{"_id":"60cef9f959467e6bc505f41b","slug":"swami-prasad-maurya-said-chief-minister-will-be-decided-after-up-election-2022","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूपी चुनाव 2022: कैबिनेट मंत्री बोले- चुनाव बाद होगा मुख्यमंत्री का फैसला, भाजपा संसदीय बोर्ड करेगा निर्णय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी चुनाव 2022: कैबिनेट मंत्री बोले- चुनाव बाद होगा मुख्यमंत्री का फैसला, भाजपा संसदीय बोर्ड करेगा निर्णय
Sun, 20 Jun 2021 01:57 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sun, 20 Jun 2021 01:57 PM IST
सार
यूपी के कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य का कहना है कि यूपी का विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री कौन होगा इसका निर्णय चुनाव बाद किया जाएगा।
विज्ञापन
कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य का कहना है कि चुनाव के बाद यूपी का मुख्यमंत्री कौन होगा। इसका फैसला भाजपा का केंद्रीय संसदीय बोर्ड चुनाव के बाद करेगा। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव सब मिलकर लड़ेंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि 2022 में फिर भाजपा की सरकार बनेगी।
विज्ञापन
बता दें कि पिछले दिनों प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी बयान दिया था कि चुनाव बाद मुख्यमंत्री का फैसला भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व तय करेगा। वहीं, शनिवार को हुए सियासी घटनाक्रम में महीनों से चल रही तरह-तरह की अटकलों के बीच भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने आखिरकार पूर्व नौकरशाह अरविंद शर्मा की सियासी पारी की भूमिका तय कर दी। उन्हें पार्टी का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। इसी के साथ भाजपा हाईकमान ने एक तरह से सरकार और संगठन में फेरबदल की सारी अटकलों पर भी विराम लगाते हुए साफ संदेश दे दिया है कि 2022 का चुनावी समर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह के ही नेतृत्व में लड़ा जाएगा।
विज्ञापन
भाजपा हाईकमान की तरफ से यह फैसला काफी सोच-समझकर किया गया नजर आता है। भाजपा हाईकमान ने शर्मा के जरिए संभवत: सरकार के बजाय संगठन की भूमिका को प्रभावी और चुनावी जरूरतों के लिहाज से सत्तारूढ़ दल में जरूरी प्रशासनिक क्षमताओं के विकास व विस्तार की रणनीति पर काम किया है। साथ ही जनप्रतिनिधियों व कार्यकर्ताओं की आवश्यकताओं व अपेक्षाओं को पूरा कर असंतोष को कम करने के उपायों पर भी अमल का प्रयास किया है।
विज्ञापन