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KGMU के डॉक्टरों का कमाल: 5 घंटे की सर्जरी, 11 माह की बच्ची के दिल में हुए तीन छेद किए बंद

Wed, 13 Sep 2017 01:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 13 Sep 2017 01:16 AM IST
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surgery of an eleven months girl in KGMU.
प्रतीकात्मक फोटो

केजीएमयू के डॉक्टरों ने मंगलवार को 11 माह की बच्ची के जन्मजात दिल में हुए तीन छेदों को पांच घंटे की सर्जरी कर बंद कर दिया। ऑपरेशन में सबसे बड़ी चुनौती थी बच्ची का वजन महज छह किग्रा. होना। अब तक 10 किग्रा. से कम वजन के बच्चों को ऐसे ऑपरेशन के लिए दिल्ली के एम्स भेजा जाता था।

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केस स्टडी : निमोनिया की शिकायत के साथ लाई गई थी बच्ची
कार्डियो वैस्कुलर थोरैसिक सर्जरी (सीवीटीएस) विभाग के डॉक्टर अंबरीष कुमार के मुताबिक बस्ती जिले से लाई गई मासूम को निमोनिया की शिकायत थी। जांच में पता चला कि उसके दिल में तीन सुराख हैं।
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केस खास क्यों : आमतौर पर ऐसे केसेज में दो ही सुराख होते हैं
डॉ. अंबरीष बताते हैं कि आमतौर पर इस तरह की बीमारी के साथ आने वाले छोटे बच्चों के दिल में दो ही सुराख देखे जाते हैं। इसके कारण बच्चों का वजन नहीं बढ़ता है। पर इस केस में तीन सुराख थे।
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फेफड़ों को पहुंच रहा था नुकसान
तीन सुराख होने से फेफड़े को तीन गुना खून की सप्लाई हो रही थी। इससे फेफेड़ों को भी नुकसान पहुंच रहा था। ये छेद काफी तेजी से बढ़ रहे थे।

बार-बार हो रहा था संक्रमण

surgery of an eleven months girl in KGMU.
डॉ. अंबरीष व डॉ. शेखर टंडन - फोटो : amar ujala

25 अगस्त को बच्ची को भर्ती किया गया। सर्जरी में बड़ी चुनौती उसे बार-बार हो रहा संक्रमण भी था। खून की कमी से भी ऑपरेशन जटिल था। इससे निपटने के तीन यूनिट ब्लड का अतिरिक्त इंतजाम किया गया। हालांकि मात्र एक यूनिट खून की ही जरूरत पड़ी। डॉ. अंबरीष के मुताबिक मंगलवार सुबह 10.30 बजे सर्जरी शुरू हुई जो दोपहर साढे़ तीन बजे पूरी हुई।

ऐसे की सर्जरी
डॉ. अंबरीष के मुताबिक एनेस्थीसिया के बाद सबसे पहले दिल और फेफड़े की खून की सप्लाई को बंद कर हार्ट एंड लंग मशीन के जरिए शरीर में खून की सप्लाई दी गई। इसके बाद उस वेंट्रीक्यूलर सेप्टल डिफेक्ट को दूर किया गया। फिर फेफ ड़े को अधिक खून सप्लाई करने वाले आर्टियल सेप्टल डिफेक्ट यानी सुराख को बंद कर दिया गया।

इस टीम ने की सर्जरी
डॉ. अंबरीष, डॉ. शेखर टंडन और शैलेंद्र सर्जरी में शामिल थे।

मुफ्त हुआ इलाज
डॉ. शेखर ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य गारंटी कार्यक्रम के तहत ऑपरेशन मुफ्त में किया गया है। इस योजना के तहत 19 साल तक के लोगों के दिल की बीमारी का फ्री इलाज किया जाता है। जबकि ऐसे ऑपरेशन में सात लाख तक का खर्च आता है।

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