74 फीसदी लोगों की मैसेज के लिए व्हाटस पसंद
- 91 प्रतिशत युवाओं की पसंद फेसबुक
- 74 फीसदी मैसेज करने के लिए करते है व्हाट्सएप का उपयोग
- 85 प्रतिशत के पास अब स्मार्टफोन
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सोशल मीडिया और व्हाट्स एप जैसे मैसेजिंग एप का उपयोग करने में अव्वल युवा अब ऑनलाइन खरीदारी में भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। हालांकि, यह भी खासा दिलचस्प है कि इनमें से 62 फीसदी ऑनलाइन शॉपिंग करते समय इलेक्ट्रॉनिक गैजेट ही खरीदते हैं।
ट्विटर अब तक भले ही उपयोग में पिछड़ा रहा हो। लेकिन अब इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने अपनी लोकप्रियता बढ़ाई है। सोशल मीडिया का हिस्सा बने युवाओं में 50 प्रतिशत के अकाउंट ट्विटर पर भी हैं। यह आंकड़े टीसीएस यूथ सर्वे में सामने आए हैं।
टीसीएस के 12-18 साल के युवा समूह में लखनऊ समेत 13 शहरों में यह सर्वे कराया गया। यह युवा 1995 के बाद पैदा हुए जिन्हें सर्वे का हिस्सा बनाया गया। लखनऊ के आंकड़ों की रिपोर्ट सोमवार को टीसीएस ने जारी की। इसमें बताया गया कि स्मार्ट पीढ़ी का पसंदीदा गैजेट भी स्मार्टफोन है।
85 प्रतिशत के पास अब स्मार्टफोन मौजूद है। इसमें 51 फीसदी इंटरनेट का उपयोग भी अपने स्मार्टफोन पर ही करते हैं। फेसबुक अभी सबसे चर्चित सोशल मीडिया है। 91 प्रतिशत युवाओं ने माना कि वे फेसबुक का उपयोग करते हैं। लड़कियों की तुलना में फेसबुक का उपयोग लड़कों में ज्यादा मिला। फेसबुक के साथ ट्विटर भी अब लखनऊ में जगह बना रहा है।
माता पिता भी आ चुके है ऑनलाइन
50 फीसदी ने माना कि सोशल मीडिया में वे ट्विटर का भी उपयोग करते हैं। ट्विटर का उपयोग करने वालों में लड़कियां अभी पिछड़ी ही हैं। केवल 27 प्रतिशत लड़कियों ने इसके उपयोग में हां कहा। एसएमएस सेवा को अब व्हाट़्सएप ने बहुत पीछे छोड़ दिया है। केवल 11 प्रतिशत युवा ही एमएसएस का उपयोग करते हैं।
74 फीसदी मैसेज करने के लिए अब व्हाट्सएप का उपयोग ही पसंद करते हैं।
26 फीसदी युवा ऐसे हैं जोकि हर एक घंटे में अपने नोटिफिकेशन को चेक करते हैं और इसका जवाब देते हैं। 25 फीसदी तो आधा घंटा के अंदर ही नोटिफिकेशन चेक कर उसका जवाब दे देते हैं।
माता-पिता भी अब ऑनलाइन आ चुके हैं। 52 प्रतिशत युवाओं के मां-बाप अपने बच्चों की निगरानी सोशल मीडिया और उनके इंटरनेट उपयोग को चेक करते हुए मिले।
सर्वे कंपनी ग्लोबल कम्युनिकेशंस के हेड प्रदीप्त बागची का कहना है लखनऊ के युवा सामाजिक रूप से घुलने-मिलने में भी यकीन करते हैं। 38 फीसदी का मानना है कि ऑनलाइन से ज्यादा वह सीधे मिलना प्राथमिकता में रखते हैं। डिजिटल माध्यमों का उपयोग बढ़ा है। इससे उन्हें सीखने में भी मदद मिल रही है। अच्छी बात यह है कि अब ये युवा खुद ही करके सीखने में यकीन रखते हैं।