{"_id":"ff2cad32977bee7d82941ea7865f0ebd","slug":"taliban-terror-in-indian-cities","type":"story","status":"publish","title_hn":"तालिबानी आतंकियों ने किए कई बड़े खुलासे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तालिबानी आतंकियों ने किए कई बड़े खुलासे
विष्णु मोहन/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 29 Mar 2014 08:11 AM IST
विज्ञापन
इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के साथ अब तहरीक-ए-तालिबान (अफगानिस्तान) भी यूपी व अन्य प्रांतों में आतंकी घटना को अंजाम देने की योजना बना रहा है।
विज्ञापन
इसका खुलासा तालिबान की इस तहरीक से ट्रेनिंग हासिल कर यूपी में बड़ी वारदात को अंजाम देने के मंसूबे से पहुंचे अब्दुल वलीद और मोहम्मद ओवैस ने पूछताछ में किया है।
विज्ञापन
उनके मुताबिक अब दोनों ही संगठन मिलकर काम कर रहे हैं। दोनों आतंकियों ने कहा कि कई माड्यूल यूपी में पहले ही पहुंच चुके हैं और कई और की घुसपैठ होनी है।
आतंकी अब्दुल वलीद व मोहम्मद ओवैस को 12 दिन की रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है।
एटीएस व आईबी ने शुक्रवार को दिनभर दोनों आतंकियों से पूछताछ की। सूत्रों का कहना है कि पूछताछ में जो तथ्य सामने आए हैं, वह जांच एजेंसियों को बेहद चौंकाने वाले हैं।
विज्ञापन
दोनों आतंकियों से अलग-अलग और आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जा रही है।
एटीएस के सूत्रों का कहना है कि दोनों ने यह बताया कि उनसे पहले भी कई लोगों को प्रशिक्षण देकर यूपी भेजा गया है। साथ ही कुछ अन्य प्रांतों में भी ऐसे माड्यूल पहुंच चुके हैं।
इनमें से कुछ के नाम भी इन दोनों ने जांच एजेंसियों को बताए हैं, जिनसे इनकी मुलाकात ट्रेनिंग कैंप में हुई थी। वे यूपी में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने पहुंच चुके हैं।
हालांकि पूछताछ में इसकी कोई ठोस जानकारी या सुराग सामने नहीं आ सका है जिसके आधार पर माड्यूल को चिह्नित किया जा सके।
इसके लिए एटीएस ने आईबी व दिल्ली स्पेशल ब्रांच से सहयोग मांग रही है। जांच एजेंसियों के कोशिश है कि किसी तरह चुनाव से पहले ही इनमें से कुछ को गिरफ्तार कर लिया जाए।
...ताकि नए रूप में न पहचाने जाएं
तालिबानी माड्यूल भेजने के लिए आईएम कमांडर रियाज भटकल और तहरीक-ए-तालिबान के अमीर मुल्ला उमर मिलकर काम कर रहे हैं।
इसी वजह से जो भी माड्यूल भेजे जा रहे हैं, उसे सबसे पहले तहरीक-ए-तालिबान से हथियार चलाने व विस्फोटकों के बारे में पूरी जानकारी दी जाती थी।
इसके बाद उन्हें पहले से क्षेत्र में जाकर बसने को कहा जा रहा था ताकि घटना के समय वह नए बंदे के तौर पर न पहचाने जाएं।