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टैक्स चोरों का नया पैंतरा,ट्रेन नहीं ट्रक से मंगा रहे सामान

Fri, 11 Oct 2013 02:27 AM IST
नरेश शर्मा/लखनऊ
नरेश शर्मा/लखनऊ Updated Fri, 11 Oct 2013 02:27 AM IST
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tax evaders follow new tactics

वाणिज्य कर विभाग व जिला प्रशासन के चारबाग रेलवे स्टेशन पर छापे के बाद भी टैक्स चोरों के हौसले बुलंद हैं।

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फर्क सिर्फ इतना पड़ा है कि उन्होंने माल लाने के लिए ट्रेन के बजाए अपंजीकृत ट्रांसपोर्टरों के ट्रकों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।

इन दिनों दिल्ली से आने वाले माल की आवक ट्रकों से बढ़ गई है। रोजाना दो करोड़ रुपये का माल आ रहा है। खास बात है कि यह सब चेकिंग दस्ते की नाक के नीचे हो रहा है।

दरअसल अपंजीकृत ट्रांसपोर्टर और चंद विभागीय अफसर लाखों रुपये के वाणिज्य कर की बंदरबांट के लालच में माल पार कराने में मददगार बने हुए हैं।

सूत्रों की मानें तो इस खेल में चुनिंदा कारोबारियों और अपंजीकृत ट्रांसपोर्टरों की सांठगांठ है। इनको वाणिज्य कर विभाग के चंद उच्च अफसरों का संरक्षण हासिल है।
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यह ट्रांसपोर्टर खुलेआम माल पर लगने वाले टैक्स की आधी रकम लेकर माल को कारोबारी के गोदाम तक सुरक्षित पहुंचाने का गोरखधंधा कर रहे हैं।

इससे राज्य ही नहीं केंद्र सरकार को भी राजस्व की चपत लग रही है। यह ट्रांसपोर्टर 24 घंटे के भीतर दिल्ली का माल लखनऊ में पटक देते हैं, जबकि दिल्ली से माल आने में तीन दिन लगते हैं।
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इनके माल लदे ट्रक को कोई भी चेकिंग दस्ता जांच के लिए नहीं रोकता। ट्रक से आने वाले माल पर जितने रुपये की टैक्स चोरी होती है, उसकी एक चौथाई रकम संरक्षणदाताओं को ‘हफ्ता वसूली’ के रूप में दी जाती, जिसकी बंदरबांट ऊपर से नीचे तक होती है।

ऐसे होती है टैक्स चोरी
टैक्स चोरी के लिए चर्चित लखनऊ और दिल्ली के ट्रांसपोर्टरों के एजेंसी दफ्तर और गोदाम ऐशबाग, ऐशबाग मिल रोड, आलमनगर, चारबाग आदि इलाके की गलियों एवं कूचों में खुले हैं जो कि पूरी तरह अवैध हैं।

ट्रांसपोर्टरों के ट्रक पहले इन्हीं गोदामों में पहुंचते हैं। यहां पर ट्रांसपोर्टर ट्रक में लोड होने वाले माल के टैक्स (वैट) की गणना करते हैं।

माल पर जितने टैक्स की गणना होती है, उसकी आधी रकम एवं भाड़ा वसूल करके माल को व्यापारी के गोदाम तक पहुंचा दिया जाता है।

सादे कागज पर बिल्टी
वाणिज्य कर विभाग में चंद उच्च अफसरों के इशारे पर जो ट्रक गाजियाबाद से टैक्स चोरी का माल लेकर लखनऊ के लिए रवाना होते हैं, उनको रोड पर कोई भी चेकिंग दस्ता चेक नहीं करता है।


जबकि ऐसे माल की सादे कागज पर ही बिल्टी बनी होती, जिस पर व्यापारी का ब्योरा कोड वर्ड में दर्ज होता है।

रोजाना 15-20 ट्रक माल उतरता है
दिल्ली से अधिकतर किराना, सूखे मेवे, आटो स्पेयर पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण, होजरी, रेडीमेड, कास्मेटिक और हार्डवेयर माल की लखनऊ में आवक होती है। कारोबारियों की मानें तो दिल्ली से लखनऊ में रोजाना 15 से 20 ट्रक माल उतरता है।

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