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कोरोना संदिग्ध की आपबीतीः दहशत से 14 दिन बीतने के बाद भी नहीं मिलने आ रहे लोग

Wed, 04 Mar 2020 04:23 PM IST
ishwar ashish चंद्रभान यादव/अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 04 Mar 2020 04:23 PM IST
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suspected patients of coronavirus facing problems in lucknow
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
अरसे बाद विदेश से कोई अपना लौटता है तो उसे बांहों में भर लेने की चाहत होती है, लेकिन कोरोना वायरस के चलते इस बार ऐसा नहीं हो पाया। घर लौटते ही जहां दोस्तों और रिश्तेदारों का तांता लग जाता था, महफिल जम जाती थी, वहां अब सन्नाटा है।
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सतर्कता के लिए 14 दिन तक का अकेलापन तो किसी तरह कट गया, लेकिन दर्द तब और बढ़ जाता है, जब लोग 20 दिन बाद भी बात नहीं करते हैं। राजधानी के किसी भी निवासी में वारयस की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन उसकी दहशत ने लोगों से दूरियां जरूर बना दी है। ‘अमर उजाला’ ने उन यात्रियों से बात की, जिन्हें स्वास्थ्य विभाग ने संदिग्ध माना था, पेश है बातचीत के प्रमुख अंश...
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राजधानी में कोरोना वायरस की चपेट में कोई नहीं आया है, लेकिन विदेश से लौटने वालों को अपने ही घर में बेगाना होना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग 14 दिन की विशेष सावधानी बरतने को कहता है। यात्रियों के लिए यह अकेलापन 14 साल के वनवास जैसा है।
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मोहल्ले के लोग ही नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य भी दूरी बना लेते हैं। उन्हें विदेश से लौटने वाले परिवारीजन से मौत का वायरस आने का भय है। राजधानी में विदेश से लौटे सभी यात्री अब स्वस्थ हैं। उनकी ख्वाहिश है कि कम से कम लोग जानें कि वे चीन या अन्य देश से लौटे हैं। फिलहाल राजधानी में करीब 248 लोगों को विशेष निगरानी में रखा गया है। छह लोगों के सैंपल जांच कराए गए हैं। इसमें अभी तक किसी में भी कोरोना वायरस नहीं पाया गया है।

दोस्तों ने किया किनारा ऑनलाइन क्लास का सहारा

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प्रतीकात्मक तस्वीर

इंदिरानगर का छात्र एमबीबीएस की पढ़ाई को चीन की नांगचांग यूनिवर्सिटी गए थे। व्हुआन से 200 किमी दूर इस यूनिवर्सिटी में भारत के 200 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। बताया तीन फरवरी को लौटा हूं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रास्ते में रोका। लक्षण न मिलने पर भी 14 दिन घर में रहने को कहा गया। मां साथ रही। माहभर का वक्त बीत चुका है, अब तक कोई दोस्त मिलने नहीं आया है। यूनिवर्सिटी ऑनलाइन क्लास चला रही है।

14 साल के वनवास की तरह गुजरे 14 दिन
दुबई से लौटे यात्री का पता पूछने पर चौक की गलियों में लोग काम छोड़ पूछते लगते हैं कि आप वहां क्यों जा रहे हैं? हो सकता है कि व कोरोना से संक्रमित हों। कोरोना के बारे में पूछने पर ये कुछ भी नहीं बता पाते। जुम्मन दूर से ही खालिद (बदला नाम) का घर दिखाते हैं।

डोरबेल बजाने पर निकले युवक ने बताया कि वह सो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम की सलाह पर उन्हें कमरे में रखा गया है। आवाज सुन खालिद बात करने को राजी होते हैं। कहते हैं कि लौटने पर सर्दी-जुकाम था। जांच में सब निगेटिव आया।14 दिन एक कमरे में बंद रहा। कोरोना से 14 दिन 14 साल के वनवास की तरह लगे। दुबई से लौटे 20 दिन हो गए, मोहल्ले के लोग मिलने नहीं आए। इस बार अपनों से कटने का दर्द महसूस हुआ है।

कोरोना को लेकर दहशत ज्यादा

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कोरोना वायरस

चीन के डाली यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्र का गांव राजधानी से 10 किमी दूर है। उसने बताता कि तीन फरवरी को लौटा हूं। चिकित्सकों से मिले दिशा-निर्देश से 14 दिन तक बाहर नहीं निकला। पूरी तरह से ठीक हूं।

परिवार के लोग तो साथ रहे, लेकिन आस-पास के लोगों को भय था। मेरे परिवार के लोग भी जिधर से गुजरते थे, गांव के लोग रास्ते से हटने का प्रयास करते। कोई कुछ बोलता नहीं पर इशारा समझ में आ जाता है। बस, इतना कहूंगा कि कोरोना वायरस को लेकर दहशत ज्यादा है।

डरें नहीं, बस सावधानी बरतें
स्वास्थ्य मंत्रालय से मिलने वाली सूची से विदेश से लौटने वालों की स्क्रीनिंग कराई जा रही है। जिनमें कोरोना से मिलते लक्षण मिले हैं, उनके ब्लड, सीरम, थ्रोट टेस्ट कराए गए हैं। अब तक सब सामान्य मिला है। विभाग की टीम लगातार स्क्रीनिंग में शामिल होने का हालचाल ले रही है। परिवारीजनों को सावधानी बरतने के तरीके बता दिए जाते हैं। कोरोना से डरें नहीं, बस सावधानी बरतें। समस्या होने पर तत्काल सूचना दें। -डॉ. नरेंद्र अग्रवाल सीएमओ

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