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बच्चों की परीक्षा में फेल हुआ सर्व शिक्षा अभियान

Sat, 17 Aug 2013 02:09 AM IST
लखनऊ/ब्यूरो/इंटरनेट डेस्क
लखनऊ/ब्यूरो/इंटरनेट डेस्क Updated Sat, 17 Aug 2013 02:09 AM IST
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ten percent students are leaving the school education

एक तरफ तो अपनी राजधानी देश में उच्च शिक्षा के नए आयाम गढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ यहीं के 10 प्रतिशत बच्चे हर साल प्राथमिक शिक्षा में ही स्कूल छोड़कर काम में जुट जाते हैं।

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जनगणना के साथ हुई एनुअल हेल्थ सर्वे के जिलेवार आंकड़ों में बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ के लिए पूरे प्रदेश की तुलना में लखनऊ की हालत ज्यादा खराब मिली।

प्राथमिक स्तर पर ही स्कूल छोड़ रहे बच्चे बालश्रम का भी शिकार बन रहे हैं। यह स्थिति तब है जब लखनऊ की 30 प्रतिशत आबादी 15 साल से कम उम्र की है।

आंकड़ों के मुताबिक 10.4 प्रतिशत बच्चे छह साल की उम्र पूरी करने के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं। जनगणना के आंकड़ों के आधार पर यह संख्या अकेले लखनऊ में करीब 1.5 लाख है।
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बड़ी संख्या में बच्चों के पढ़ाई छोड़ने के आंकड़े सरकारी महकमे की गंभीरता पर भी सवाल खड़े करते हैं। यूपी में ड्रॉप आउट का आंकड़ा 10.3 प्रतिशत है।

लड़कों में जहां स्कूल छोड़ने की प्रवृत्ति 11.1 प्रतिशत है, वहीं लड़कियां 9.6 प्रतिशत के साथ बेहतर स्थिति में हैं। पढ़ाई छोड़ रहे ये बच्चे अलग-अलग काम का हिस्सा बन रहे हैं।
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लखनऊ में 5-14 साल की उम्र में 3.1 प्रतिशत बच्चे किसी न किसी तरह के काम से जुड़े हुए हैं। यह आंकड़ा भी यूपी के 2.7 प्रतिशत से ज्यादा है।

शहरी गरीब बच्चों की शिक्षा पर काम कर रहे विज्ञान फाउंडेशन के कार्यक्रम समन्वयक संजय श्रीवास्तव का कहना है कि ड्रॉप आउट के पीछे संसाधन की कमी है।

मिड-डे मील जैसी योजनाएं बच्चों को आकर्षित तो कर सकती हैं लेकिन एक तो बच्चों के लिए स्कूल में जगह नहीं होती वहीं दूसरी तरफ शिक्षक भी उन पर ध्यान नहीं देते। ऐसे में कुछ समय के बाद बच्चे स्कूल आना छोड़कर काम में लग जाते हैं।

बच्चों का सरकार के पास आंकड़ा ही नहीं
रिपोर्ट के मुताबिक राजधानी में केवल 54.6 प्रतिशत बच्चों का जन्म के बाद रजिस्ट्रेशन कराया गया। इसमें से भी 47.7 प्रतिशत को ही सर्टिफिकेट मिल पाए।

यूपी में बर्थ सर्टिफिकेट मिलने की स्थिति ज्यादा खराब है। यहां केवल 18.1 प्रतिशत के पास ही बर्थ सर्टिफिकेट है।

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