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UP News : साढ़े तीन साल से निलंबित आईपीएस करने लगे खेती, सोशल मीडिया पर अपने गाने भी करते रहते हैं वायरल

Fri, 05 Aug 2022 09:28 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Fri, 05 Aug 2022 09:28 AM IST
सार

मौजूदा समय में यूपी कॉडर के पांच आईपीएस निलंबित चल रहे हैं। इनमें जसवीर के अलावा डीआईजी अनंत देव, एसपी अलंकृता सिंह, पवन कुमार और मणिलाल पाटीदार शामिल हैं। पाटीदार के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने व भ्रष्टाचार का केस चल रहा है। वह फरार हैं।

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Suspended IPS for three and a half years, started doing farming, doing his songs on social media too viral
जसवीर सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी बीते साढ़े तीन वर्षों से निलंबित हैं। तब से उन्हें घर बैठे आधा वेतन मिल रहा है और वर्तमान में वह पंजाब में वैज्ञानिक विधि से खेती कर रहे हैं। गाने के शौकीन इस अफसर का समय-समय पर गाना भी सोशल मीडिया पर वायरल होता रहता है। वहीं, जांच में सहयोग न करने पर शासन अब उन्हें बर्खास्त करने पर विचार कर रहा है।

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यह अफसर हैं 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी जसवीर सिंह। उन्हें उप्र. पुलिस आचरण नियमावली के उल्लंघन में 14 फरवरी, 2019 को निलंबित किया गया था। उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की गई थी। आरोप है कि वह जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। जांच अधिकारी ने कई बार बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस भेजा, लेकिन वह हाजिर नहीं हुए। गृह विभाग के सूत्रों का कहना है कि निलंबन के बाद से जसवीर ने अपनी बहाली का प्रयास भी नहीं किया। न ही अपने निलंबन के विरोध में मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव के यहां अपील की। ऐसे में अब उन्हें बर्खास्त करने पर विचार किया जा रहा है।
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क्या है नियम
दरअसल, आईपीएस अधिकारी को अधिकतम 60 दिनों के लिए निलंबित किया जा सकता है। इसके बाद अवधि बढ़ाने के लिए मुख्य सचिव समीक्षा करते हैं। मुख्य सचिव निलंबन अवधि 180 दिन तक बढ़ा सकते हैं। छह माह की निलंबन अवधि के बाद प्रदेश सरकार को केंद्र सरकार को सूचित करना होता है। वहीं निलंबित अधिकारी अपना निलंबन वापस कराने के लिए कैट में अपील कर सकता है। निलंबन की अवधि में जीवन यापन के लिए मूल वेतन का 50 प्रतिशत अधिकारी को दिया जाता है। अधिकारी जांच में सहयोग करता है तो उसे 25 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। निलंबन में जांच अधिकारी की वजह से विलंब होने की स्थिति में संबंधित अधिकारी को मूल वेतन का 90 प्रतिशत तक दिया जा सकता है।
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चार और आईपीएस चल रहे निलंबित
मौजूदा समय में यूपी कॉडर के पांच आईपीएस निलंबित चल रहे हैं। इनमें जसवीर के अलावा डीआईजी अनंत देव, एसपी अलंकृता सिंह, पवन कुमार और मणिलाल पाटीदार शामिल हैं। पाटीदार के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने व भ्रष्टाचार का केस चल रहा है। वह फरार हैं। उन पर एक लाख का इनाम भी है। पाटीदार 9 सितंबर, 2020 से निलंबित हैं।  उनकी बर्खास्तगी की प्रक्रिया चल रही है। वहीं, डीआईजी अनंत देव को कानपुर के चर्चित बिकरू कांड में गठित एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर 12 नवंबर, 2020 को निलंबित किया गया था। गाजियाबाद के एसएसपी रहे पवन कुमार को 31 मार्च, 2022 को लापरवाही के आरोप में निलंबित किया गया था। 2008 बैच की आईपीएस अलंकृता सिंह को पुलिस आचरण नियमावली के उल्लंघन में इसी वर्ष अप्रैल में निलंबित किया गया था। 

इनके अलावा दो अन्य अधिकारी ऐसे भी हैं जो बीते चार साल में निलंबन की अवधि में ही रिटायर हो गए। डीआईजी सीबीसीआईडी रहे अरविंद सेन और डीआईजी दिनेश चंद्र दुबे पशुधन विभाग के नाम पर की गई ठगी में निलंबित किए गए थे। निलंबन के दौरान ही वे रिटायर हो गए। सेन के खिलाफ मुकदमा कायम हो गया था, वह अभी जेल में हैं।
 

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