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प्राण प्रतिष्ठा: ट्रस्ट ने किया स्पष्ट, विराजमान रामलला भी होंगे पूजित, शंकराचार्य ने पत्र में उठाए थे सवाल

Thu, 18 Jan 2024 08:19 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला संवाद, अयोध्या
अमर उजाला संवाद, अयोध्या Published by: रोहित मिश्र Updated Thu, 18 Jan 2024 08:19 PM IST
सार

राम मंदिर ट्रस्ट ने एक बार फिर से साफ किया है कि अचल मूर्ति के साथ वर्तमान में विराजित रामलला भी पूजित होंगे। भक्तों की भावना को देखते हुए एक बड़ी मूर्ति बनाने का निर्णय लिया गया है। 

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Temple Trust again clarified that Ram Lalla seated along with the immovable idol will also be worshipped
Ayodhya Ram Mandir Pran Pratishtha - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

रामलला के नवनिर्मित मंदिर में अचल विग्रह की स्थापना के साथ-साथ विराजमान रामलला को भी पूजित-प्रतिष्ठित किया जाएगा। राममंदिर के गर्भगृह में सोने के सिंहासन पर रामलला की 51 इंच की अचल मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जानी है, वहीं विराजमान रामलला को भी इसी गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा। वे मंदिर में चल मूर्ति यानि उत्सव मूर्ति के रूप में पूजित होंगे।

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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने साफ कहा है कि विराजमान रामलला मुकदमा जीते हैं, उन्हें कैसे हटाया जा सकता है नवनिर्मित गर्भगृह में वे भी प्रतिष्ठित किए जाएंगे। अचल विग्रह के ठीक सामने सिंहासन पर उन्हें चारों भाईयों समेत विराजमान किया जाएगा। रोजाना उनकी पूजा, आरती होगी। अचल मूर्ति स्थापित होने के बाद हिल नहीं सकेगी इसलिए विराजमान रामलला उत्सव मूर्ति के रूप में यहां प्रतिष्ठित रहेंगे। पर्व व त्यौहारों पर इसी उत्सव मूर्ति के साथ शोभायात्रा भी निकाली जाएगी।
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चंपत राय ने कहा कि विराजमान रामलला आकार में बहुत छोटे हैं ऐसे में भक्तों को ठीक से भगवान के दर्शन नहीं हो पाते थे। भक्तों की भावना को देखते हुए एक बड़ी मूर्ति बनाने का निर्णय लिया गया था ताकि रामलला के मुख मंडल का दर्शन भक्त ठीक तरह से कर पाएं। अचल मूर्ति 51 इंच की है। इसे चार फीट ऊंचे सिंहासन पर विराजमान किया जाएगा। इस तरह मूर्ति की कुल ऊंचाई करीब आठ फीट हो जाएगी, ऐसे में भक्त को सुलभ दर्शन प्राप्त हो सकेगा।
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मात्र छह इंच की है विराजमान रामलला की मूर्ति
अस्थायी मंदिर में रामलला चारों भाइयों समेत विराजमान हैं। विराजमान रामलला की मूर्ति मात्र छह इंच की है। रामलला इस मूर्ति में एक हाथ में लड्डू लिए हुए घुटने के बल पर बैठे हैं। भरत की मूर्ति भी छह इंच की है, जबकि लक्ष्मण व शत्रुह्न की मूर्ति तो मात्र तीन-तीन इंच की है। गर्भगृह में हनुमान की भी दो मूर्तियां हैं इनमें से एक मूर्ति पांच इंच की है जबकि एक बड़ी मूर्ति लगभग तीन फीट की है।

शंकराचार्य ने उठाए थे सवाल, महंत कमलनयन दास ने दिया जवाब

शंकराचार्य जगद्गुरु अविमुक्तेश्वरानंद ने प्राण प्रतिष्ठा के स्थान और पुरानी मूर्ति पर सवाल उठाए थे। इसका जबवा ट्रस्ट अध्यक्ष के उत्तराधिकारी द्वारा दिया गया।। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास ने गुरुवार को कहा है कि शंकराचार्य जगद्गुरु अविमुक्तेश्वरानंद को क्या पता कि राममंदिर के लिए कितना संघर्ष हुआ। भव्य राममंदिर का निर्माण हो रहा है, जो भी हो रहा वह बिल्कुल ठीक है। महंत कमलनयन ने यह बातें ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर ट्रस्ट अध्यक्ष को लिखे पत्र को लेकर कहीं हैं।

बताते चलें कि ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास को पत्र लिखकर अस्थायी मंदिर में विराजमान रामलला की उपेक्षा पर चिंता जताई है। उन्होंने मांग किया है कि निर्माणाधीन मंदिर के गर्भगृह में विराजमान श्रीरामलला की ही प्रतिष्ठा की जाए, अन्यथा विराजमान रामलला पर बहुत बड़ा अन्याय होगा। उन्होंने अर्ध निर्मित मंदिर में हो रही प्राण प्रतिष्ठा पर भी सवाल खड़ा किया है। महंत कमलनयन दास ने साफ कहा है कि जवाब देने की कोई जरूरत नहीं है। विराजमान रामलला भी नए मंदिर में पूजित-प्रतिष्ठित किए जाएंगे।
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