बसपा छोड़ भाजपाई बने स्वामी प्रसाद मौर्य ने दिया इस्तीफा
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उन्होंने अपने आवास पर पत्रकार वार्ता में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा व नैतिकता का हवाला देते हुए इस्तीफे का एलान किया। साथ ही बसपा सुप्रीमो मायावती के खिलाफ पैसे के हवस में जीने और अंबेडकर के मिशन व कांशीराम के विचारों को बेचने जैसे पुराने आरोप भी दुहराए।
बताते चलें, विधानसभा में बसपा विधानमंडल दल के नेता गयाचरण दिनकर ने मौर्य के खिलाफ दलबदल कानून के तहत सदस्यता रद्द किए जाने के लिए विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय के समक्ष याचिका दाखिल की थी।
अध्यक्ष ने इस मामले में अंतिम सुनवाई व फैसले के लिए 31 अगस्त की तिथि तय कर रखी है। मौर्य ने अध्यक्ष के फैसले के पहले ही इस्तीफा दे दिया। माना जा रहा है कि मौर्य ने दलबदल कानून की संभावित कार्रवाई से बचने के लिए इस्तीफा दिया है। हालांकि उन्होंने इससे इन्कार किया।
'इतने बेहया नहीं कि विधायक बने रहे'
मौर्य ने कहा कि अगर हम चाहें तो प्रकरण को सुप्रीम कोर्ट तक ले जा सकते हैं लेकिन हम इतने बेहया व बेशर्म नहीं हैं कि बसपा के राष्ट्रीय महासचिव, विधानमंडल दल के नेता, नेता प्रतिपक्ष जैसे पद छोड़कर भी विधायक बने रहें।
उन्होंने कहा कि आठ अगस्त को भाजपा में शामिल होते ही उन्होंने विधायक पद छोड़ने की बात तय कर ली थी, लेकिन 22 सितंबर की रैली की तैयारी की व्यस्तता की वजह से इस्तीफा नहीं दे पा रहे थे।
रैली में शाह का आना तय, पीएम को भी बुलाया
मौर्य ने कहा कि 22 सितंबर की रैली में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह स्वयं उपस्थित रहेंगे। उनके माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी रैली में आने के लिए आग्रह किया गया है। स्वामी प्रसाद ने अपने व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य के बीच किसी तरह के मतभेद से इन्कार किया।