फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   symptoms of meningitis notice like this

इस तरह से पहचान सकते हैं दिमागी बुखार के लक्षण

Thu, 17 Sep 2015 01:38 PM IST
Updated Thu, 17 Sep 2015 01:38 PM IST
विज्ञापन
symptoms of meningitis notice like this

अगर बच्चे को लगातार तेज बुखार आ रहा है और वह बहकी-बहकी बात कर रहा है तो उसे तुरंत डॉक्टर को दिखाई। यह लक्षण दिमागी बुखार का हो सकता है क्योंकि ऐसे में बुखार दिमाग पर हावी होने लगता है। यह कहना है डफरिन अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सलमान खान का।

विज्ञापन


वो बताते हैं कि जापानी इंसेफलाइटिस और एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम क्यूलेक्स नाम के मच्छर से पनपता है। ये मच्छर मच्छर जहां धान की खेती होती है या जलभराव अधिक होता है वहां पर पैदा होते हैं। जेई और एईएस का वायरस सुअर में पाया जाता है।
विज्ञापन


मच्छर जब इनको काटने के बाद मानव जाति के संपर्क में आते हैं तो वो मनुष्यों में इस वायरस को फैला देते हैं। बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण उनकी हालत गंभीर हो जाती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

एक्सरसाइज से बेहतर होगा आपका बच्चा

symptoms of meningitis notice like this

बुखार से ठीक होने के बाद कई बार ये पता चलता है कि बच्चा सुनने और देखने की क्षमता खो चुका है। ऐसे में इस बात का ध्यान जरूरी है और ओरोमोटर एक्सरसाइज जरूरी है। बच्चे के मुंह से लगातार लार गिरती रहती है। मुंह बंद या खुला रहता है। सांस लेने में दिक्कत होती है।

पानी या खाना निगलने में दिक्कत होती है तो स्पीच पैथोलॉजिस्ट के साथ ईएनटी एक्सपर्ट की सलाह लेनी चाहिए। बच्चों के गाल पर हाथ से गोल-गोल घुमाते रहना चाहिए। गुब्बारा फुलाने के साथ सीटी बजाने के लिए लिए प्रेरित करना चाहिए जिससे वो तेजी से रिकवर करे और सामान्य जीवन जी सके।

केजीएमयू की स्पीच पैथोलॉजिस्ट डॉ. सुहानी शर्मा की मानें तो दिमागी बुखार की चपेट में आने के बाद बच्चों की समझने और पहचानने की क्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है। वो बताती हैं कि दिमाग में वायरस फैलने से बच्चों की बोलने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है जिससे मेडिकल की भाषा में बेबी टॉक्स कहते हैं।

इन बातों का रखें खास ध्यान

symptoms of meningitis notice like this

ऐसी स्थिति में बच्चों का शरीर पूरी तरह शिथिल पड़ जाता है और उनके हाथ पैर और गर्दन काम करना बंद कर देते हैं। ऐसे में बच्चों की रिकवरी के साथ उनके बोलने, समझने और सुनने की क्षमता को बनाए रखने के लिए नियमित ध्यान देने की जरूरत है। ऐसे में बच्चों के हाथ पैर पर हल्की मालिश के साथ आंख से देखने और कान से सुनने की जांच भी कराती रहनी चाहिए।

•डॉ. सलमान बताते हैं कि दिमागी बुखार से शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है। इसलिए कोल्ड स्पंजिंग यानि ठंडे पानी से शरीर को अच्छे तरीके से साफ करें।
•शरीर को ढंक कर रखने की बजाय खुले में पंखे में रखे। शरीर के तापमान के हिसाब से नियमित फ्लूयड चढ़ाया जाए जिससे उनकी हालत और गंभीर न हो।
•बुखार आने पर बच्चों को बिना डॉक्टरी सलाह के कोई भी दवा न दें। इससे हालत और बिगड़ सकती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed