्सक व झोलाछाप से इलाज कराना पड़ रहा है।
विकास खंड गोसाईगंज क्षेत्र में करीब 40 साल पहले बहरौली, हरदोईया व समेसी में पशु सेवा केंद्र खोले गए थे। विभाग की ओर से बहरौली व समेसी में भवन भी बनवाए गए थे, जबकि हरदोईया में भवन न बनने के कारण उसका संचालन पंचायत भवन परिसर में किया गया। ग्रामीणों के मुताबिक कुछ साल तक ग्रामीणों को इसकी सुविधाएं मिलती रहीं, लेकिन बाद में यहां तैनात डाॅक्टर ने आना छोड़ दिया। विभाग के ध्यान नहीं देने पर बहरौली स्थित केंद्र का भवन जर्जर होता गया, जो अब खंडहर में तब्दील हो चुका है।
बहरौली निवासी उमेश प्रताप सिंह ने बताया कि पहले भवन में डाक्टर रहते थे, लेकिन उसके जर्जर हो जाने पर डॉक्टरों ने भी रहना छोड़ दिया। अब हरदोईया पंचायत भवन स्थित पशु चिकित्सा केंद्र पर भी चिकित्सक नहीं आ रहे। हरदोईया निवासी रामजस बाजपेई, दोरिया के बंशीलाल रावत, हरिहर वर्मा व अजीत कुमार ने बताया कि मजबूरन इलाके के लोग अपने पशुओं का इलाज निजी पशु चिकित्सक अथवा झोलाछाप से कराने को मजबूर हैं। मुकुंद खेड़ा निवासी मलखान सिंह व जौखंडी के तेजबहादुर सिंह ने बताया वह अपनी बीमार गाय का इलाज कराने जब बहरौली पंहुचे तो वहां भवन खंडहर मिला। लोगों ने बताया कि डॉक्टर नहीं आते। मजबूरन झोलाछाप से गाय का इलाज कराना पड़ा।
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बहरौली के पशु सेवा केंद्र का भवन जर्जर होने की जानकारी नहीं है। मौके का निरीक्षण कर भवन की मरम्मत कराई जाएगी। वहां तैनात डाक्टर अगर मौजूद नहीं मिलते हैं तो इसकी भी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. सुरेश कुमार, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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विकास खंड गोसाईगंज क्षेत्र में करीब 40 साल पहले बहरौली, हरदोईया व समेसी में पशु सेवा केंद्र खोले गए थे। विभाग की ओर से बहरौली व समेसी में भवन भी बनवाए गए थे, जबकि हरदोईया में भवन न बनने के कारण उसका संचालन पंचायत भवन परिसर में किया गया। ग्रामीणों के मुताबिक कुछ साल तक ग्रामीणों को इसकी सुविधाएं मिलती रहीं, लेकिन बाद में यहां तैनात डाॅक्टर ने आना छोड़ दिया। विभाग के ध्यान नहीं देने पर बहरौली स्थित केंद्र का भवन जर्जर होता गया, जो अब खंडहर में तब्दील हो चुका है।
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बहरौली निवासी उमेश प्रताप सिंह ने बताया कि पहले भवन में डाक्टर रहते थे, लेकिन उसके जर्जर हो जाने पर डॉक्टरों ने भी रहना छोड़ दिया। अब हरदोईया पंचायत भवन स्थित पशु चिकित्सा केंद्र पर भी चिकित्सक नहीं आ रहे। हरदोईया निवासी रामजस बाजपेई, दोरिया के बंशीलाल रावत, हरिहर वर्मा व अजीत कुमार ने बताया कि मजबूरन इलाके के लोग अपने पशुओं का इलाज निजी पशु चिकित्सक अथवा झोलाछाप से कराने को मजबूर हैं। मुकुंद खेड़ा निवासी मलखान सिंह व जौखंडी के तेजबहादुर सिंह ने बताया वह अपनी बीमार गाय का इलाज कराने जब बहरौली पंहुचे तो वहां भवन खंडहर मिला। लोगों ने बताया कि डॉक्टर नहीं आते। मजबूरन झोलाछाप से गाय का इलाज कराना पड़ा।
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बहरौली के पशु सेवा केंद्र का भवन जर्जर होने की जानकारी नहीं है। मौके का निरीक्षण कर भवन की मरम्मत कराई जाएगी। वहां तैनात डाक्टर अगर मौजूद नहीं मिलते हैं तो इसकी भी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. सुरेश कुमार, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी